सकारात्मक परिवर्तन व वैचारिक क्रांति के लिए पत्रकारिता महत्त्वपूर्ण : श्री चन्द्रभानु पटनायक
उपासना की भाँति पत्रकारिता को अपनाये :-शरद पारधी
पत्रकारिता केवल व्यवसाय नहीं :- डॉ गोविन्द सिंह


देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार केन्द्र की ओर से सकारात्मक परिवर्तन के लिए पत्रकारिता विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी की शुरुआत देसंविवि के कुलगीत से हुई।

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि सीसीटीई- युनिवर्सिटी ऑफ हवाई के निदेशक चन्द्रभानु पटनायक ने देश- विदेश में पत्रकारिता के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डाला। भारत व विदेशों में पत्रकारिता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ का वातावरण पत्रकारिता को निखारने में बहुत ही अनुकूल है। उन्होंने सकारात्मक परिवर्तन व वैचारिक क्रांति के लिए पत्रकारिता को महत्त्वपूर्ण माध्यम बताया।

इससे पूर्व संगोष्ठी की शुरुआत करते हुए देसंविवि के कुलपति शरद पारधी ने कहा कि विश्वभर में प्रकाशित समाचार पत्र- पत्रिकाओं के बीच बहुत कम ही पत्र- पत्रिकाएँ दिखाई देती हैं, जो सच्चे अर्थों में समाज के लिए प्रेरणादायक, विधेयात्मक समाचार, आलेख प्रकाशित करते हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकार अपनी कलम से समाज को नई दिशा, विचारधारा देने में सक्षम हैं। उन्होंने पत्रकारिता को व्यवसाय नहीं, उपासना की भांति अपनाने का आवाहन किया।

प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि आज राष्ट्र के सामने कई समस्याएं विकट परिस्थितियाँ पैदा कर रही हैं। उनके समाधान के लिए विचारशील और संवेदनशाली व्यक्तित्वों को संगठित होना चाहिए। आजादी के समय पत्रकारिता के क्षेत्र में अखंड ज्योति व कई अन्य प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के संपादक के रूप में पं० श्रीराम शर्मा आचार्य जी के कर्तृत्व को याद करते हुए प्रतिकुलपति ने कहा कि तब जिस तरह वैचारिक क्रांति में पत्रकारिता महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, आज उस भूमिका की फिर से आवश्यकता है।

स्कूल आफ ह्यूमेनिटीस, यूओयू हल्द्वानी के निदेशक डॉ गोविन्द सिंह ने कहा कि पत्रकारिता केवल व्यवसाय के लिए नहीं, अच्छे विचारों, सेवा कार्यों को प्रोत्साहन देने एवं इसे जन- जन तक पहुंचाने के लिए होना चाहिए। उन्होंने महर्षि अरविन्द, महात्मा गाँधी, गणेशशंकर विद्यार्थी आदि लेखकों, पत्रकारों को याद करते हुए उनके सुझाये दिशा- निर्देशों को पालन करने पर बल दिया। सकारात्मक परिवर्तन के लिए पत्रकारिता पर दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार श्री कुशल कोठियाल ने ने मार्गदर्शन किया।

इस अवसर पर पीआईबी चंडीगढ के निदेशक- भूपेन्द्र कैंथोला, देसंविवि के कुलसचिव श्री संदीप कुमार, डॉ राजकुमार भारद्वाज, फिल्म मेकर आकांक्षा जोशी, डॉ दिनेश चमोला, सुश्री प्रतिभा ज्योति, डॉ सुखनंदन सिंह सहित अनेक शैक्षणिक संस्थानों के प्रोफेसर्स एवं वरिष्ठ पत्रकारगण उपस्थित थे। इस दौरान ‘संस्कृति संचार’ पत्रिका का विमोचन किया गया।

सेमीनार के पहले दिन चार समानान्तर सत्रों में ग्रामीण विकास, सिनेमा, मीडिया शिक्षा, लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका विषय पर चर्चा हुई। ग्रामीण विकास सत्र में शोधार्थियों ने विकासात्मक पत्रकारिता पर जोर दिया, तो सिनेमा जगत पर शोध करने वाले शोधार्थियों ने आधुनिक समय में सिनेमा के बदलते स्वरूप और उसके परिणामों पर चर्चा की। उन्होंने सिनेमा में चल रही अश्लीलता पर चिंता व्यक्त की। ‘मीडिया के शिक्षा सत्र’ में आदर्श पत्रकारों को गढ़ने पर जोर दिया गया और सबसे महत्वपूर्ण सत्र ‘लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका’ विषय पर गहन चर्चा हुई। इस दौरान वक्ताओं ने मीडिया के बदलते सरोकार पर चिंता व्यक्त की तो उसकी उपयोगिता को भी सराहा। गौरतलब है कि इस दो दिवसीय सेमीनार में देश भर के २५ विश्वविद्यालय से करीब ८० शोधार्थी, विद्यार्थी, शिक्षक और पत्रकार इस विषय  पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे।

सेमीनार में पर्यावरण विषय पर आधारित आकांक्षा जोशी द्वारा निर्देशित डॉक्यूमेंट्री ‘अर्थ विटनेश’ एवं श्री उमेश अग्रवाल की प्रसिद्ध डॉक्यूमेंट्री ‘ब्रोकइिंग न्यूज’ दिखाई गयी। इसमें प्रदूषण के कारणों और मानवों द्वारा हुई लापरवाही को गंभीरता से उठाया है। शाम को देसंविवि के मध्य स्थित प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर प्रागंण में भव्य दीपयज्ञ हुआ। इस दौरान कई राज्यों से आये वरिष्ठ पत्रकार, मीडिया के नामचीन हस्तियों एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिवार सम्मिलित थे।




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