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सच्चा योगी वही जो अपने चरित्र को संवारे :- डॉ चिन्मय पण्ड्याजी
सेमीनार में कुल १२२ शोधार्थियों ने प्रस्तुत किये शोधपत्र

योग की गंगा बहाने वाले देवभूमि उत्तराखंड स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय ‘योग फार वैलनेस इन लाइफ’ विषय चल रहे राष्ट्रीय सेमीनार का आज समापन हो गया। इंडियन एसोसिएशन आफ योग नई दिल्ली व देसंविवि के संयुक्त तत्त्वावधान में हुए इस सेमीनार में कुल १२२ शोधार्थियों ने अपने पेपर प्रस्तुत किये। निर्णायकों ने सिवान (बिहार) के डॉ राजन राज के शोधपत्र को सर्वोत्तम पाया। वहीं फैजाबाद (उप्र) के रामकलप तिवारी, कोयम्बील (केरल) के रामचन्द्रन, अहमदाबाद (गुजरात) की सुश्री कोमल बोरा, रामनगर (उत्तराखंड) के नितिन डोमने के शोधपत्र को क्रमशः दूसरा, तीसरा, चौथा व पांचवां स्थान मिला।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि सच्चा योगी वही है जो अपने चरित्र को संवारता है, अपने आचरण से दूसरों को शिक्षा देता है, अपना आंतरिक विकास के साथ वाह्य विकास भी करता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का जब दृष्टिकोण बदलता है तभी वह यौगिक अभ्यास की ओर बढ़ता है। देवसंविवि का यही एक मुख्य कारण है जिससे आज देसंविवि योग सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपना पहचान स्थापित किया है।

लद्दाख जम्मू से आये डॉ केसी शर्मा ने अपने अनुभव बाँटते हुए कहा कि मुझे अनेक सेमीनारों में भाग लेने का अवसर मिला, पर इन सबसे अलग मुझे यहाँ दिव्य अनुभुति हुई। उन्होंने कहा कि हिमालय की छाया में बसा देसंविवि का परिवारिक वातावरण के कारण योग के लिए यह सर्वोत्तम स्थानों में से एक है। वहीं अमेरिका की सुश्री श्री ने कहा कि नैसर्गिक वातावरण के बीच विवि परिसर स्थित प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर व शांतिकुंज में १९२६ से सतत प्रज्वलित अखंड ज्योति के दर्शन से मन रोमांचित हो उठा। प्रतिभागियों ने शिविर के दौरान योग के सैद्घांतिक व व्यवहारिक पक्ष के साथ उसके वैज्ञानिक पक्ष का भी अध्ययन किया।

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए देसंविवि के कुलसचिव श्री संदीप कुमार ने कहा कि सेमिनार में योग के विभिन्न पक्षों पर प्रस्तुत किये गये शोध पत्र विश्व मानवता के हित के काम आयेगी। उन्होंने इसके लिए आयोजक मण्डल को साधुवाद दिया। सेमीनार के समन्वयक डॉ कामाख्या कुमार ने सेमीनार की विस्तृत आख्या प्रस्तुत की। चयनित प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न एवं प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया।




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