Published on 2015-10-05

विश्व के ४०० योग विशेषज्ञों ने किया विश्वशांति हेतु हवन

हरिद्वार अक्टूबर। देव संस्कृति विश्वविद्यालय में चल रहे ५वें अंतर्राष्ट्रीय योग, संस्कृति और अध्यात्म महोत्सव के तीसरे दिन विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों का नाम रहा। इस दौरान वैश्विक पटल के अनेक बुद्धिजीवियों ने योग, संस्कृति एवं अध्यात्म पर अपने विचार रखे।

देसंविवि के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्याजी ने योग के वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने महर्षि पतंजलि और भगवान श्रीकृष्ण के उदाहरण देते हुए कहा कि योग मात्र नैदानिक प्रक्रिया न होकर समग्र जीवन शैली का नाम है। योग से जहाँ व्यक्तियों का व्यक्तित्व निखरता है, वहीं इससे सामाजिक सुव्यवस्था पर भी सहायता मिलती है।

कुलपति शरद पारधी ने शुद्ध मन, सभ्य समाज के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों के महत्व पर बल दिया। प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि आज पृथ्वी पर ९० प्रतिशत लोग धर्म- अधर्म को जानते हुए भी वह काम कर रहे हैं जो नहीं करना चाहिए। इसके पीछे कारण उनका अपने पर नियंत्रण न होना है। योग इसी नियंत्रण का नाम है। लाटविया मेडिकल परिषद् के प्रमुख प्रो. वल्दिस पिराग्स ने लाटविया विश्वविद्यालय की विशेषताएं बताते हुए कहा कि लाटविया का मौसम भारत के हिमालयी क्षेत्र से मिलता है और इसी समानता को ध्यान में रखते हुए हम दोनों देश के पारिस्थितिक पर शोध करना चाहते हैं। उन्होंने पश्चिमी फार्मास्युटिकल्स तथा भारतीय न्युट्रास्युटिकल्स को तुलनात्मक रूप से भी समझाया। विख्यात उपन्यासकार तथा योग प्रशिक्षक इरा त्रिवेदी ने अपने संस्मरणों के द्वारा योग के महत्व और इसकी उपयोगिता को बखूबी समझाया। एविस क्लाविन्स्किस ने कहा कि योग के महत्व को शब्दों से बयाँ करना मुश्किल है। महात्मा गाँधी के जन्मदिवस पर उन्हें याद करते हुए उन्होंने विश्व शांति के लिए अहिंसा की प्रासंगिकता पर भी जोर दिया। जर्मनी की प्रो. हर्षा ने योग को अध्यात्म का अभिन्न अंग बताते हुए उसके महत्व पर प्रकाश डाला। पद्मश्री डी आर कार्तिकेयन, जॉन मोस्ताद तथा योग धर्म समुदाय इटली के प्रमुख भाई श्री हरीसिंह खालसा ने भी सत्र को संबोधित किया।

विश्व शांति तथा अध्यात्मिक पुनर्जागरण को समर्पित इस महोत्सव के प्रथम सत्र में यूरोपियन आयुर्वेद एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. हर्षा तथा नार्वे के जॉन फ्रैंग मोस्ताद, प्रो सिग्मा अंक्रावा, प्रो कालरा पिटर्स, प्रो गोडा डेनापाइने आदि ने योग, अध्यात्म और आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डाला। इससे पूर्व सभी विदेशी मेहमानों ने भारतीय संस्कृति के आधार हवन कर विश्व शांति की कामना की। इस अवसर पर विदेशी मेहमानों के अलावा योग, संस्कृति व अध्यात्म के प्रशिक्षु लोग उपस्थित थे। 




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