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नाटक के द्वारा कलाकारों ने पढ़ाया विकास का पाठ

                नया थियेटर ग्रुप भोपाल मप्र के लोक कलाकारों ने एक पक्षीय विकास पर कुठाराघात करते हुए सभी वर्ग की प्रगति पर जोर देते हुए ‘सड़क’ व ‘पोंगा पंडित’ नामक लघु नाटिका प्रस्तुत की। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के मृत्युजंय सभागार में प्रस्तुत इस नाटक के कलाकार प्रायः ग्रामीण परिवेश में पले पढ़े व स्कूली शिक्षा के नाम पर बहुत ही कम डिग्री धारक हैं। ये कलाकार भारत के प्रायः सभी बड़ों शहरों के साथ यूरोप के कई देशों में अपनी प्रस्तुती का लोहा मनवा चुके हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति श्री शरद पारधी व प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने दीप प्रज्वलन कर किया।

                नया थियेटर द्वारा पहली प्रस्तुती ‘सड़क’ दी। इसमें गांव के विकास की वास्तविक कहानी बया की गई। नाटक के माध्यम से बताया गया कि तथाकथित पूंजीपति वर्ग केवल अपने फायदे के लिए किसानों की भूमि एवं संसाधन का उपयोग करते हैं। जबकि विकास में स्थानीय लोगों को भी शामिल किया जाना चाहिए। वहीं दूसरे नाटक ‘पोंगा पंडित’ के माध्यम से देवीलाल नाग, अमर मानिकपुरी, उदय राम श्रीवास, सुश्री संगीता आदि कलाकारों ने जात-पांत व छुआछूत को इंगित करते हुए लोगों को वयं राष्ट्रे जागृयाम् पुरोहिताः के सूत्र को अपनाने पर बल दिया।

                नये थियेटर के निर्देशक श्री रामचन्द्र ने कहा कि नया थियेटर गु्रप गांवों की सभ्यता एवं भारतीय संस्कृति को देश-विदेश में फैलाने का कार्य कर रहा है। यह गु्रप देसंविवि के संगीत एवं सांस्कृ तिक विभाग के साथ कई वर्षों से जुड़ा है, पर यहां हमारी यह पहली प्रस्तुती है। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार एवं देसंविवि में भारतीय संस्कृति के परंपरा अनुसार चलने वाला संस्थान है, यहां आकर हमने संस्कृति को और अच्छे से जानने का अवसर मिला।

                इस अवसर पर सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ शिवनारायण ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के लिए नुक्कड नाटक एक बेहतरीन तरीका है और लोक कलाकारों के माध्यम से युवाओं को लोकरंजन से लोकमंगल की दिशा में चलने के लिए प्रेरित करने का प्रयास देसंविवि का है। युगऋषि पं० श्रीराम शर्मा आचार्य जी के विचारों को नाटक के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने के लिए सांस्कृतिक विभाग प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर विवि परिवार, शांतिकुंज के अंतेःवासी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


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