नीदरलैंड के डॉ लुईसवि.हि.प. अध्यक्ष पहुँचे गायत्री तीर्थ
 
विश्वहिन्दु परिषद के अध्यक्ष श्री अशोक सिंघलग्लोबल कंट्री आफ वर्ल्ड पीस के अध्यक्ष नीदरलैण्ड के डॉ लुईस रोसेट गायत्री तीर्थ शांतिकुंज पहुंचे। भारतीय संस्कृति के विकास में अग्रणी भूमिका निभाने वाले अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्याजी, डॉ लुईस व श्री सिंघल ने युवाओं में सकारात्मक बदलाव के विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा की। साथ ही वैदिक संस्कृति के विस्तार हेतु मिल जुलकर काम करने पर तीनों पुरोधा सहमत हुए। डॉ लुईस ने १९२६ से प्रज्वलित अखंड दीप का दर्शन कर कार्यक्रम की सफलता हेतु आशीर्वाद मांगा। देवात्मा हिमालय मंदिर में देवभूमि उत्तराखंड में स्थित चारों धाम के दर्शन किये।

श्री सिंघलडॉ लुईस ग्लोबल कंट्री आफ वर्ल्ड पीस संस्था द्वारा आयोजित होने वाले ‘वैदिक संस्कृति व ज्ञान’ विषय पर राष्ट्रीय सेमीनार का आमंत्रण देने पहुंचे थे। यह सेमीनार फरवरी २०१५ में दिल्ली में आयोजित होगी, जिसमें कई देशों के विद्वान भागीदारी करेंगे। इस अवसर पर संस्था के वरिष्ठ सदस्य वेस्टइंडीज के ब्रह्मस्वरूपानंद, विहिप के केन्द्रीय सचिव रोटेश्वर शर्मा, रमेश कुमार आदि आयोजक मंडल के सदस्य शामिल थे। सभी ने भारतीय संस्कृति के विकास में युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया।

गायत्री परिवार प्रमुख डॉ पण्ड्याजी ने कहा कि समाज की सबसे बड़ी शक्ति युवाओं के पास है। विचार क्रांति के माध्यम से आज के युवा को दिशाधारा देकर उसे समाज निर्माण में लगाने का कार्य गायत्री परिवार कर रहा है, जिसके अंतर्गत चलाये जा रहे शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, साधना, नारी जागरण, आदर्श ग्राम योजना आदि कार्यक्रमों की जानकारी डॉ पण्ड्या जी ने आगंतुको को दी।

श्री सिंघल ने कहा कि शांतिकुंज आकर पूज्य आचार्यश्री का आशीर्वाद व मार्गदर्शन लेने का सौभाग्य मिला। उनसे मिले अध्यात्म के सूत्र हम लोगों को आज भी राह दिखा रहे हैं। देसंविवि को देखकर मुझे लगताहै कि सच्चा मानव गढ़ने का कार्य यहाँ हो रहा है।

डॉ लुईस ने कहा कि वैदिक संस्कृति में विज्ञान के गूढ़ रहस्य छिपे पड़े हैं। आवश्यकता केवल उसका अध्ययन कर समाज के सामने लाने की है।

देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने बातचीत के दौरान कहा कि देवसंस्कृति विश्वविद्यालय विश्व के सांस्कृतिक नवोन्मेष के लिए संकल्पित है। यहाँ युवाओं को शिक्षा के साथ- साथ सच्चे मानव के रूप में गढ़ा जाता है।

डॉ लुईस ने देसंविवि के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्याजी को नीदरलैण्ड में संस्कृति के प्रचार के लिए आने का न्यौता दिया, जिसे डॉ पण्ड्या ने स्वीकार करते हुए अगले वर्ष आने की सहमति प्रदान की।





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