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अच्छी पुस्तकें मनुष्य के अभिन्न मित्र हैं। सत्साहित्य के पठन पाठन से व्यक्ति को नयी दिशाधारा मिलती है। मनुष्य के जीवन में परिवर्तन लाने में सत्साहित्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी जमाने में जब लिपि और भाषा का सम्यक् विकास नहीं हुआ था, आज की तरह संसाधन उपलब्ध नहीं थे, तब श्रौत स्वाध्याय का प्रचलन था। ज्ञान का आदान प्रदान एवं संचय सुनकर और रटाकर होता था। इसी आधार पर वेदों को ‘श्रुति’ कहा गया है। आज समय के साथ पठन पाठन की प्रक्रिया में परिवर्तन आ गया है। पुस्तक की जगह अब टैबलेट ने ले ली है। ऐसे में विचार क्रान्ति अभियान नामक आन्दोलन ने नये युग के साथ कदम से कदम मिलाते हुए नयी शुरुआत की है। विचार क्रान्ति अभियान के जनक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा लिखित पुस्तकों के स्वाध्याय के लिए अभियान के प्रमुख केन्द्र शांतिकुंज हरिद्वार में वेब स्वाध्याय का शुभारम्भ किया गया है। वैज्ञानिक और तकनीकी के इस युग में वेब स्वाध्याय संस्कार और संस्कृति से जोड़ने का अभिनव प्रयोग है। इसके अन्तर्गत आध्यात्मिक, वैचारिक एवं जीवन से जुड़ी अनेक समस्याओं का समाधान तत्काल मिलता है।

स्वाध्याय सन्दोह- विचार मन्थन सत्र के नाम से पाँच दिवसीय सत्र संस्था के प्रमुख केन्द्र शांतिकुंज में निरन्तर आयोजित होते रहते हैं। वेब स्वाध्याय एवं आईटी डिपार्टमेंट से जुड़े कुलदीप पाण्डे के अनुसार  www.webswadhyay.org नामक वेबसाइड के माध्यम से विश्वभर के आस्ट्रेलिया, अमेरिका, न्यूजीलैण्ड, इंग्लैंड आदि कई देशों के उत्सुक स्वाध्यायशील इससे जुड़े हुए हैं। वेब स्वाध्याय के माध्यम से प्रति दिन अलग अलग विषयों पर चर्चाएँ होती हैं जिसमें स्काइप, फेसबुक, गुगलप्लस जैसी कनेक्टिंग वेबसाइटों का सहयोग लेकर ग्रुप्स के माध्यम से चर्चाओं को अंजाम दिया जाता है जिसमें ऑडियो, वीडियो, थ्रीडी एनिमेशन का सहयोग भी लिया जाता है। श्री पाण्डे के अनुसार प्रति दिन सुबह विश्वभर के लोगों को ध्यान से जोड़ा जाता है। अलग अलग समूहों के माध्यम से - घण्टे विभिन्न विषयों पर सामूहिक स्वाध्याय होता है।

गायत्री परिवार प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्या के नेतृत्व में चल रहे वेब स्वाध्याय ज्ञान वर्धन की दिशा में एक ऐसी शुरूआत है जिसमें घर बैठे ही दुनिया भरके लोगों के साथ जुड़ने, सम्बन्ध बनाने, परस्पर विचारों और भावनाओं के आदान प्रदान करने का यह एक अच्छा माध्यम है। इससे हमारी भावी पीढ़ी के नवनिर्माण यह प्रभावी माध्यम साबित होगा। डॉ० पण्ड्याजी के अनुसार आज की युवा पीढ़ी जहाँ वांचन से जी चुरा रही है, ऐसे में वेब स्वाध्याय वांचन के प्रति उनकी रुचि बढ़ाने में मददगार सिद्ध होगा।


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