Published on 2015-10-06

भारतीय संस्कृति के यादों को संजोकर विदेशियों ने ली विदाई
योग महोत्सव में आध्यात्मिक सेशन और वैज्ञानिक सेशन में विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार


भारत और भारतीय संस्कृति के आदर्शों को यादों में सँजोकर १५ देशों के योग प्रशिक्षु एवं संस्कृति के संवाहकों ने आज योग महोत्सव से विदाई ली। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में संपन्न हुए योग, संस्कृति और अध्यात्म को लेकर पांचवे अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में ४०० से अधिक विदेशी आगन्तुकों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान भारतीय संस्कृति, संस्कारों और परंपराओं को लेकर इन्होंने देसंविवि के दिव्यता भरे वातावरण में छः दिन रहकर विवि के विभिन्न क्रियाकलापों से रूबरू हुए। साथ ही योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यज्ञथैरेपी, पंचकर्म चिकित्सा के साथ साथ गंगा की निर्मल धारा में बैठकर ध्यान का लुत्फ उठाया। देसंविवि के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने विदाई ले रहे विदेशी मेहमानों को पुनः आने का निमंत्रण दिया और कहा कि यह विवि आपका घर है। यहाँ के आत्मीयता भरे वातावरण में आकर सांस्कृतिक आदान प्रदान द्वारा मानवता की प्रगति के योगदान करें।

समापन सत्र को संबोधित करते कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने योग महोत्सव की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अन्य संस्कृति व्यक्ति को भौतिक जगत में ऊँचा उठाती है, किन्तु अपने भीतर झाँकने की आत्मसाधना और आत्मिक शान्ति पाने का अवसर भारतीय संस्कृति ही प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि योग से स्वस्थ रहा जा सकता है और स्वस्थ मन से किए गए प्रत्येक कार्य सही ढंग से संपन्न होता है।

प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय ने बताया कि महोत्सव के दौरान आप लोगों को अपने अन्दर झाँकने का जो मौका मिला, उसे सदैव याद रखें। यहाँ के वातावरण में एक अलग तरह की सकारात्मकता है, जो साधक को अपनी ओर खींचता है। यूरोप की बारबरा ने भावविभोर होकर कहा कि मैं अपने देश पहुचकर यहाँ के योग, संस्कृति एवं अध्यात्म को जन-जन तक पहुंचाने की शपथ लेती हूँ। इटली के बेन्सेंत ने कहा कि मुझे देवसंस्कृति विवि एक परिवार के रूप में मिला।

छह दिन तक चले इस महोत्सव में आध्यात्मिक सेशन और वैज्ञानिक सेशन में कई देशों से आये विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए जिसमें प्रमुख रूप से पद्मश्री डीआर कार्तिकेयन, योग धर्म समुदाय इटली के प्रमुख भाईश्री हरीसिंह खालसा, इंडोनशिया के रसा आचार्य दर्मयासा, लाटविया के डिप्टी एम्बेसडर एविस क्लाविन्स्किस, प्रो. मार्ट लेनमेट्स, यूरोपियन आयुर्वेद एशोसिएशन की अध्यक्षा प्रो० हर्षा, सेंडी स्टडी भक्तिवेदान्त के अध्यक्ष प्रो. मार्को फेरिनी, लाटविया के प्रो वल्दिस पिराग्स, नार्वे के जॉन फ्रैंग मोस्ताद आदि प्रमुख हैं।

इससे पूर्व योग महोत्सव के अंतिम सत्र की शुरुआत छात्राओं द्वारा प्रस्तुत ‘बहुत है अपना योग महान..’ गीत से हुई। विश्वविद्यालय स्टाफ ने योग के विभिन्न आसनों से उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया तो विद्यार्थियों ने कठिनतम आसनों को शृंखलाबद्ध रूप से प्रस्तुत किया। बीसीए के छात्रों ने पंजाब के प्रसिद्ध भांगडा नृत्य से सभी के मन को उल्लसित कर दिया। वहीं विदेशियों ने प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर में ध्यान-साधना कर योग एवं अध्यात्म के सूत्रों को समझा। आयोजकों का मानना है कि पांच अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सवों की यह यात्रा अपने अगले पड़ाव में कई और रोचक पहलुओं के साथ आगे बढ़ती जायेगी।

समापन अवसर पर विभिन्न देशों से आये प्रतिभागियों के अलावा, कुलपति श्री शरद पारधी, प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या, कुलसचिव संदीप कुमार सहित समस्त विवि परिवार उपस्थित था।





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