भारत का गौरव संगठन में है  डॉ. पण्ड्या

    उत्तर जोन में आने वाले उत्तर प्रदेश के गायत्री परिजनों का पाँच दिवसीय संगठन साधना सत्र शांतिकुंज में शुरू हुआ। पाँच दिवसीय सत्र शृंखला में आने वाला यह ११वाँ सत्र है, जिसमें समग्र उत्तर जोन की सभी इकाइयों के ३६२ प्रमुख प्रतिनिधि प्रतिभागी हुए। फिलहाल यह शृंखला दिसम्बर २०१४ से आरम्भ हुई और यह मार्च २०१५ तक चलेगी। इन आयोजनों के पीछे यही उद्देश्य है कि हमारा संगठन, देश का संगठन, राष्ट्र का संगठन मजबूत बनें। देश के जन मानस में जागरूकता आए और वे राष्ट्र निर्माण में लगें।
    सत्र में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि जब तक जन मानस में जागरूकता नहीं आएगी, तब तक देश, समाज व राष्ट्र की प्रगति नहीं होगी। उन्होंने ऋग्वेदीय मन्त्र ‘संगच्छध्वं संवदध्वं संवोमनांसि जानताम्, देवाभागं यथा पूर्वे सज्जानानामुपासते’ का उद्धरण देते हुए कहा कि जब तक इस मन्त्र के अनुसार मानव समाज आचरण नहीं करेगा, तब तक समाज में सुख शांति, सुुुुुव्यवस्था व समृद्धि कायम नहीं रहेगी। राष्ट्र को समृद्ध और सुरक्षित रखने के लिए संगठित होना अनिवार्य है। 
    उन्होंने सामाजिक बिखराव पर खेद जताते हुए कहा कि आज सज्जनों में संगठन नहीं है। प्रतिभाएँ  बिखर रही हैं। ये सब अगर संगठित हो जाएँ तो हमारा समाज व राष्ट्र इतना मजबूत हो जाएँ कि कोई भी चाहे कितना प्रयास करे तोड़ नहीं सकेगा। डॉ. पण्ड्या ने कहा संगठन भारत की ताकत है और भारत का गौरव संगठन में है। 
    उन्होंने कहा गायत्री परिवार के जनक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य वर्षों पूर्व ‘एक बनेंगे-नेक बनेंगे’ के रूप में इसी वैदिक एकता के सूत्र को दिया, जिस पर गायत्री परिवार एकजुट होकर कार्य कर रहा है और एक परिवार के रूप में विश्वभर में जाना जाता है। 
    इनके अलावा शांतिकुंज के कई वरिष्ठ कार्यकर्त्ताओं ने विभिन्न विषयों पर प्रतिभागियों को संबोधित किया।




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