नन्हा रोहित जब योग के आसनों के क्रम में शिरपीड़ासन, मूढ़ गर्भासन, हस्तबद्ध शिरपादासन, शकुनि आसन, विपरीत पादांगुष्ठशीषा स्पर्शासन, कंदपीड़ ऊर्ध्वनमस्कारासन, लिकारासन सहित कई कठिन आसन करता है, तो लगता है जैसे उसकी हड्डी रबर की हो। डींबासन, टीट्टीभासन जैसे आसन तो सहज ही कर लेता है।

रोहित जब दो साल का था, तभी से गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के स्वयंसेवी कार्यकर्त्ता व योग शिक्षक पिता रवीन्द्र यादव जब योग, आसन करते, तो उनको देखकर स्व स्फूर्णा से योग करना प्रारंभ किया। शांतिकुंज स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का वातावरण और योग विभाग का सहयोग रोहित के प्रगति का कारण है।

३० सितम्बर २००४ में जन्मे रोहित अभी तक कई राज्य स्तरीय व नेशनल योग प्रतियोगिता में भाग ले चुका है और उसमें कई पदक भी अपने नाम किया है। रोहित योग में ही नहीं, पढ़ाई भी अव्वल रहते हैं।

गायत्री विद्यापीठ शांतिकुंज के कक्षा पाँचवी के छात्र रोहित उत्तराखंड के राज्य स्तरीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में भी कई पदक प्राप्त कर चुका है।

रोहित राजकपोत आसन, हनुमानासन, विपरीत शलभासन, मयूरासन,भीषणासन, कूर्मासन सहित १५० से अधिक आसन करते हैं। वे नित्य योगासन में ढाई घंटा का समय लगाता है। कुछ हमउम्र के बच्चों को निःशुल्क प्रशिक्षण भी देता है। बकौल रोहित का कहना है कि परम पूज्य गुरुदेव पं० श्रीराम शर्मा आचार्य जी आशीर्वाद एवं गायत्री परिवार प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्याजी व शैलबाला पण्ड्याजी का मार्गदर्शन निरंतर प्रगति में मुख्य सहायक है।

मूलतः बिहार के शेखपुरा जिले के रहने वाले रविन्द्र यादव जो गायत्री तीर्थ में सन् १९८७ से शांतिकुंज में सेवा दे रहे हैं- कहते हैं कि रोहित को योग के प्रति बचपन से ही लगाव था। जिस योगासन को करने में खुद उन्हें परेशानी होती थी, उसे वह सहजता से कर लेता था। उसकी लगन देखकर उन्हें विधिवत प्रशिक्षण देना शुरू किया और धीरे- धीरे वह योग में पारंगत होता चला गया 







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