Published on 2015-09-24
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आर्ष गुरुकुलम के संस्थापक एवं एआईएम फार सेवा संस्था के संरक्षक स्वामी दयानंद सरस्वती और शांतिकुंज, देवसंस्कृति विवि का एक गहरा संबंध रहा है। देसंविवि के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्डया एवं स्वामी दयानंद सरस्वती का संबंध पिछले तीस सालों से रहा है। उनके निधन पर गायत्री परिवार प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्या एवं प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय श्रद्धांजलि देने ऋषिकेश पहुंचे।

स्वामी जी के महाप्रयाण के अवसर पर डॉ पण्ड्याजी ने पुरानी यादों को याद करते हुए भावुक हो उठे। अपने अंतिम मिलन को याद करते हुए डॉ पण्ड्या ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से वे मेरे अभिभावक थे एवं जब भी मुझे आध्यात्मिक मार्गदर्शन की आवश्यकता होती थी, उनका पितृवत् स्नेह एवं मार्गदर्शन मुझे मिलता था। महापुरुष, संत, मुक्त आत्माओं की कभी मृत्यु नहीं होती। उनका ज्ञान सदैव अमर रहता है। इसी तरह वेदांत के प्रख्यात शिक्षक व संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान स्वामी जी सदैव अमर ही रहेंगे।

स्वामीजी कई बार शांतिकुंज, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय भी आये। इस दौरान उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण सुझाव व मार्गदर्शन दिया था। सन् में हिन्दू संगठनों का एक मंच पर लाने के लिए स्वामी दयानंद सरस्वती जी एक संगठन की स्थापना की थी, जिसे उन्होंने एआईएम फार सेवा का नाम दिया था और इसका संचालन कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्याजी को यह कहते हुए दिया था कि गायत्री परिवार राष्ट्र का  सबसे युवा संगठन है और आपका नेतृत्व संवेदना से भरा है, इस संगठन की प्रथम बैठक देवसंस्कृति विवि में ही आयोजित हुई थी, जिसमें विहिप के अशोक सिंघल, श्रीश्री रविशंकर जी, स्वामी चिदानंद मुनि आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।



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