शांतिकुंज में आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण शिविर का समापन

Published on 2015-08-10
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शांतिकुंज व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्मा ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं पर हमारा कोई वश नहीं है, लेकिन उनके प्रति हम जागरूक हों तो उनसे होने वाले नुकसान को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। कई देशों द्वारा इस दिशा में बहुत कार्य हुआ है, लेकिन हमारे देश में इस संदर्भ में अनभिज्ञता का वातावरण है। आपदाओं से सबसे अधिक प्रभावित गरीब व्यक्ति ही होता है। उसे जागरूक करना आपदा प्रबंधन का सबसे महत्त्वपूर्ण पक्ष है।


वे शांतिकुंज में चले पांच दिवसीय आपदा प्रबंधन शिविर के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आपदा के बाद की स्थिति के प्रबंधन की अपेक्षा आपदा से पूर्व खतरों से होने वाले नुकसान की संभावनाओं के प्रबंधन को सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण बताया और जन जागरूकता को आपदा प्रबंधन का प्रमुख उपचार बताया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा कैन्थूरा ने कहा कि समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन की मजबूती के लिए ऐसे शिविरों की आवश्यकता है। हरिद्वार की जनता के लिए आपदा प्रबंधन शिविर एक संजीवनी की तरह है।

शिविर में एनडीआरएफ के रविन्द्र, कमल कुमार, कोमल, सुनील धर्मेन्द्र, प्रदीप आदि ने सजनपुर पीली, भोगपुर से आये २० प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिये। इस दौरान मानवीय एवं दैवीय आपदा से बचने एवं आपदा के पश्चात किये जाने वाले राहत कार्यों पर विस्तार से सैद्धांतिक व्यावहारिक प्रशिक्षण दिये गये। समापन अवसर पर प्रशिक्षणार्थियों ने अपने अनुभव बांटते हुए अपने-अपने गांवों में शिविर के दौरान मिले सूत्रों को अपने साथियों में बांटने की बात कही। तो कई युवाओं ने स्वावलंबी बनने की ओर कदम बढ़ाने के अपने संकल्प दोहराये। शांतिकुंज व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्मा एवं जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा कैन्थूरा ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिये।


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