बुद्ध, महावीर की जन्मभूमि से फिर उभरें युगनिर्माणी विभूतियाँ - डॉ. प्रणव पण्ड्या जी
आज की हताश, निराश युवाशक्ति के लिए गीता का संदेश है - क्लैब्यं मा स्म गम: पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते।
हे मनुष्य! तू मनुष्य की तरह जी। पशुओं जैसा आचरण युवाओं को शोभा नहीं देता। व्यसन और फैशन के चंगुल में फँसना, अश्लील आचरण करना, मोबाइल और इंटरनेट पर समय व्यर्थ नष्टï करना तुम्हें शोभा नहीं देता। उठो! जागो! स्वामी विवेकानंद, शंकराचार्य, नचिकेता, पं.श्रीराम शर्मा आचार्य जी जैसे महापुरुषों का अनुसरण करो। स्वावलम्बी और स्वाध्यायशील बनो। मानवता का भाग्य बदलने के लिए संघर्ष करो। 
  
यह बुद्ध और महावीर जैसे अवतारों की जन्मभूमि है,  जिन्होंने दूसरों का दु:ख दूर करने के लिए साधना का मार्ग अपनाया था। इस बिहार को, इस देश को आज भी ऐसी ही चमकदार विभूतियों की जरूरत है।  हृदय में संवेदना हो तो एक चिन्गारी जीवन को बदल सकती है। युवाओ तुम अपने दीपक आप बनो। हर युवा उपासना, साधना, सेवा का पथ अपनाकर स्वयं प्रकाशित हो और अपने जैसे अन्य १० को प्रकाशित करे, इस युवा चेतना शिविर का यही संदेश है।  - आद. डॉ. प्रणव जी

अखिल विश्व गायत्री परिवार की युवाशक्ति के पथ प्रदर्शक देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी और प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या की मुख्य उपस्थिति में पटना के गाँधी मैदान और एस.के. मेमोरियल हॉल में २१ एवं २२ नवम्बर को बिहार प्रांत का प्रथम प्रांतीय युवा चेतना शिविर आयोजित हुआ। श्री श्याम रजक, खाद्य उपभोक्ता मंत्री, बिहार सरकार, मेदांता द मेडिसिटी, गुडग़ाँव के वरिष्ठï चिकित्सक डॉ. अजय आनंद झा, युवा प्रकोष्ठï प्रभारी शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री के.पी. दुबे, वरिष्ठï वयोवृद्ध कार्यकत्र्ता श्री मधेश्वर प्रसाद सिंह आईएएस आदि अनेक गणमान्यों की उपस्थिति में पूरे प्रदेश के २४०० युवाओं ने इसमें भाग लिया। 

खुद को बदलने की जरूरत
श्री श्याम रजक एवं श्री के.पी. दुबे द्वारा ध्वजारोहण के साथ शिविर का शुभारंभ हुआ। श्री रजक ने कहा कि समाज को बदलने का सर्वोत्तम तरीका पहले स्वयं को बदलना है। गायत्री परिवार के कार्यकत्र्ताओं द्वारा ऐसी भावना के साथ किये जा रहे समाज सुधार के प्रयासों की उन्होंने भरपूर प्रशंसा की। 
शराब बंदी का आह्वïान
आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने नशे का शिकार हो रही युवा पीढ़ी के प्रति गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने सरकार से जगह-जगह सडक़ों के किनारे खुली शराब की दुकानों को बंद कराने की माँग की। उन्होंने कहा कि शराब से सरकार को आमदनी होने की बात मात्र छलावा है। इससे सरकार को १५ हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है, जबकि शराब के कारण होने वाली दुर्घटनाओं, मौतों के मुआवजे और बीमारियों पर उसे २७ हजार करोड़ रुपयों का खर्चा उठाना पड़ता है। इस घाटे के बावजूद लोगों का जीवन क्यों बरबाद होने दिया जाय? 

