Published on 2015-10-01

आदिकाल से जीवन जीने की कला सिखाता है योग : श्रीपद नाईक 
योग संयम और अनुशासन का नाम है डॉ. प्रणव पण्ड्याजी

हरिद्वार १ अक्टूबर। तीर्थ नगरी हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में आज से ६ दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय योग, संस्कृति एवं अध्यात्म महोत्सव का शुभारम्भ हुआ। १ से ६ अक्टूबर तक चलने वाले इस महोत्सव का केन्द्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नाईक व देसंविवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी, पद्मश्री डॉ. डी.आर. कार्तिकेयन आदि ने दीप प्रज्वलन कर शुभारम्भ किया। इस अवसर पर १५ देशों के देश विदेशों से आए ४०० योग विशेषज्ञों तथा विवि के समस्त आचार्य एवं विद्यार्थी मौजूद थे। 

महोत्सव के मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए केन्द्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नाईक ने कहा कि योग जीवन जीने की कला है। यह आदि काल से लोगों को जाग्रत कर रहा है। शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक का समन्वय के रूप में योग महोत्सव को जाना जायेगा। उन्होंने देवसंस्कृति विवि के कुलपिता तथा राष्ट्र के मूर्धन्य स्वतंत्रता सेनानी को याद करते हुए कहा कि शांतिकुंज एवं देसंविवि की पृष्ठभूमि आचार्यश्री के तप बल से अनुप्राणित है। गायत्री परिवार एकता समता का एक अनुपम संगठन है। 

कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि योग संयम और अनुशासन का नाम है। योग ही संसार को जोड़ने का कार्य कर सकता है। उन्होंने कहा कि योग मन के साथ कर्म, ज्ञान और भक्ति को जोड़ता है और  इससे अनुशासित मानवता का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि चरित्र चिन्तन को परिष्कृत और उत्कृष्ट बनाने में यौगिक साधनाएँ, सांस्कृतिक परम्पराएँ और आध्यात्मिक प्रेरणाएँ ही अवलम्बन का कार्य करती हैं। चरित्र चिन्तन की अस्तव्यस्तता से जहाँ व्यक्ति का शोचनीय नैतिक पतन हुआ है, वहीं स्वास्थ्य का भी चिन्ताजनक ह्रास हुआ है। ऐसे में योग, संस्कृति और अध्यात्म ही इन सबसे बचाने के आधार अवलम्बन हैं। डॉ पण्डयाजी ने आचार्यश्री द्वारा लिखी पुस्तक समस्त विश्व को भारत के अजस्र अनुदान का जिक्र करते हुए भारतीय संस्कृति की विश्व व्यापकता पर प्रकाश डाला। 

इससे पूर्व महोत्सव में देसंविवि के कुलपति शरद पारधी ने प्रतिभागी महानुभावों का स्वागत सम्मान किया। प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने योग महोत्सव पर प्रकाश डालते हुए कहा इन दिनों में योग, संस्कृति और अध्यात्म को लेकर चर्चा और परिचर्चा होगी। योग, संस्कृति और अध्यात्म की ओर आप लोगों का उत्साह एवं इनको आगे बढ़ाने की प्रयत्नशीलता निश्चय ही सराहनीय एवं खुशी का विषय है। योग संस्कृति और अध्यात्म को मानवता के तीन प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि इससे ही मानवता जगेगी। उद्घाटन सत्र में आकांक्षा जोशी, पद्मश्री कार्तिकेयन, हरिसिंह खालसा, जॉन फरंग मॉस्टेड, डॉ अल्फ्रेडो लावरिया, प्रो. काली पोएटर्स, प्रो. सिग्मा एलनकाटा, प्रो वल्दिस पिराग्स, प्रो हर्षा ग्रांमिगर, प्रो गोडा देनापेने आदि मंचासीन थे। 

इस अवसर पर अतिथियों ने अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव की स्मारिका, संस्कृति संचार, एवं ई- न्यूज लेटर रेनासा का विमोचन किया। वहीं उत्तराखंड की योग ब्रांड एम्बेसडर व देसंविवि की एमए (योग) की छात्रा दिलराज प्रीत कौर व ९० मिनट तक लगातार शीर्षासन करने वाले देसंविवि के बीएससी के छात्र आदित्य प्रकाश सिंह को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। उद्घाटन सत्र के समापन अवसर पर कुलाधिपति डॉ पण्डया ने केन्द्रीय मंत्री श्रीपद नाईक को रुद्राक्ष की माला, शॉल युगसाहित्य भेंट किया। इस अवसर पर लाटबिया, लुतानिया, इटली, हांगकांग, चेक रिपब्लिक अमेरिका, नार्वे, होलैण्ड, अर्जेण्टिना, बाली, रूस, नेपाल आदि देश विदेश से आये योग प्रशिक्षु एवं संस्कृति संवाहकों के अलावा देवसंस्कृति विवि परिवार, प्रशासनिक अधिकारी तथा पत्रकार गण उपस्थित थे। 




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