देवभूमि उत्तराखंड स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय व आईआईटी दिल्ली वैज्ञानिक अध्यात्मवाद के विकास के लिए एक साथ मिलकर कार्य करेंगे। इसके लिए फोरम बनाया गया है। वैज्ञानिक अध्यात्मवाद पर बने इस फोरम का मुख्यालय दिल्ली में होगा। फोरम में नोडल आफीसर की जिम्मेदारी देसंविवि के डीपी सिंह को सौंपी गयी है। उनके साथ आईआईटी दिल्ली व देसंविवि के वरिष्ठ अधिकारियों का एक दल होगा, जो देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में वैज्ञानिक अध्यात्मवाद के पाठ्यक्रम पर कार्य करेगा। साथ ही गांवों के विकास के लिए गौ केन्द्रित अर्थव्यवस्था तथा स्वावलम्बन के लिए लोगों को प्रेरित करेगा। गांवों के विकास के लिए सत्प्रवृत्तियों को बढ़ाया जाएगा जिसके लिए समूह साधना पर जोर दिया जाएगा। दो दिवसीय प्राचीन, विज्ञान एवं अध्यात्म कार्यशाला के समापन अवसर पर यह निष्कर्ष परम कम्प्यूटर के जनक पद्मश्री डाॅ विजय पाण्डुरंग भटकर, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डाॅ प्रणव पण्ड्याजी व अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिकों की उपस्थिति में निकाला गया।

इस अवसर पर कुलाधिपति डाॅ प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि देश को यदि पुनः जगतगुरु बनाना है तो उसके लिए विचारों की क्रान्ति अनिवार्य है। आज समाज में मानसिक दुष्प्रवृत्तियों का जोर है। समाज में सत्प्रवृत्तियां घट गई है। साथ ही उसका प्रचार प्रसार भी समुचित ढंग से नहीं हो पा रहा है। ऐसे में महामानवों की एक फौज खड़ी करनी होगी जो समाज मे सत्प्रवृत्तियों के विकास में कार्यरत हों। डाॅ0 पण्ड्या ने कहा कहा साइंस टेक्स्ट बुक से नहीं, जीवन से सीखी जानी चाहिए।

सीडैक के संस्थापक पद्मश्री डाॅ. विजय भटकर ने कहा अध्यात्म एवं विज्ञान अलग नहीं बल्कि एक दूसरे के पूरक हैं। भारत को पुनः विश्वगुरू तथा मानवता को नई दिशा देने के लिए इन दोनों का समन्वय जरूरी है। भारतीय ज्ञान प्रणाली पर प्रकाश डालते हुए परम कम्प्यटूर के जनक डाॅ. भटकर ने कहा कि विज्ञान को पूर्ण मानना अज्ञानता है क्योंकि व्यावहारिक एवं यथार्थ ज्ञान ही असल विज्ञान होता है। उन्होंने देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में अध्यात्म विज्ञान पर पाठ्यक्रम चलाने की बात कही। गौरतलब है कि देसंविवि में सन् 2002 से ही अध्यात्म विज्ञान पर पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसका अब तक आशातीत परिणाम सामने आये हैं। आयोजन में पहुंचे आईआईटी कानुपर के डाॅ एस सी वर्मा, सत्यसाईं इंस्टीट्यूट तमिलनाडू की डाॅ एम प्रफुल्ल, देसंविवि के प्रति कुलपति डाॅ चिन्मय पण्ड्या सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर्स ने फोरम बनने पर सहमति जताई।




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