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देसंविवि के १३वाँ वार्षिकोत्सव- 


देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने जहाँ अपने पाठ्यक्रम के अलावा गीता व ध्यान कक्षाओं में अपने शैक्षणिक विकास के साथ आध्यात्मिक प्रगति के लिए अपना सौ प्रतिशत देते हैं, वहीं वार्षिकोत्सव के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिता व खेलों में विद्यार्थियों ने अपना दमखम दिखा रहे हैं। विवि में सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के मार्गदर्शन में लोकरंजन से लोकमंगल के लिए परिमार्जित व प्रेरणादायी प्रज्ञागीत की अंताक्षरी सहित विभिन्न प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें ढ़पली वादन में पवन कुमार ने प्रथम व गुड्डन यादव ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। वहीं रंगोली में कु० नम्रता ने बाजी मारी, प्रज्ञा साहू को दूसरा स्थान मिला। मेंहदी प्रतियोगिता में रिया शर्मा को पहला व श्रद्धा गुप्ता को दूसरे स्थान पर हरे। स्क्रिप्ट लेखन में महेन्द्र शर्मा के लेख को सर्वोत्तम पाया, तो चांदनी कुमारी के लेखन को दूसरा। शास्त्रीय संगीत में कांटे की टक्कर के बीच अर्पिता त्रिपाठी ने प्रथम व गुड्डन यादव को दूसरा स्थान मिला। एकल गायन में अंशु कुमारी प्रथम रही, तो अर्पिता त्रिपाठी ने द्वितीय रही। समूह गायन में गुड्डन यादव की टीम प्रथम, अर्पित की टीम दूसरे स्थान पर रही। एकल नृत्य में देवेन्द्र की टीम व अनामिका की टीम क्रमशः प्रथम व द्वितीय रही। चित्रकला प्रतियोगिता में रंजना के आर्ट को सर्वसम्मति से प्रथम माना। उन्होंने बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ के मार्मिक दृश्य को ड्राइंग पेपर पर खुबसूरती से उकेरा था। स्वरचित कविता पाठ में मयंक जोशी, शुभम पाठक रहे।

वहीं शारीरिक खेल के कबड्डी में योग के विद्यार्थियों ने बीएससी प्रथम वर्ष को ३० अंक से मात देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। खो- खो में बीएससी तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों ने बीएससी द्वितीय वर्ष को ३ अंक से हराया। बास्केटबाल में छात्र व छात्रा के दोनो वर्ग में कांटे की टक्कर देखने को मिली।

क्रीड़ा अधिकारी मनोरंजन त्रिपाठी के अनुसार शतरंज, टेबल टेनिस, कैरम व अन्य एथेटिक्स का फायनल खेला जाना शेष है। इन दिनों पढ़ाई से पूर्णतःमुक्त होकर अपना पूरा ध्यान खेल व प्रतियोगिता में लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विवि के विद्यार्थियों में अकूत प्रतिभा है, जिसे संवारने व निखारने का काम किया जा रहा है। सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ शिवनारायण के अनुसार के उत्सव- १५ में शास्त्रीय संगीत को पहली बार शामिल किया गया, इसमें अर्पित त्रिपाठी के गायन को प्रथम व गुड्डन यादव को दूसरे स्थान आंका गया।



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