Published on 2015-09-06

प्राचीन आरण्यक परंपरानुसार संचालित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज में भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए शिक्षक दिवस मनाया गया। विवि परिवार ने भारतरत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए उनकी शिक्षाओं को याद किया। देसंविवि के आचार्यों को विद्यार्थियों ने गुलदस्ता भेंटकर अपनी सद्भावना व्यक्त की, तो वहीं देसंविवि के अभिभावक कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने सभी आचार्यों को सम्मानित किया।

मृत्युंजय सभागार में उपस्थित शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कुलाधिपति डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि पुरातन गुरु-शिष्य परंपरा के विभिन्न उद्धरण द्वारा शिक्षकों को अपने व्यक्तित्व को निखारने और तराशने के सूत्र बताए और कहा कि सद्गुरु के माध्यम से ही शिष्यों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव हैं। जो जीवन को समझना सिखाए वही सच्चा गुरु- श्रेष्ठ शिक्षक है। उन्होंने असली विद्यार्थी का परिचय देते हुए कहा कि विद्यार्थी तो वे हैं, जो प्राकृतिक आपदाओं को चीरते हुए कई किलोमीटर पैदल चलकर पढ़ाई करने आते हैं। पहाड़ के बच्चों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक तथा शिक्षक न होने पर भी ये अव्वल आते हैं और पीसीएस, आईएएस जैसे ऊँचे पदों पर आसीन होते आ रहे हैं। डॉ पण्ड्या ने अपने आचरण से शिक्षा से देने वाले देसंविवि के कुलपिता युगऋषि पं० श्रीराम शर्मा आचार्य जी को इस युग का सर्वश्रेष्ठ शिक्षक बताया। साथ ही पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के शिक्षण कार्य को अतुलनीय बताया।

इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुई। देसंविवि के छात्र-छात्राओं ने कुलगीत के साथ ‘अद्वितीय निर्माणों में गुरुओं का निर्माण महान’ की भावभरी प्रस्तुति दी। छात्र देवेन्द्र द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना ने सभी को भावविभोर कर दिया, तो वहीं छात्र-छात्राओं ने लघुनाटिका के माध्यम से अतीत से लेकर वर्तमान शिक्षा पद्धति पर लघुनाटिका प्रस्तुत की।

कार्यक्रम अंत में कुलाधिपति ने सभी शिक्षकों को सम्मानित किया। वहीं भाषण प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय आये क्रमशः प्रतिमा कुमारी, प्रज्ञा व अदिति गुप्ता को प्रमाण पत्र व स्मृति से सम्मानित किया। इस अवसर पर कुलपति शरद पारधी, प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या, कुलसचिव संदीप कुमार सहित विभिन्न विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, विवि परिवार उपस्थित थे। 

उधर गायत्री विद्यापीठ में शिक्षक दिवस के मौके पर छोटे-छोटे बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने सभी का मन मोह लिया। तो वहीं कई बच्चों ने अपनी कविता, भाषण के माध्यम से भारतरत्न डॉ राधाकृष्णन को भावांजलि दी। 



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