'युवा संकल्प महोत्सव' में आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने १०,००० युवाओं को दिलाये युग सृजन चेतना विस्तार के संकल्प

खेतड़ी के महाराजा अजीत सिंह ही थे, जिन्होंने ठाकुर रामकृष्ण परमहंस के शिष्य नरेन्द्रनाथ को 'स्वामी विवेकानंद' के रूप में नयी पहचान दिलायी थी। उस पुण्यभूमि खेतड़ी ने स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस १२ जनवरी २०१५ को पुन: इतिहास दोहराया। गायत्री परिवार के युवा संगठन 'दिया, राजस्थान' ने ११ एवं १२ जनवरी को वहाँ युवा संकल्प महोत्सव 'नूतन दृष्टि' आयोजित किया। लाखों युवाओं के आदर्श आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने महोत्सव में शामिल १०,००० युवाओं को संबोधित किया और समाज-संस्कृति की सेवा के संकल्प दिलाये। मेडिसिन बाबा के नाम से विख्यात श्री ओंकारनाथ जी, यूएन में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी विख्यात्ï पर्यावरणविद् बालिका युगरत्ना श्रीवास्तव पूरे दो दिवसीय कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

खेतड़ी पहुँचकर अभिभूत हो गये आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी
खेतड़ी वह ऐतिहासिक भूमि है, जिसके नरेश महाराजा अजीत सिंह ने अत्यंत तेजस्वी और ज्ञानवान नरेन्द्रनाथ की तुलना सूर्य से करते हुए उन्हें सूर्य का ही पर्याय नाम 'विवेकानंद' दिया था। 
आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी खेतड़ी पहुँचने पर अत्यंत रोमांचित थे। वे सबसे पहले रामकृष्ण मठ पहुँचे, वहाँ ठाकुर रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमाओं को दण्डवत प्रणाम किया। युवा संकल्प महोत्सव के आरंभ में वे हिंदुस्तान कॉपर लि. में स्थापित स्वामी विवेकानंद की भव्य प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने गये।
स्वयंसेवी संगठनों की कार्यशाला में आदरणीय डॉ. साहब ने कहा, ''मैं खुद रोमांचित हूँ, स्वामी जी की विलक्षण प्रतिभा की साक्षी इस भूमि पर आकर। पहली ही मुलाकात में खेतड़ी नरेश लगभग २०-२१ वर्षीय नरेन्द्रनाथ के मित्र बने और फिर शिष्य बन गये। उन्होंने शिष्य भाव से ही स्वामी जी की अमेरिका यात्रा का पूरा खर्च वहन किया था।"

स्वयंसेवी संगठनों की कार्यशाला
'नूतन दृष्टि' के प्रथम चरण में ११ जनवरी को हिंदुस्तान कॉपर लि. के कॉपर क्लब में स्वयंसेवी संगठनों की कार्यशाला आयोजित हुई। आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने इसकी अध्यक्षता की। मेडिसिन बाबा और युगरत्ना के अलावा एचसीएल. के महाप्रबंधक श्री ए.के. घोष, वरिष्ठ पत्रकार श्री यशवंत व्यास कार्यशाला के विशिष्ट अतिथि थे।  
कार्यशाला तीन सत्रों में तीन अलग-अलग विषयों पर आयोजित हुई। १.आदर्श ग्राम, २. शिक्षा और ३.युवा-नारी जागरण, पर्यावरण। पूरे राजस्थान में इन विषयों पर काम कर रहे ८० स्वयंसेवी संगठनों ने कार्यशाला में भाग लिया। इनमें से २६ संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपनी योजनाओं और समाज के नवनिर्माण में किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी। आदरणीय डॉ. साहब तीनों सत्रों में उपस्थित रहे। जनमानस में उठ रही परिवर्तन की हूक को उन्होंने समझा, सराहा और आवश्यकता के अनुसार मार्गदर्शन दिया। कार्यशाला के समापन सत्र में उन्होंने इसके निष्कर्षों का समायोजन किया। 
स्वामी विवेकानंद का कहना था कि एक हमें ज्ञान का संग्रह और विस्तार करने की आवश्यकता है। सच्चे ज्ञान के अभाव में ही सारे विग्रह खड़े होते हैं। मनुष्य यदि जीवन की वास्तविका को अनुभव करने लगे तो वह लोभ, मोह, अहंकार, पद, प्रतिष्ठा, संकीर्णता की तमाम बेडिय़ों से मुक्त हो जायेगा। 
स्वामी जी ने कहा था कि किसी एक विचार को अपना लो और उसके पीछे लग जाओ तो एक दिन अवश्य सफल हो जाओगे। हमारे गुरुदेव ने भी विचारों से दुनिया बदलने की बात कही है। उनका एक-एक सूत्र जीवन को बदल देने वाला है। आज की सबसे बड़ी आवश्यकता आध्यात्मिक मानवतावाद को समाज में प्रतिष्ठित करने की है। 

