शांतिकुज के रामकृष्ण हाल में संगठन साधना सत्र को संबोधित करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्याजी  ने कहा कि आंतरिक दुर्बलता को दूर कर आत्मबल बढ़ाने की महत्त्वपूर्ण कड़ी साधना ही है। साधना से ही मनुष्य का व्यक्तित्व उभरता है। स्वामी विवेकानंद, श्री अरविन्द, पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जैसे अनेक महापुरुषों ने साधना को आत्मिक विकास का आधार स्तंभ माना एवं इसी सीढ़ी के माध्यम से शिखर तक पहुँचे। उन्होंने इसी से उपलब्ध शक्ति के सहारे बड़े- बड़े खड़े संगठन किए और बड़े- बड़े कार्य करने में सफल हुए हैं। इस अवसर पर म.प्र. से आये ढ़ाई सौ से अधिक वरिष्ठ भाई- बहिन उपस्थित थे। 

कुलाधिपति ने कहा कि जीवन में उतरा हुआ आचरण ही लोगों को प्रेरणा, मार्गदर्शन दे सकता है। जीवन में पारदर्शिता बनाये रखनी चाहिए, तभी सच्चे अर्थों में आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि बड़े कार्य करने के लिए व्यक्तिगत स्वार्थ को सामूहिक हित में बदल दें, तो वे सभी कार्य अच्छी तरह से पूरे किये जा सकते हैं। कुलाधिपति ने रामायण, गीता सहित कई धार्मिक ग्रंथों का उदाहरण देते हुए उन पर विस्तार से प्रकाश डाला। 

इससे पूर्व प्रज्ञा अभियान के संपादक श्री वीरेश्वर उपाध्याय ने संगठन की रीति- नीति विषय पर बोलते हुए विभिन्न उदाहरणों से प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। जोनल समन्वयक श्री कालीचरण शर्मा ने कहा कि मनुष्य जीवन कठिनाई से मिलता है, इसके हरेक पल का सदुपयोग करना चाहिए। 

शिविर समन्वयक के अनुसार समर्थ, समृद्ध और स्वच्छ भारत के निर्माण हेतु समाज के प्रत्येक इकाई को भ्रष्टाचार, दुर्व्यसन से मुक्त होना जरूरी है। इसी उद्देश्य से देश भर के गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं को इस दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित, प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पांच दिवसीय इस संगठन साधना सत्र के माध्यम से सक्रिय कार्यकर्त्ताओं को यहाँ प्रशिक्षण देने का क्रम चलाया जा रहा है। इस सत्र में म.प्र. से ढाई सौ से अधिक प्रतिभागियों को चयनित कर उन्हें आमंत्रित किया गया है। ये वे कार्यकर्त्ता हैं, जो यहाँ मिले कार्य योजना को अपने क्षेत्र में विस्तार करेंगे। उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों को व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्मा, केसरी कपिल, डॉ. एके. दत्ता आदि विषय विशेषज्ञ संबोधित करेंगे। इस अवसर पर शांतिकुंज के अंतेःवासी कार्यकर्ता एवं ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान के भाई- बहिन भी मौजूद थे।




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