Published on 2015-07-22
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रचनात्मक कार्यक्रमों में सतत सक्रिय रहने वाले शांतिकुंज के स्वयंसेवकों ने श्रमदान-सेवा सप्ताह के अंतर्गत प्रथम दिन खूब पसीना बहाया। पांच साल के बच्चों से लेकर ८४ सालके उत्साही लोगों के हाथ में झाडू, फावड़ा आदि सफाई के साधन देखकर लगा कि मानों ये अपना पूजाघर की साफ-सफाई कर रहे हों।

सफाई दल का नेतृत्व कर रहे व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्मा के अनुसार लोगों को प्रेरणा देने के उद्देश्य से स्वयंसेवकों की यह प्रशिक्षण शिविर आयोजित की गई है।हालांकि शांतिकुंज प्रत्येक माह के २४ तारीख को महाश्रमदान दिवस के रूप में मनाता है। इस दिन अंतेःवासी कार्यकर्त्ता भाई-

बहिनों के अलावा विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों में आयेप्रशिक्षणार्थी वृहत् सफाई अभियान में भागीदारी करते हैं। इसी क्रम को और गति देने के उद्देश्य से पहली बार २१ से २९ जुलाई की नौ दिवसीय संजीवनी साधना सत्र को श्रमदान सेवा सप्ताह प्रधान के रूप में मनाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मंगलवार से शुरू हुए इस सत्र में जप, साधना, योग आदि नियमित दिनचर्या के अनुसार चलती रहेंगी। इसके बीच शांतिकुंज में निवास करने वालेप्रायः सभी लोग नित्य तीन से पांच घंटे तक का समय विशेष से रूप से सफाई अभियान में लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सफाई अभियान के दौरान निकले कूड़े-कचरों केनिस्तारण के लिए दो ट्रेक्टर लगाये गये हैं, जो देवसंस्कृति विश्वविद्यालय-गायत्रीकुंज परिसर में कूड़ों को खाद के रूप में परिवर्तन के लिए लगाये गये प्लांट में इकट्ठा किया जा रहाहै। ज्ञातव्य है कि प्रताप, मार्कण्डेय, भारद्वाज, प्रखर, विवेकानंद, परशुराम, चरक नाम से बनी टीम में भाई शामल हैं तो वहीं महिला मंडल में बहिनें भी शामिल होकर श्रमदान-

सेवा कार्य में जुटी हैं। इंदौर से आये ८२ वर्षीय साहित्यकार तुलसीराम प्रजापति कहते हैं स्वच्छता की दिशा में यह अत्यन्त सुन्दर प्रयास है, अन्यों को इससे प्रेरणा लेकर अपनेघरों, आश्रमों व संस्थानों में लागू करना चाहिए।


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