बिहार में है अनंत संभावना
आदरणीय डॉ. साहब ने कहा कि बिहार बुद्धिमत्ता के लिए सारे विश्व में विख्यात्ï है। मैं जहाँ जाता हूँ वहाँ यहाँ के उच्चाधिकारी, आई.ए.एस. मिलते हैं। यदि वे केवल बिहार के लिए कार्य करने लगें तो यह प्रांत देश का नम्बर एक प्रांत होगा। उन्होंने इस प्रतिभा का सदुपयोग करने के लिए, मानव जीवन को गरिमापूर्ण बनाने के लिए स्वावलम्बी, स्वाध्यायशील बनने, पूज्य गुरुदेव, विवेकानंद, शंकराचार्य जैसे महापुरुषों का अनुकरण करने की प्रेरणा दी।

वैश्विक सोच अपनायें युवा
शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री के.पी. दुबे ने कहा-भारत की युवाशक्ति ने इन दिनों शिक्षा, चिकित्सा, कला, टेक्नोलॉजी, राजनीति जैसे हर क्षेत्र में सारे विश्व में अपना परचम लहराया है। यह केवल बौद्धिक कौशल का कमाल नहीं, हमारी वैश्विक सोच का भी परिणाम है। 
भारत ने केवल अपने हित की कामना कभी नहीं की। उसने सदैव सारे विश्व के कल्याण के प्रयास किये हैं और बड़ी उदारता के साथ अनुदान दिये हैं। हमें अपनी इसी संस्कृति और प्रवृत्ति का पुनर्जीवन कर सारी विश्व मानवता का उत्कर्ष करने का लक्ष्य रखकर अपने आन्दोलन को गति देनी है।

विशाल संगठन : गायत्री शक्तिपीठ पटना से जुड़े युवाओं की टोली ने अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण पूरे बिहार प्रांत में अपना सशक्त संगठन खड़ा कर लिया है। आज १,१०,००० युवा इस संगठन से जुड़े हैं। मनीष, प्रिंस रंजन, विकास, निशांत रंजन, ज्ञानप्रकाश, आशुतोष आदि इस आन्दोलन को गति देने में अग्रणी योगदान दे रहे हैं। प्रस्तुत युवा शिविर के आयोजन में भी उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई। 

बाल संस्कार शालाएँ : गायत्री परिवार का यह युवा संगठन नगर की झुग्गी-झोंपडिय़ों वाले क्षेत्र में चलायी जा रहीं २४ बाल संस्कार शालाओं के माध्यम से विशेष रूप से लोकप्रिय है। इनके अंतर्गत बच्चों को गणित, विज्ञान, अंग्रेजी जैसी शैक्षिक विषयों की कोचिंग भी दी जाती है। कॉलेज में पढऩे वाले मेधावी विद्यार्थी इन बच्चों को पढ़ाने के लिए अपना समयदान देते हैं। आरंभ में रेलवे प्लेटफार्म और सडक़ के किनारे कक्षाएँ लगाने से इनकी शुरुआत हुई। इन कक्षाओं ने गरीबों का उपकार तो किया ही, मीडिया को भी आकर्षित कर अन्यों को अनुसरण की प्रेरणा दी। बच्चों को सद्ïगुणी बनाने के साथ उन्हें कराटे एवं आत्मरक्षा की विधाएँ भी सिखाई जाती हैं। 
इन बाल संस्कार शाला के बच्चों ने शिविर की सांस्कृतिक संध्या को अपने उद्देश्यपूर्ण कार्यक्रमों से सजाकर श्रोताओं का मन जीत लिया था। 

व्यक्तित्व परिष्कार कार्यशालाएँ : युवा संगठन अब तक अपने प्रांत में ५४ पाँच दिवसीय व्यक्तित्व परिष्कार कार्यशालाओं का आयोजन कर चुका है।