दीपयज्ञ और युवा संकल्प महोत्सव
११ जनवरी की सायं स्वामी जी के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में उसी ऐतिहासिक सरोवर पर दीपयज्ञ रखा गया, जहाँ शिकागो से लौटने के बाद स्वामी विवेकानंद जी का स्वागत किया गया था। दीपयज्ञ के लिए खेतड़ी नगर के घर-घर में दीपक बाँटे गये थे। लोग बड़ी श्रद्धा के साथ उन्हें लेकर समारोह स्थल पर पहुँचे। हजारों लोगों ने इसमें भाग लिया।
स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस पर खेतड़ी के पोलो मैदान पर एक विशाल संकल्प समारोह आयोजित हुआ। पूरे राजस्थान के युवाओं ने इसमें भाग लिया। आसपास के अनेक विद्यालय और महाविद्यालय अपने छात्र-छात्राओं को लेकर समारोह में भाग लेने आये थे। लगभग ढाई घंटे का यह कार्यक्रम उत्साह-उमंग से भरा था। विशिष्ट अतिथियों के उद्बोधन और सांस्कृति कार्यक्रम हर पल युवाओं को स्वामी विवेकानंद जी के पदचिह्नों पर चलते हुए जीवन धन्य बनाने के लिए प्रेरित करते रहे। माँ भारती की वेदना उन्हें युग की पुकार सुनने के लिए आन्दोलित करती रही। 


आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी
युवा सन्यासी स्वामी विवेकानंद में बुद्ध की करुणा और शंकराचार्य के ज्ञान का समन्वय था। उन्होंने कहा था कि वेदान्त २१वीं सदी का धर्म होगा। हर जाति के व्यक्ति को शिक्षा की आवश्यकता है।
इतिहास लौटकर आया है। ठाकुर ने जो काम स्वामी जी को सौंपा था, वही कार्य आज गुरुदेव ने हमें सौंपा है। उन्होंने हमें '२१वीं सदी उज्ज्वल भविष्य' का नारा दिया। जाति-धर्म-वर्ग की सारी सीमाओं से उठकर हर व्यक्ति तक सद्विचार पहुँचाने का आह्वान किया। स्वामी जी के 'वेदांत' का ही रूप है परम पूज्य गुरुदेव का 'वैज्ञानिक अध्यात्मवाद' जिसे उन्होंने २१वीं सदी के धर्म के रूप में प्रतिष्ठित किया है। 
हम सबमें एक विवेकानंद विद्यमान है। जरूरत है नूतन दृष्टि की। एक छोटे-से देश वियेतनाम ने महाराणा प्रताप को अपना राष्ट्रीय आदर्श मानकर शक्तिशाली अमेरिका को पीछे हटने के लिए विवश कर दिया था। यह दृष्टि हम अपना लें तो निश्चित ही स्वामी जी के अधूरे कार्यों को पूरा करने में बड़ा योगदान दे सकते हैं।

