गायत्री तीर्थ शान्तिकुञ्ज में साधना संगठन पर चल रही शिविर शृंखला में पश्चिम जोन में आने वाले गुजरात परिजनों का पाँच दिवसीय शिविर आयोजित हुआ जिसमें गुजरात प्रान्त के करीब साढ़े चार सौ वरिष्ठ परिजन प्रतिभागी हुए। गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि आप कृष्ण जैसे महान अवतारी पुरुषों, सन्तों, देशभक्तों और शीर्ष नेतृत्व करने वालों की धरती के सपूत हैं। आपकी माटी सदा से विश्व-आंगन में न्याय धर्म और संस्कृति की सुगन्ध फैलाती आई है। आप उस महान गिरमा को बनाये रखने का प्रयत्न करते रहिएगा। 
    उन्होंने सामूहिकता की महत्ता पर बोलते हुए कहा कि यदि हमें पारिवारिक स्तर से लेकर समाज और राष्ट्रीय स्तर तक प्रगति करना है तो इसके लिए सामूहिकता के सूत्र को अपनाना होगा। महाभारत के पाण्डवों की तरह एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने पौराणिक काल का उद्धरण देते हुए कहा, जब बिखरी अवस्था में देवशक्ति असुर अत्याचारों से लोहा नहीं ले सकी तो संगठित होकर दुर्गाशक्ति का आवाहन किया, उस एकता को फिर से जीवन्त करना होगा। 
    डॉ. पण्ड्या ने बौद्ध सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि भगवान बुद्ध तात्कालिक समस्याओं से अवगत थे। वे वैचारिक और धार्मिक बिखराव, सामाजिक और राष्ट्रीय बिखराव की हानियों को समझते थे, इसलिए बुद्धि को ठीक करने, धर्म का मर्म समझने और समूह भाव विकसित करने की प्रेरणा दी ताकि समाज फिर से एकसूत्र में बँध सके। शायद उनके मन्त्र-मर्म को ठीक से नहीं समझा गया। 
    उन्होंने पूज्य आचार्य पं. श्रीराम शर्मा जी के एकता सूत्रों पर बोलते हुए कहा, सींक-सींक से चटाई बनती है, बूँद-बूँद से समुद्र बनता है, ईंट-ईंट से भवन निर्मित होते हैं, लड़ी-लड़ी से माला बनती है, फूल-फूल से गुलदस्ता सजता है, व्यक्ति-व्यक्ति से परिवार बनता है, परिवार-परिवार मिलकर समाज और फिर समाज-समाज मिलकर विशाल राष्ट्र का विस्तृत रूप निर्मित होता है। हमें समूह हित के लिए वैयक्तिक अहं का विसर्जन करना चाहिए और आपस में मिलकर संगठित शक्ति के रूप में समृद्ध बनना चाहिए। 
    डॉ. पण्ड्या ने शिखर स्तर पर हो रहे संगठनों के प्रयासों की ओर इंगित करते हुए कहा कि आज समय आ गया है भारत के खोये हुए गौरव को पुनः वापस लाने का। आज भारत को महाशक्ति के रूप में देखा जाने लगा है। विश्व दृष्टि में उसकी अलग छबि बन रही है। ऐसे में हम सभी का दायित्व बनता है कि हम अपने आपको जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करें एवं शक्ति और समृद्धि की ऊँचाइयों पर चढ़ रहे भारत को लक्ष्य प्राप्त कराने में हर सम्भव मदद करें। 
    डॉ. पण्ड्या ने इस अवसर पर आचार्य श्रीराम शर्मा जी के विचारों से जन मानस को अवगत कराने एवं उनमें जागरूक लाने के उद्देश्य से बनी गुजरात जोन की वेबसाइट www.awgpgujaratzonal.org को लॉञ्च किया। 

    इससे पूर्व शिविर के उद्घाटन सत्र में शांतिकुंज मनीषी श्री वीरेश्वर उपाध्याय ने सृजन शिल्पियों की रीति नीति पर बोलिते हुए कहा कि व्यक्ति सृजन की क्षमता तब प्राप्त करता है जब वह साधना से अपने आपको तपा लेता और मजबूत बना लेता है। उन्होंने कहा साधना शक्ति से ही सृजन होता है, इसलिए उसे अनवार्य रूप से जीवन में स्थान देना चाहिए। श्री उपाध्याय ने समूह साधना पर जो देते हुए कहा, अगर बड़ी उपलब्धियाँ प्राप्त करनी हो तो संगठित होकर प्रयत्न करना चाहिए। 

    इनके अलावा केन्द्रिय जोनल प्रभारी श्री कालीचरण शर्मा, केसरी कपिल, महिला मण्डल प्रभारी यशोदा शर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने विभिन्न विषयों पर संबोधित किया।


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