समस्त समस्याओं का समाधान सत्साहित्य में  डॉ पण्ड्या

नेपाल व कन्याकुमारी में होंगे अश्वमेध महायज्ञ, साहित्य व ८ डीवीडी का हुआ विमोचन 

वासंती उल्लास के बीच गायत्री परिवार के मुख्यालय शांतिकुंज हरिद्वार में हर्षोल्लास के साथ वसंत पर्व का मुख्य समारोह सम्पन्न हुआ। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या एवं गायत्री परिवार प्रमुख शैलदीदी ने ध्वजारोहण के साथ समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर विश्व भर से आये गायत्री साधकों को संबोधित करते हुए डॉ प्रणव पण्ड्या जी ने वैदिक संस्कृति और वेद की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्कृत विश्व की सबसे महान और धनी भाषा है। किन्तु समय के साथ संस्कृत को भूलने के कारण विकास में बाधा आ रही है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए कहा कि एक ओर जहाँ संस्कृत और संस्कृति विलुप्त होती जा रही थी, तब स्वामी जी ने आकर संस्कृति का पुनरुत्थान कियाा और उसको विश्व भर फैलाने के लिए प्रव्रज्या की। उन्होंने कहा कि स्वामीजी के बाद भारतीय संस्कृति को ऊंचा उठाने में जो कार्य पूज्य गुरुदेव ने किया, ऐसा शायद ही किसी ने किया हो। डॉ पण्ड्या ने कहा कि परम पूज्य गुरुदेव ने वासंती उल्लास को अपने जीवन में ज्ञान क्रांति के रूप में प्रारंभ किया, जो आज विश्वभर में विचार क्रांति के रूप में फैलता जा रहा है। यह वर्ष गायत्री परिवार ज्ञान क्रांति वर्ष के रूप मनायेगा। गायत्री परिवार का प्रत्येक परिजन घर-घर जाकर विचार को पहुंचाने में सहभागिता निभायेगा।

उन्होंने कहा कि चीन से लेकर रशिया तक विश्व भर में शिक्षा स्थानीय भाषाओं में होती है, किन्तु हम ही हमारी भारतीय भाषाओं और मातृभाषा हिन्दी में शिक्षण नहीं देते। जिसके परिणाम स्वरूप आज हमारे बच्चे अंग्रेजी संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने सकारात्मक विचारों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो जैसा सोचता है, वह वैसा ही बन जाता है। इसी हेतु विचारों को औषधि के रूप में बताया और उसमें प्रखरता लाने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर गायत्री परिवार प्रमुख शैल दीदी ने भाव संवेदना की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रम, विचार और भावनाओं पर मानवीय सभ्यता टिकी हुई है। वैचारिक क्रांति से ही विश्व में क्रांति संभव है। विचारों में कुसंस्कारों को पलटकर सुसंस्कारों में परिवर्तित कर देने की क्षमता है।

भाव संवेदना के बिना विचारों में परिपक्वता नहीं आती। आज का यह वसंत पंचमी मन में उमंग,उत्साह को उभारने का पर्व है। उनहोंने कहा कि यह पर्व आंतरिक ऊर्जा-भाव संवेदना को विकसित करने का पर्व है।

वसंत पर्व के मुख्य कार्यक्रम के दौरान डॉ पण्ड्या व शैल दीदी ने भक्ति गाथा, अमृतकण, अद्भुत आश्चर्य किन्तु सत्य सहित नेपाली, पंजाबी की किताबों, युग संगीत व युगऋषि के प्रवचनों के डीवीडी का विमोचन किया।

वासंती उल्लास के बीच शांतिकुंज में विद्यारंभ, उपनयन, मुण्डन, विवाह आदि संस्कार बड़ी संख्या में निःशुल्क संपन्न कराये गये। गुरुदीक्षा भी सैकड़ों की संख्या में हुई, जिसे स्वयं पूज्य गुरुदेव के प्रतिनिधि के रूप में श्रद्धेया शैल जीजी ने दी। मुख्य कार्यक्रम का मंच संचालन दिनेश पटेल ने किया। वहीं संगीत विभाग के युग गायकों द्वारा सुन्दर प्रस्तुतियाँ दी गयीं।



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