राजस्थान के मनोरमा गोलोकतीर्थ, नंदगाँव, पथमेड़ा में आयोजित श्री गोनवरात्रि महामहोत्सव में आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने कहा गौरक्षा नहीं हुई तो प्रकृति के प्रकोप हमें झेलने ही पड़ेंगे|


गोरक्षा के लिए समर्पित संत श्री दत्तशरणानंद जी द्वारा मनोरमा गोलोकतीर्थ, नंदगाँव में गोनवरात्रि महामहोत्सव का आयोजन किया गया। नौ दिनों तक चले इस महोत्सव में नित्य सुरभि गोरक्षा ेयज्ञ और कथाओं का आयोजन हुआ।  आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी गोनवरात्रि की मंगलवेला में आयोजित अखिल भारतीय गोसेवा संगोष्ठियों के क्रम में प्रथम दिन (२८ अक्टूबर) के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित थे। कथा व्यास संत राजेन्द्राचार्य जी, श्री गोविंददेव जी, श्री दर्शनानंद जी, श्री गोपालशरण जी, श्री धनाराम जी, श्री श्रवणानंद जी, स्वामी सुमेधानंद सरस्वती (सांसद सीकर क्षेत्र) आदि गोसेवा के लिए समर्पित देश के कई गणमान्य संतों ने इसमें भाग लिया। डॉ. प्रणव जी ने संत सम्मेलन में भागीदारी के अलावा उपस्थित संतों से गोरक्षा के उपायों पर व्यक्तिगत चर्चाएँ कीं। गोसेवकों की आम सभा को भी संबोधित किया।


गोमाता की वेदना और हमारी दुर्दशा

माता अत्यंत संवेदनशील होती है। उसके अंतःकरण से प्यार और आशीर्वाद झरता है तो उसकी आह अभिशाप बनकर कहर बरपाती है। गाय हमारी माता है, हमारी ऋषि-कृषि प्रधान संस्कृति का प्रमुख आधार है। उसकी संवेदनाएँ सारे जगत को प्रभावित करती हैं।

इन दिनों अतिवृष्टि, अनावृष्टि, भूकम्प, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ रही हैं। उनका कारण हमारी अनास्था प्रधान जीवन शैली है, जिसके कारण गोवध और धरती पर प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। गोमाता पर हो रहा अत्याचार अगर रोका नहीं गया तो प्रकृति के प्रकोप हमें झेलने ही पड़ेंगे। गोमाता की करुण वेदना से धरती काँपती है। तब वह न हिंदू देखती है न मुसलमान, न नर देखती है न नारी। उसका कहर सभी को झेलना पड़ता है। प्रकृति अपनी सहचरी गोमाता की उपेक्षा कभी स्वीकार नहीं करेगी।


गायत्री परिवार का गोसंरक्षण अभियान

गोसंरक्षण के लिए हमें गाय के लाभों पर गहन अनुसंधान करना होगा। गायत्री परिवार द्वारा २०० गोशालाएँ चलायी जा रही है और इस दिशा में अनुसंधान किये जा रहे हैं। स्वास्थ्य और कृषि की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में अनेक प्रयोग और परीक्षण किये जा रहे हैं। हम इस कार्य के लिए डीआरडीओ, आईआईटी जैसी उच्च संस्थाओं के वैज्ञानिकों का सहयोग ले रहे हैं।

हम गाँव-गाँव गोशालाएँ आरंभ कराने को उत्साहित हैं। गोशाला के बिना आदर्श गाँव की संकल्पना पूरी नहीं हो सकती। गोरक्षा के लिए, गोशालाओं के संचालन के लिए हम गायत्री परिवार के १० करोड़ परिजनों से कहेंगे कि वे गोमाता के लिए एक रुपया रोज निकालें। भारत का हर परिवार यदि एक-एक गाय के संरक्षण की जिम्मेदारी ले तो गोरक्षा का अभियान निश्चित रूप से सफल होकर रहेगा। जो लोग गाय पाल सकते हैं वे जरूर पालें। शहरों में रहने वाले लोग एक-एक गाय के पालन-पोषण का दायित्व सँभालें।

संगठित हो रहा है संत समाज

गोरक्षा का कार्य केवल सरकार और कानून से पूरा नहीं होगा। हमें इसके लिए जनचेतना जगानी होगी। यह दायित्व सँभालने के लिए अब संत समाज संगठित हो रहा है। हम इस कार्य में भरपूर योगदान देंगे, गोमाता की रक्षा के लिए हम जनचेतना जगाने का अभियान तेज करेंगे।




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