युगरत्ना श्रीवास्तव, पर्यावरणविद्
हमारी उम्र के बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक जागरुक और सक्रिय होना चाहिए, क्योंकि इस संकट का फल सबसे ज्यादा हमें ही भोगना होगा।
विद्यालयों में ग्रीन एजुकेशन को मॉरल साइंस की तरह पढ़ाये जाने की आवश्यकता है, नम्बर लेने के लिए नहीं, जीवन के विषय के रुप में। 
गाँधीजी के तीन नहीं, पाँच बंदरों को हम अपना आदर्श मानें। चौथा बंधे हाथ वाला जो कहे 'बुरा न करो' और पाँचवा बँधे पैर वाला जो कहे 'बुरी जगह न जाओ'।
सप्तपदी की जगह विवाह में नौपदी हो-एक कन्याभ्रूण हत्या न करने और एक प्रतिवर्ष एक पेड़ लगाने के संकल्प के साथ।

जलपुरुष श्री राजेन्द्र सिंह
हमने बचपन में देखा है कि भारत के कोने-कोने में बहता जल मिल जाता था और उसे बड़ी सरलता से हम पी लिया करते थे। आज तो बड़ी-बड़ी नदियों का जल आचमन करने योग्य नहीं है। 
प्रश्न यह नहीं है कि जल कहाँ कम, कहाँ ज्यादा है। जहाँ भी लोगों ने प्रकृति के जल को सहेजा वहाँ जल ने कृषि दी, बरकत दी, समृद्धि दी। जहाँ जल के संचय की उपेक्षा हुई है वहाँ की स्थिति बदहाल होती गयी है।

स्वामी आत्मनिष्ठानंद
स्वामी विवेकानंद के विचार बड़े सशक्त हैं। इन विचारों ने कई महापुरुष गढ़े हैं। वे युवाओं से कहते थे-सिंह के समान खड़े होओ और युग की समस्याओं का समाधान करो। 

प्रतिभाओं का सम्मान
रचनात्मक आन्दोलनों में सर्वश्रेष्ठ सक्रियता के लिए स्मृति चिह्न प्रदान करते हुए सम्मानित किये गये :-
  • श्री हेमंत चतुर्वेदी, जोधपुर-स्वास्थ्य
  • श्री नवीन माली, चित्तौडग़ढ़-स्वावलम्बन
  • श्रीमती मनीषा छंगाणी, जैसलमेर-नारी जागरण
  • श्री नरेन्द्र चौधरी, उदयपुर- शिक्षा
  • श्री मुकेश मीणा, बाराँ-पर्यावरण संरक्षण   
दिया से जुड़ी नन्ही युगरत्ना श्रीवास्तव
१६ वर्षीया नन्हीं युगरत्ना ने 'दिया' संगठन से जुड़कर निर्मल गंगा जनअभियान के अंतर्गत कानपुर से इलाहाबाद अंचल में गंगा की सफाई के कार्य में योगदान देने की घोषणा की।  

सांस्कृतिक कार्यक्रम
पोलो ग्राउण्ड पर आयोजित संकल्प समारोह में दिया, जयपुर की टोली ने अभिनय गीत प्रस्तुति 'अब नवयुग की गंगोत्री से बही ज्ञान की धारा है...' प्रस्तुत किया। दिया और देव संस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा योग प्रदर्शन मात्र शारीरिक कौशल नहीं, मन को अपने लक्ष्य की ओर केन्द्रित करने का संदेश था। एक नाटक के सहारे स्वामी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद की गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत अनुभूति करायी।

आयोजकों का आभार : इस कार्यक्रम का आयोजन दिया, राजस्थान ने किया था। उसके संयोजक प्रो. विवेक विजय द्वारा आभार ज्ञापन से उसका समापन हुआ, वहीं आदरणीय डॉ. प्रणव जी ने स्वयं ऐसे उद्देश्यपूर्ण कार्यक्रम के आयोजन के लिए इस संगठन की प्रशंसा की।
 


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