Published on 2015-05-24
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भासंज्ञाप में राज्य स्तर पर सर्वोत्तम अंक प्राप्त इन विद्यार्थियों का विशेष प्रशिक्षण शिविर |
उप्र, छग, गुजरात, मप्र, पंजाब सहित २२ राज्यों के तीन सौ से अधिक विद्यार्थी शामिल
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गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि आत्मिक व सामाजिक उत्थान की आधारशिला भारतीय संस्कृति है। इनकी मूलभूत जानकारियों को विद्यार्थियों में पिरोने से वह मानव से महामानव की ओर अग्रसर हो सकता है। कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ- साथ विद्या से नहलाकरा उन्हें प्रखर बनाया जाता है जिससे वे सफलता की सीढ़ी- दर सीढ़ी चढ़ते जाएँ।

डॉ. पण्ड्याजी भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा- २०१४ में प्रांतीय स्तर पर सर्वोत्तम अंक प्राप्त देश भर के विद्यार्थियों से भेंट- परामर्श के दौरान चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के माध्यम से बच्चों में सुसंस्कार देने का क्रम सन् १९९४ में मप्र से प्रारंभ हुआ है, जो आज देश के २२ राज्यों में पहुंच गया है। डॉ पण्ड्या ने इन मेधावी विद्यार्थियों को देवसंस्कृति विवि का भ्रमण करने की सलाह दी, ताकि वे देख व समझ सकें कि यह विवि अन्य शैक्षणिक संस्थानों से भिन्न है, जहाँ पारिवारिकता के साथ विद्यार्थी अपने पढ़ाई के साथ कई क्षेत्रों में सफलता के झंडे बुलंद किये हैं।

संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने ममत्व व अपनत्व का भाव उड़ेलते हुए कहा कि जब कभी किसी तरह की कोई परेशानी या समस्या जीवन में आएं, तो उसमें हमें अवश्य भागीदारी बनायें। हम लोग उसके समाधान के लिए रास्ता अवश्य निकालेंगे।

शिविर संयोजक श्री पीडी गुप्ता ने बताया कि नौनिहालों को भारतीय संस्कृति की ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से देश भर में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा चलाये जा रहे हैं। इस परीक्षा में प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त छात्र- छात्राओं का चार दिवसीय व्यक्तित्व परिष्कार शिविर का शांतिकुंज में चल रहा है। कक्षा पांच से लेकर महाविद्यालय तक के तीन सौ से अधिक विद्यार्थी इस शिविर में शामिल हैं। ये वे मेधावी विद्यार्थी हैं, जिन्होंने अपनी- अपनी कक्षा में प्रांतीय स्तर पर प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया है और उप्र, गुजरात, छग, मप्र, बिहार, पंजाब, झारखंड सहित देश २२ राज्यों से आये हैं। भासंज्ञाप के अतुल द्विवेदी ने पावर पाइंट के माध्यम से विद्यार्थियों में व्यक्तित्व परिष्कार के विविध पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।

शिविर संयोजक के अनुसार चार दिन तक चलने वाले इस शिविर में छात्र- छात्राओं को योग, आसन, प्राणायाम, हवन आदि का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जायेगा। तो वहीं प्रतिभागी बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के विविध पहलुओं पर प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित है। शिविर के दौरान प्रतिभागियों को कैरियर बनाने के सूत्र, मानवी संस्कृति का आधार, गायत्री मंत्र का महत्त्व आदि विषयों पर विषय विशेषज्ञ मार्गदर्शन करेंगे। इस अवसर पर मोहनसिंह भदौरिया, पीसी माथुर, रामनरेश सिंह, राजेश मिश्रा,आदि मौजूद थे।      






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