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लोकरंजन से लोकमंगल के भावों के साथ बौद्धिक क्षमता बढ़ाती हैं ये प्रतियोगिताएँ

वेद उपनिषद् और संस्कृति पर शांतिकुंज में चल रही प्रतियोगिताएँ

जहाँ एक ओर अश्लीलता और पाश्चात्य संस्कृति से भरे मनोरंजन कार्यक्रम पूरे समाज को दूषित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अखिल विश्व गायत्री परिवार के मुख्य केन्द्र शांतिकुंज में चल रहे खेल महोत्सव में शारीरिक के साथ-साथ मानसिक एवं बौद्धिक स्तर को ऊँचा उठाने का अनुपम प्रयोग हो रहा है, जहाँ भारतीय संस्कृति, वेद, उपनिषद्, आरण्यक, गीता एवं तीर्थ परंपरा पर आध्यात्मिक प्रश्रोत्तरी के माध्यम से कार्यकर्त्ता मनोरंजन के साथ-साथ बौद्धिक क्षमता बढ़ा रहे हैं।

संस्था प्रमुख आदरणीया शैल जीजी के मार्गदर्शन में चल रहे इस महोत्सव में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिवार, शांतिकुंज परिवार, ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान के कार्यकर्त्ता एवं बच्चे भाग ले रहे हैं। बौद्धिक खेलों में भारतीय शास्त्रीय एवं सुगम संगीत, कवि सम्मेलन, प्रज्ञागीत अन्त्याक्षरी आदि प्रमुख हैं।

शारीरिक खेलों में खिलाड़ी लाठी संचालन एवं योगसानों के माध्यम से जहाँ शारीरिक प्रतिभा निखार रहे हैं, वहीं क्रिकेट, खो-खो, कबड्डी, रस्साकस्सी, कुर्सी दौड़, गोला फेंक, बालीबॉल आदि में भी हुनर दिखा रहे हैं। बौद्धिक खेलों के अंतर्गत निबंध, भाषण, अंत्याक्षरी, खजाने की खोज, अध्यात्मिक प्रश्नोत्तरी में अपनी बौद्धिक क्षमता का परिचय दे रहे हैं। संगीत से जुड़े युग गायकों एवं वादकों द्वारा शास्त्रीय एवं सुगम संगीत तथा वादन में कुशलता का प्रदर्शन कर रहे हैं। लोकरंजन से लोकमंगल के भावों को अपनी शैली में प्रस्तुत करके युग कवियों ने अपने कविताओं से सरस्वती उपासना का परिचय दे रहे हैं।

खेल आयोजकों के अनुसार इन खेलों में ६ वर्ष के बच्चों से लेकर ८५ वर्ष के वरिष्ठ सदस्य तक भाग ले रहे हैं। वरिष्ठ सदस्य अपने बचपन की याद ताजा करते हुए उमंग एवं उत्साह के साथ महोत्सव के विभिन्न्न खेलों, प्रतियोगिताओं में अपना नाम दर्ज कराया है।



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