Published on 2015-08-01

गायत्री तीर्थ शान्तिकुंज में यहां गुरु पूर्णिमा पर्व शुक्रवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश-विदेश से आए हजारों गायत्री साधकों ने आराध्य गुरुसत्ता को आदरांजलि अर्पित की। गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्याजी एवं शैल दीदी ने इस अवसर पर उपस्थित गायत्री साधकों को पर्व सन्देश सुनाए।

पण्ड्याजी ने कहा, "आज मैं जो कुछ भी हूं, पूज्य गुरुदेव के कारण ही हूं। मुझे मेरे गुरुदेव ने ही गढ़ा है।"

उन्होंने गुरु-शिष्य सम्बन्ध को सार्थक बनाने वाले चार जोड़े गुरु-शिष्यों का उदाहरण दिया : रामकृष्ण-विवेकानन्द, द्रोणाचार्य-अर्जुन, हिमालयवासी सर्वेश्वरानन्द-श्रीराम शर्मा, आचार्य श्रीराम शर्मा एवं माता भगवती देवी शर्मा।

पण्ड्याजी ने कहा कि जिस दिन आप अपने गुरु के चरणों में समर्पित हो जाएंगे, उसी दिन से आपकी प्रगति उन्नति शुरू हो जाएगी। उन्होंने हृदय की दुर्बलता त्यागने और अन्दर के शत्रुओं यानी काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सरादि से लड़कर उन्हें परास्त-निरस्त कर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

इस मौके पर शैल दीदी ने कहा, "संवेदना ही मनुष्य के अन्दर की मनुष्यता को जागती है और उसे महानता की ओर ले जाती है। हमें अपने अन्दर की संवेदना जगानी चाहिए।"

उन्होंने गुरु को भाव संवेदना की मूर्ति बताया और कहा कि गुरु वह कुम्भार है जो शिष्य के व्यक्तित्व को निखारता है और उसे सुगढ़ बनाता है।
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इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।



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