गायत्री परिवार के जनक युगऋषि पं० श्रीराम शर्मा आचार्य जी के प्रथम गुरु महामना पं० मदन मोहन मालवीय जी को उनकी १५३वीं जयन्ती के एक दिन पूर्व भारत रत्न देने की घोषणा का गायत्री परिवार ने हृदय से स्वागत किया है। ११ वर्ष की आयु में पूज्य आचार्यश्री को धर्मप्राण महामना ने गायत्री मंत्र की दीक्षा दी थी, तब उन्होंने आचार्यश्री को कहा था कि गायत्री ब्राह्मण की कामधेनु है। उससे सब कुछ पाया जा सकता है। 

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने पं. मालवीय जी को देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘भारत रत्न’ के लिए चयन किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। इस अवसर पर उन्होंने महामना के जीवन के अनछूए पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महान शिक्षाविद् पंडित मालवीय जी ने वह शिक्षा व संस्कृति के लिए वह कार्य किया जिसके लिए इतिहास उनका सदा याद रखेगा। वे अपने जीवन में कभी भी हार नहीं मानने वाले महामानव थे। उन्होंने विषम परिस्थितियों में भी अंग्रेजों का डटकर सामना किया। मालवीय जी ने भारतीय संस्कृति तथा भारतीयों के जीवन रक्षक के रूप में अन्तिम समय तक कार्य किये। 

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ.पण्ड्याजी ने कहा कि महामना ने युवाओं में धार्मिकता के समावेश के लिए भी कई योजनाओं को मूर्त रूप दिया। पूज्य आचार्यश्री ने भी उनसे मिली सीख को अपने जीवन का अंग बनाया और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया’ के महान पथ स्वयं चले एवं अपने अनुयायियों को भी उस पर चलने की प्रेरणा दी। आज करोड़ों सदस्यों का गायत्री परिवार उनकी दी हुई सीख पर अमल कर रहा है। 

डॉ पण्ड्याजी ने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न दिये जाने की घोषणा के साथ उनके साथ बिताये पलों को ताजा किया। देश को प्रगतिशील बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिकाओं की सराहना की तथा उनको भारतरत्न के लिए चुने जाने पर संपूर्ण गायत्री परिवार की ओर से बधाई दी। 




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