मनुष्य जीवन का  क्या यही सौभाग्य है? - डॉ. चिन्मय पण्ड्या 
वेद, पुराण सहित सभी धर्मशास्त्र मानव जीवन की विशेषताओं का गुणगान करते हैं। जिस मनुज देह को मिलना देवताओं के लिए भी दुर्लभ कहा गया है उसे तो चिंता, हैरानी, परेशानी से मुक्त होना चाहिए। लेकिन आज ९९ प्रतिशत से ज्यादा लोगों का शरीर बीमार है, मन तनावग्रस्त है, परिवार टूट रहे हैं, समाज बिखर रहा है। क्या मनुष्य जीवन का यही अर्थ है? यही जीवन का सौभाग्य है?
लेकिन इसी देह में गुरुदेव, विवेकानंद, राम, कृष्ण आते हैं और बताते हैं कि जीवन ऐसे सौभाग्य के साथ भी जिया जा सकता है। हम अंतर्मन में उतरें और देखें कि गलती कहाँ हुई?
 हमारे पास फेसबुक अपडेट करने के लिए दो घंटे का समय है, लेकिन परिवार के साथ बैठने के लिए दो पल नहीं। 
 अपना सिरदर्द किसी भी कीमत पर ठीक होना चाहिए, चाहे इसके लिए दूसरे मरीज की जान ही क्यों न जाती हो। 
 अपने ऐशोआराम के सामने हमें दूसरे की भूख, प्यास, परेशानी दिखाई नहीं देती। 
ऐसी ही विडंबनाएँ हमें जीवन के सौभाग्य को अनुभव नहीं करने देतीं।
अपनी भूल को सुधारने के लिए क्या करें? तो मैं कहूँगा कि और कुछ करें या न करें, अपनी सोच को जरूर बदलें। अपने देवत्व को जगायें, अपने मन-मंदिर में भगवान की प्रतिष्ठïा जरूर करें। गिरते समाज, पतित होती मानवता की गुजारिश है कि हम अपने पीछे सभ्य, सुंदर दुनिया को छोडक़र जायें। यदि ऐसा कर सके तो इस युवा चेतना शिविर में हमारा आना सार्थक हो जायेगा। 
            
यूथ एक्स्पो 2014
पटना के ऐतिहासिक गाँधी मैदान में २३ नवम्बर को युवाओं के विराट सम्मेलन ‘यूथ एक्स्पो’ का आयोजन किया गया था। आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी के साथ मुख्यमंत्री माननीय जीतन राम माँझी, केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन झा एवं प्रांतीय खाद्य आपूर्ति मंत्री श्री श्याम रजक ने इस अवसर पर युवाओं को प्रेरणा दी, उनका उत्साहवर्धन किया। आदरणीय डॉ. प्रणव जी ने शिविर के निष्कर्ष के आधार पर आगामी एक वर्ष में किये जाने वाले कार्यों के सामूहिक संकल्प दिलाये। इस विशाल समारोह में उपस्थित ६०००० लोगों के समक्ष मंचासीन अतिथियों ने मशाल प्रज्वलित कर युवाओं को थमाई। ‘व्यसनमुक्त सुशिक्षित बिहार’ के निर्माण का संकल्प लिया गया। 

परहित से बड़ा कोई धर्म नहीं
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि समाज में नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है। लोगों में एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ लगी है। ऐसे में गायत्री परिवार परहित की भावना के साथ समाज को बदलने का जो कार्य कर रहा है वही सबसे बड़ा धर्म है।

गायत्री परिवार को मजबूत करें
केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन झा ने कहा कि समाज प्रतिभाओं का अनुसरण करता है। युवा जहाँ चलेंगे, वहीं समाज चलेगा। अत: नैतिक मूल्यों का विस्तार कर समाज को बदलने के लिए हमें गायत्री परिवार को मजबूत करना चाहिए।

शिविर में लिये गये संकल्प 
आदर्श गाँव बनायेंगे 99
श्रीराम स्मृति उपवन बनायेंगे 121
कुएँ , तालाब, नदी की सफाई 901
व्यसनमुक्ति प्रधान आयोजन 1432
एक  दिवसीय युवा चेतना शिविर 635
तीन दिवसीय युवा चेतना शिविर 155
वृक्ष लगायेंगे 162008
नये युवा मण्डल 954
डिवाइन वर्कशॉप (संस्थानों में) 1036
समूह साधना सत्र लगायेंगे 276
राम-लक्ष्मण की  जोड़ी 1423



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