पत्रकार शब्दों का सौदागर :-  डॉ. चिन्मय पण्ड्या ,
वक्ताओं ने कहा- मीडिया को सकारात्मक दिशा में बढ़ना चाहिए, 
२५ विश्वविद्यालयों के ८० शोधार्थियों ने प्रस्तुत किये लघु शोधपत्र 

पत्र- पत्रिकाओं में भारी ताकत होती है। निरंकुश लोगों की संकीर्ण विचारधारा के कारण प्राचीन ख्याति को इसने खो दिया है। आज उसे पुनः जगाने की जरूरत है। यह विचार देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में चले दो दिवसीय राष्ट्रीय सकारात्मक पत्रकारिता सेमीनार में उभर कर सामने आया। 

देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि पत्रकार शब्दों का सौदागर होता है, वह जब जैसा चाहे, समाज का रूख मोड़ सकता है। उसे समाज को सही दिशा देने में इसका प्रयोग करना चाहिए। बिना विज्ञापन के १९३७ से सतत प्रकाशित अखंड ज्योति पत्रिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इसके आलेख शिक्षा के साथ- साथ विद्या के पक्ष को भी उभारते हैं। यह पत्रिका व्यक्ति निर्माण, समाज निर्माण व राष्ट्र निर्माण हेतु जन- जन को संकल्पित होने के लिए प्रेरित करती है। प्रतिकुलपति ने कहा कि यह पत्रिका व्यावसायिक न होकर केवल ऊँचे उद्देश्य एवं वैचारिक परिवर्तन के लिए प्रकाशित होती है। 

पीआईबी के निदेशक भूपेन्द्र कैंथोला ने कहा कि सच्ची पत्रकारिता क्षेत्रों से होती है, न कि वातानुकुलित कमरें में बैठकर। दूरदर्शन देहरादून के निदेशक डॉ. केके रत्तू ने कहा कि मीडिया की सार्थकता तभी है, जब सकारात्मक पत्रकारिता देश भर में फैले। मुम्बई की फिल्म मेकर आकांक्षा जोशी ने कहा कि नैतिकता व न्यायिक समझ को पत्रकारिता के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। डॉ दिनेश चमौला ने कहा कि आज हर आदमी पत्रकार की भूमिका में फेसबुक, ट्यिूटर जैसे सोशल मीडिया में सक्रिय है। राजकुमार भारद्वाज ने कहा कि श्रेष्ठ पत्रकारिता वह है, जिससे समाज को नई दिशा मिले। मुम्बई से आये फिल्म मेकर मयंक श्रीवास्तव ने कहा कि व्यक्तित्व के धनी पत्रकार ही अच्छी पत्रकारिता कर सकता है। माखनलाल चतुर्वेदी विवि भोपाल से आई डॉ मोनिका वर्मा ने कहा कि देसंविवि के ‘पत्रकारिता विभाग’ पत्रकारिता को नये स्वरूप प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। किसान भारती के संपादक दिनेश सेमवाल ने कहा कि लिखने योग्य किया जाय, तभी सार्थक पत्रकारिता संभव है। इसके अलावा प्रो० सुरेन्द्र पाल, नीरज खत्री, अमिताभ श्रीवास्तव आदि ने भी विचार प्रकट किये। 

सेमीनार में पहुँचे फिल्म मेकर, वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादकों ने माना कि मीडिया एक ऐसा सशक्त माध्यम है जिससे जीवन की कई समस्याओं का हल प्राप्त किया जा सकता है। इससे सैद्धांतिक व व्यावहारिक स्तर पर मार्गदर्शन भी मिलता है। सर्वधर्म समभाव को लेकर चल रहे मीडिया में हर आयु वर्ग की भागीदारी भी रहती है। मीडिया एक तरफ कमजोरियों को उजागर करता है, तो वहीं दूसरी तरफ अच्छे कार्यों की सराहना भी होती है और मानवीय जीवन की आदर्शवादी उत्कृष्टता से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में इसकी सकारात्मकता भी दिखाई देती है। 

दो दिन तक चले इस सेमीनार में २५ विश्वविद्यालय की ओर से ८० लघु शोध पत्र प्रस्तुत किये गये। इनमें से सर्वश्रेष्ठ पाँच शोधपत्र को पुरस्कृत किये गये।


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