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* मानसिकता में बदलाव से ही होगा नारी सशंक्तिकरण .

* दिल्ली जैसी घटनाएं मानवता के लिए शर्मसार .

* ओंकारेश्वर् गायत्री शक्तिपीठ प्राण प्रतिष्ठा समारोह  .

* दो दिन चलेगा यह समारोह .

* हजारों की तादाद में जुटे गायत्री साधक .

* नारी सशंक्तिकरण अभियान के लिए दिलाया संकल्प .

    वैचारिक दृष्टिकोण से जब तक हर व्यक्ति उन्नत नहीं होगा तब तक समाज बदहाली का ही शिकार होगा। उक्त बातें http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/AWGP_Its_Activities/Establishments/Shantikunj">शान्तिकुंज प्रमुख डाँ . प्रणव पण्ड्या ने म.प्र. के पावन तीर्थ ओंकारेश्वर् में गायत्री शक्तिपीठ की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में कही। सिवनी, नागपुर दिल्ली आदि की शर्मनाक घटना पर अपना रोष जताते हुए उन्होने कहा कि यह घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है। हजारों की संख्या में उपस्थित परिजनों से अपील करते हुए http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/AWGP_Its_Activities/Establishments/Shantikunj">शान्तिकुंज प्रमुख ने कहा कि अब सूक्ष्म वातावरण को परिष्कृत करने का समय आ गया है। हमें एक ऐसा प्रवाह बनाना होगा जो ना सिर्फ स्थूल संसार को बल्कि सूक्ष्म संसार को निखारे ताकि व्यक्ति के सोंच में परिवर्तन आ सके। उन्होने बताया कि मनुष्य की श्रेष्ठता उसके ज्ञानात्मक और भावनात्मक पक्ष के कारण है। यदि उसमें गिरावट आएगी तो निश्चय ही परिणाम स्वरूप गुड़िया और दामिनी की अस्मत बिखरती रहेगी। समाज में आज मां बेटी तो है किन्तु बहनों की संख्या घटती जा रही है। इसके प्रमुख कारण सांचे में  परिवर्तन ही है। गायत्री परिवार ने  सोंच में परिवर्तन का बीडा उठाया है। श्रद्धेय शैल दीदी के नेतृत्व में गायत्री परिवार महिला मंडल चला रहा है जिसकी संख्या आज लाखों में ह। नारी जागरण द्वारा समाज सुधार की यह अनुपम मिसाल है। ओंकारेश्वर् की गौरव गरिमा पर प्रकाश डालते हुए डाँ. पण्ड्या ने उपस्थित जन समुदाय से आह्वान किया कि आप अपनी पहचान को खोने न दें। उच्च मानवीय सभ्यता पर जब भी आँच आती है तो भारत का यह हृदय क्षेत्र कभी पीछे नहीं रहा है। महावीर के सूत्र जिओ और जीने दो पर बल डालते हुए http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/AWGP_Its_Activities/Establishments/Shantikunj">शान्तिकुंज प्रमुख ने एक सरस संस्कारयुक्त समाज निर्माण करने की अपील की। वहीं इन कुकर्मों में बच्चों की संलिप्तता पर गहरा रोष जताते हुए डाँ. पण्ड्या ने कहा कि महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार हमसे हमारी संस्कृति को छिनता जा रहा है। इन तमाम घटनाओं के समाधान के लिए उन्होने नारी सशक्तिकरण की अपील करते हुए उन्होंने बताया कि नारी समाज की धुरी है क्यों कि वह बेटी, मां के रूप में समाज को एक राह दिखाती है। अपनी मौलिक सनातन पहचान पर आए संकट तथा प्रतिफल के रूप में हो रहे इन पाश्विक घटनाओं का एक और कारण के रूप में आधुनिकता की आंधी ही है। उन्होंने कहा कि फैशन, टीवी इंटरनेट ने जितनी सुविधा दी है उतना ही हमसे कुछ छिन भी लिया है। किस्से कहानियों के माध्यम से बच्चों में उच्च मानसिकता का संचार होता है पर टीवी के कुछ कार्यक्रम और इंटरनेट ने इसे प्रतिस्थापित कर दिया है जिससे उनकी अक्रामकता में वृद्धि हुई है। इस पैशाचिक आंधी को दबाने के लिए ज्ञानक्रांति की अलख जगाने के लिए डाँ. पण्ड्या ने ढेरो मात्रा में वाचनालय खोलने की अपील की।

दो दिवसीय इस प्राण प्रतिष्ठा समारोह में http://hindi.awgp.org/gayatri/AWGP_Offers/AWGP_Its_Activities/Establishments/Shantikunj">शान्तिकुंज अधिष्ठात्री शैलबाला पण्ड्या ने नारी जागरण अभियान को वेगवान बनाने के लिए जोर देते हुए उपस्थित जन समुदाय से नारी को आगे लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब तक नारी का उत्थान संभव नहीं तब तक समाज आगे नहीं बढेगा।महिलाओ को सुशिक्षित स्वावलंबी सुसंस्कारित बनाने का जो कार्य गायत्री परिवार इन दिनों कर रहा है उसी से ऐसी घटनाएँ रुकना संभव है। माता जीजाबाई, अहिल्या के उदाहरण देते हुए उन्होंने पुनः शक्ति को जगाने का आह्वान किया। समारोह में युवा चेतना शिविर महिला सम्मेलन के अलावा 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ, विभिन्न संस्कार, आदि कार्यक्रम सम्पन्न हो रहे हैं।


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