Published on 2015-05-04

देसंविवि में एक अनोखा कार्यक्रम का शुभारंभ

अभ्युदय एक क्रांति : डॉ प्रणव पण्ड्याजी

देवसंस्कृति विश्वद्यिालय के मृत्युंजय सभागार में हुए ‘अभ्युदय’ नामक एक सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इसमें विद्यार्थियों ने तैयारी से लेकर मंच संचालन व अभिनय तक के सभी कार्य खूद संभाला। सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विचार शक्ति की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए वैचारिक शक्ति पर मार्मिक दृश्यों को उकेरा। तो वहीं बेटी बचाने के मुहिम में युवाओं ने अपने आपको जोड़ते हुए जागरुकता अभियान चलाने की मार्मिक अपील की। प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या के निर्देशन में संपन्न हुए स्वाध्याय मंडल का अब तक का यह सबसे बड़ा कार्यक्रम था। इसमें विवि के प्रायः सभी विद्यार्थी जुड़े हैं।

इस अवसर पर कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि अभ्युदय एक क्रांति है। इसके माध्यम से जो सामूहिक रूप से स्वाध्याय का क्रम चलता है, उससे विद्यार्थियों में ज्ञान का विकास होगा, वहीं परस्पर प्यार-सद्भाव की भी बढ़ोत्तरी होगी।

देसंविवि में जिस तरह से स्वाध्याय मंडल के माध्यम से विद्यार्थियों को सकारात्मक दिशा में बढ़ने के लिए प्रेरित किये जाते हैं, यही क्रम अन्य विश्वविद्यालयों में भी चले तो भटके युवाओं को सही दिशा मिलेगी और वे अपने साथ साथ अन्य युवाओं को भी सार्थक दिशा देने में समर्थ होंगे।

बीसीए के छात्र प्रेमकांत, चिरंजीवी, रुपेन्द्र, शांभवी, रोमांचल नायक आदि विद्यार्थियों ने स्वाध्याय की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए एक्शन सांग के माध्यम से वर्तमान समाज में बढ़ रही वैचारिक प्रदूषण पर कुठाराघात किया, तो चंचल, दीक्षा, पायल, दीपिका, श्रद्धा आदि बच्चों ने रुढ़िवादिता से ऊपर उठकर नियमित रूप से स्वाध्याय करने पर बल दिया। इस कार्यक्रम में दीपक कुमार व निभा की भूमिका महत्त्वपूर्ण रही।

कार्यक्रम संयोजक के अनुसार इस अवसर पर दिखाई गयी डाक्यूमेंट्री में विद्यार्थियों में सकारात्मक दिशा में अग्रसर होने वाली विविध प्रेरणाप्रद घटनाक्रमों का उल्लेख चित्र प्रदर्शनी प्रदर्शित की गयी। गंगा सफाई, पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ अभियान व स्किल डेवलपमेंट जैसे अनेक अभियान में युवाओं को जोड़ने की बात कही गयी। डॉक्यूमेंट्री की खास बात यह रही कि इन अभियानों में जूड़ने से पहले अपने विचार को पवित्र बनायें, ताकि सहृदयता के साथ समाज को ऊंचा उठाने में अपना सहयोग दे सकें। कार्यक्रम से प्रभावित होकर देसंविवि के सौ से अधिक युवक-युवतियों ने समाजोत्थान में अपनी प्रतिभा का एक अंश लगाने का संकल्प व्यक्त किया। अल्प समय में तैयार की गयी चित्र प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थियों के विचार का एक पेड़ बनाया गया था, जिसके चारों ओर वैचारिक ऊर्जा को दर्शाया गया था। इसके अलावा बेटी बचाओ, दुर्व्यसन के कुप्रभाव, सत्साहित्य का असर, महान लेखकों के जीवन चरित्र जैसे अनेक विषयों पर सुंदर चित्र बने थे जो दर्शकों को सकारात्मक प्रेरणा दे रहा थे। इस अवसर पर कुलपति शरद पारधी, कुलसचिव संदीप कुमार, विवि के अनेक विभागाध्यक्ष सहित शांतिकुंज, ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान से बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। मंच संचालन ऋतंभरा व साक्षी ने किया।



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