भारतीय संस्कृति के उदात्त आदर्शों का अवलम्बन करते हुए सात विदेशी नागरिकों ने गायत्री महामंत्र की दीक्षा लेने के बाद शांतिकुंज में रहकर सवालाख गायत्री महामंत्र जप अनुष्ठान किया। रूस, यूक्रेन और लात्विया के नागरिकों के दल को दीक्षा दिलाते समय आद. डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने उनके भारतीय नाम रखते हुए नये जीवन लक्ष्य के साथ नयी पहचान दी। मारीना और तान्या को मीरा और सुगीता नाम दिया गया, जबकि यवगेनी और यूरा अब कृष्णा व विदुर  कहलाने लगे।

आध्यात्मिक जिज्ञासाओं से लबरेज दल के सदस्य परम पूज्य गुरुदेव के जीवन में अभीष्ट आदर्शों को पाकर गद्गद हुए। गुरुरूप में उनका वरण कर वे उन आदर्शों को जीवन में उतारने और विश्व में शांति- सद्भाव का संदेश फैलाने के लिए उत्साहित हैं। वे यहाँ रहकर भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा का गहन अध्ययन कर रहे हैं। युगऋषि का संदेश अपने क्षेत्र में पहुँचाने के लिए वे समयदान- अंशदान करते रहेंगे।   



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