Published on 2015-08-14

सावन के पवित्र महीने में लाखों कांवडियों ने शिव की नगरी हरिद्वार में आराधना कर पुण्य अर्जित किया। पर साथ ही शहर व गंगा के निकट गंदगी का अंबार भी लगागये। उन्हें समझना चाहिए कि भक्ति पवित्रता का पर्याय है और पवित्रता का अर्थ आन्तर बाहर स्वच्छता है, जिसे हर शिव भक्त को याद रखना चाहिए। गंदगी से शहर का बुरा हालजानकर गायत्री परिवार प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्या व संस्था की अधिष्ठात्री ने सफाई अभियान चलाने का निर्णय लिया और गंगा मैया को पवित्र व निर्मल चलाने के मुहिम के अंतर्गत आजस्वच्छता अभियान चलाया गया। इस अभियान में २० राज्यों से शांतिकुंज पहुंचे गायत्री साधकों, अंतेःवासी कार्यकर्त्ता भाई-बहिन, देवसंस्कृति विवि परिवार के करीब पांच हजारपीतवस्त्रधारी लोगों ने पसीना बहाया। हरिद्वार के हृदय स्थल माने जाने वाली हरकी पौडी, सीसीआर से लेकर चण्डीपुल तक जगह-जगह बिखरे कूड़े-करवट को चून-चून कर एकत्रितकिये गये। 


आज प्रातः जब हरिद्वार के लोगों की आंखे खुलीं तो करीब पांच हजार लोगों को गंगा के किनारे व रेलवे स्टेशन में सफाई अभियान में पसीना बहाते देखा। ये कोई सफाईकर्मचारी नहीं थे, वरन् गायत्री साधक थे जो साधना के लिए शांतिकुंज आये हैं। इन्होंने कूडे-करवट, पानी की खाली बोतलें, जूठे दोने-पत्तले, जूठे कप आदि के टनों कूडे कचरे गंगाजीसे निकाले और बोरियों में भर-भर कर नियत स्थान में एकत्रित करते रहे। हरकी पौडी, सीसीआर से लेकर चंडी पुल तक कुल कई टन कचरा इकट्ठा किया। 

सफाई अभियान का नेतृत्व कर रहे शांतिकुंज व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्मा ने बताया कि हरकी पौडी से लेकर चंडी पुल तक को ५ सेक्टर में बांटा गया था। प्रत्येक सेक्टरमें ७ से ८ सौ लोग पसीना बहाये। पांचों सेक्टर के लिए शांतिकुज के परशुराम दल, भारद्वाज दल, चरक दल, प्रताप दल व प्रखर दल को जिम्मेदारी दी गयी थी जिसे उन्होंने बखूबीनिबाहा। वहीं अन्य दो दल मार्कण्डेय दल व विवेकानन्द दल रेलवे स्टेशन में सफाई अभियान में जुटे रहे। मैं अपने कार्यकर्त्ताओं की मेहनत व लगन से बहुत खुश हूं। हमारे कई परिजनऐसे हैं, जिन्होंने कभी ऐसी गंदगी नहीं देखी, फिर भी वे हाथ में ग्लोब्स व मास्क लगाकर कूडे करकट चुने। 

राजस्थान से आये विक्रम चन्द्र जाग्रत, देव, विभा, प्रज्ञा, विद्या आदि कहती हैं ऐसी गंदगी हरिद्वार में, कभी सोचा नहीं था। पर सावन के इस पवित्र महीने में गंगा मैया की सफाईअभियान में भागीदारी कर लगा कि कई शिवाभिषेक का पुण्य मिला। मप्र के निर्मल कहते हैं कि गंगा मैया में तन की नहीं, मन की बुराई की सफाई के लिए आना चाहिए।




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