जनहित का संकल्प लेकर देसंविवि का जत्था रवाना,
देसंविवि के २०६ युवा सात राज्यों में करेंगे परिव्रज्या |

हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा संचालित इंटर्नशीप कार्यक्रम के तहत २०६ युवाओं का एक जत्था आज परिव्रज्या के लिए रवाना हुआ। ये युवक- युवतियाँ अपने शिक्षण के दौरान मिले ज्ञान को समाज के बीच बाँटेंगे, वहीं योग, हवन, सत्संग सहित कई कार्यक्रम भी संचालित करेंगे। 

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय अपने अनूठी कार्यक्रम व नित नये प्रयोग के कारण देश आशाभरी नजर से देख रहा है। मात्र १४ वर्ष की अवधि में शिक्षा, शोध, सेवा और उपलब्धियों के अनेकों कीर्तिमान गढ़े हैं। इन उपलब्धियों में और नगीना गढ़ने के उद्देश्य से युवाओं की ६८ टोलियाँ बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली, मप्र, उप्र, महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों के लिए आज रवाना हुई। एक टोली में तीन से चार विद्यार्थी हैं। 

टोली को विदाई पाथेय देते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि किसी के काम जो आये, उसे इंसान कहते हैं, पराया दर्द जो अपनाये उसे भगवान कहते हैं। उन्होंने कहा कि पढ़ा हुआ ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसका सदुपयोग हो। समाज हित   के कार्यों में अपना ज्ञान लगाने से वह दिन दूनी रात चौगुनी की तरह बढ़ता है। कुलाधिपति ने इन छात्र- छात्राओं को योग एवं वैकल्पिक चिकित्सा के माध्यम से रोग मुक्त भारत के निर्माण  में सहभागी बनने का आवाहन किया। 

कुलसचिव संदीप कुमार के अनुसार इंटर्नशीप में इस वर्ष बीएड के १००, धर्मविज्ञान के २४, समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन के २२, सर्टिफिकेट योग के २७, एनीमेशन के ५, पीजी योग के ११ ग्राम  प्रबंधन के १५ व जल प्रबंधन के दो विद्यार्थी शामिल हैं। इनमें छात्राओं की संख्या अधिक हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षार्थी अपने आचरण व व्यवहार से ही विद्यार्थी बनता है। आप लोगों ने विवि के कुलपिता एवं कुलमाता के गर्भ में रहकर विद्यार्जन की है। जिसे चरितार्थ करना है। ये   विद्यार्थी एक माह से लेकर एक साल तक समयदान करेंगे। 





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