गोवंश के संरक्षण के लिए संत समाज जनचेतना जगाने का प्रभावी कार्य कर सकता है, लेकिन अभीष्ट सफलताओं के लिए सरकारी सहयोग की भी भरपूर आवश्यकता है। आदरणीय डॉ. प्रणव जी ने इस संबंध में संतों से व्यक्तिगत स्तर पर और संगोष्ठी में सामूहिक चर्चाएँ की। 

गोवंश की उपयोगिता बढ़ाने के लिए चिकित्सा, कृषि एवं अन्य क्षेत्रों में अनुसंधान कार्य को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन, गो-तस्करी को रोकने के लिए कानूनों का कड़ाई से पालन, देशी गोवंश की नस्लों का सुधार, गोचर के लिए भूमि का सीमांकन, गोपालकों की सहकारी समितियों के निर्माण जैसे अनेक विषयों की ओर ध्यानाकर्षण किया गया। इन सबके लिए विशेष गोपालन मंत्रालय बनाने की भी नितांत आवश्यकता अनुभव की गयी। 

आदरणीय डॉ. प्रणव जी ने इस दिशा में प्रभावी पहल करने का आश्वासन संतों को दिया। उन्होंने गोरक्षा के लिए प्रयत्नशील संघ प्रमुख श्री मोहन भागवत, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सहित सम्बद्ध मंत्रियों और अधिकारियों से इस विषय में चर्चा करने का आश्वासन उन्होंने दिया। गोवंश को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किये जाने पर भी चर्चा हुई। शांतिकुंज प्रतिनिधि ने गायत्री परिवार द्वारा गाँवों के आदर्श विकास में गोसंवर्धन को विशेष महत्त्व दिये जाने की जानकारी दी। 

दक्षिण जोन प्रभारी शांतिकुंज प्रतिनिधि डॉ. बृजमोहन गौड़ एवं श्री उत्तम गायकवाड़ तथा श्री हरिशंकर जी और श्री गोपाल जी ने भी चर्चा और समन्वय में अहम भूमिका निभाई                                                             -

हमारी संस्कृति का आधार मानी जाने वाली गोमाता के संरक्षण के लिए स्वामी दत्तशरणानंद जी द्वारा जो भागीरथी प्रयास किया जा रहा है, वह लोगों के भामाशाही सहयोग से ही चल रहा है। गायत्री परिवार का इसमें विशिष्ट योगदान है। दक्षिण भारत में युग निर्माण आन्दोलन से जुड़े अनेक राजस्थानी परिजन गोशालाओं के संचालन में अहम योगदान दे रहे हैं। गायत्री परिवार कर्नाटक के प्रभारी बैंगलुरु निवासी श्री हरिशंकर राजपुरोहित, श्री संग्राम सिंह राजपुरोहत, श्री देवाराम राजपुरोहित और गायत्री परिवार तमिलनाडु के प्रभारी श्री गोपाल राजपुरोहित का भी इसमें बड़ा योगदान है।

गायत्री परिवार की इसी उदारता और सेवाभावना को देखते हुए स्वामी दत्तशरणानंद जी आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी को पथमेड़ा बुलाना चाहते थे। गोरक्षा के लिए चल रहे आन्दोलन को गति देने के लिए उनकी गायत्री परिवार से बड़ी आशाएँ हैं। इसी दृष्टि से उन्होंने हरिशंकर जी और गोपाल जी के माध्यम से ही आदरणीय डॉ. प्रणव जी को श्री गोनवरात्रि महामहोत्सव में आमंत्रित किया था। गोरक्षा जैसे पुनीत अभियान में योगदान देने के लिए सदैव तत्पर आदरणीय डॉ. साहब ने इसे सहर्ष स्वीकार किया। ऐसे पुनीत प्रयोजन में भागीदारी को उन्होंने अपना सौभाग्य बताया। 

गोसंवर्धन के लिए हुआ सुरभि गौपुष्टि यज्ञ

श्री गोनवरात्रि महामहोत्सव में गोरक्षार्थ विशेष १०८ वेदीय यज्ञ आयोजित हुआ। हर वेदी के समक्ष गोमाता को बिठाया गया। देव शक्तियों के साथ गोमाता का पूजन हुआ। गोरक्षार्थ मंत्रों के साथ आहुतियाँ अग्नि में समर्पित नहीं की गयी, बल्कि गोग्रास की आहुतियाँ एक पात्र में एकत्रित की गयीं। इसे गोमाता को ही खिलाया गया। आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने इस विशिष्ट यज्ञ में बड़ी श्रद्धा-भावना के साथ भाग लिया। 




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