Published on 2015-11-08


पूर्वोत्तर राज्य आसाम के सर्वोदय आंदोलन के कार्यकर्त्ताओं का गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में चल रहे पांच दिवसीय शिविर का आज समापन हो गया। इस शिविर में विनोबा भावे के सर्वोदय आंदोलन से जुड़े २३५ भाई- बहिन शामिल रहे। इन्होंने गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में जप, साधना, योग आदि विषयों पर गहराई से अध्ययन किया।

शिविर के समापन सत्र को संबोधित करते हुए वरिष्ठ कार्यकर्त्ता श्री कालीचरण शर्माजी ने कहा कि गायत्री सद्बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी है। इसके जप से साधक के मन, चित्त सन्मार्ग की ओर बढ़ता है। साधक के विचार ऊँचा उठते हंै। गायत्री की नियमित जप- साधना से समाज के हित में कार्य करने की हूक पैदा होती है। उन्होंने कहा कि गायत्री धर्म- सम्प्रदायों से परे है। गायत्री जीवन साधना का महामंत्र है। इसके जप से इहलोक परलोक दोनों सुधरते हैं। श्री शर्मा ने हिमालय की तराई से लेकर सुदूर उत्तर- पूर्व में फैली सांस्कृतिक जागरण की लहर के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने श्रीकृष्ण व श्रीमद्भगवतगीता के विभिन्न उद्धरणों के माध्यम से वर्तमान समय में देवमाता गायत्री की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

इससे पूर्व प्रज्ञा अभियान के संपादक श्री वीरेश्वर उपाध्यायजी ने आपाधापी भरे वर्तमान समय में मन की शांति के लिए ध्यान, साधना एवं तन की स्वस्थता के लिए नियमित योग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की वर्तमान स्थिति को देखते हुए देवसंस्कृति के सार्वभौम, प्रगतिशील एवं लोकोपयोगी निर्धारण ही राष्ट्र को ऊँचा उठाने के लिए आशा की किरण के रूप में दिखाई दे रहा है। इन्हीं मौलिक विशेषताओं के आधार पर भारत जगद्गुरु बन सकता है। ऐसे महत्त्वपूर्ण क्षणों में प्रत्येक भारतीय का यह पावन कर्त्तव्य बन जाता है कि वह भारतीय संस्कृति के आदर्शों को गढ़ने में कोई कसर न छोड़े। उन्होंने कहा कि ऋषि संस्कृति का प्रचार- प्रसार मात्र शब्दों एवं बाहरी आडम्बर तक ही सीमित न रहकर व्यक्तित्व में भी दिखाई दे। उन्होंने शिविरार्थियों के विविध शंकाओं का समाधान भी किया।

शिविर के समन्वयक परमानंद द्विवेदी के अनुसार शिविर के समापन अवसर पर सामूहिक हवन किया। उन्होंने बताया कि पूर्णाहुति के दिन प्रतिभागियों ने अपने अंदर की एक बुराई छोड़ने एवं एक अच्छाई ग्रहण करने के संकल्प लिये। उन्होंने बताया कि यह दल आसाम के शांति साधना आश्रम के प्रमुख हेमभाई, रवीन्द्र शर्मा महंत के नेतृत्व में गायत्री तीर्थ आया था। सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत बहिनों ने नगाड़ा नाम के माध्यम से विभिन्न मुद्राओं में प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों को साधना के अतिरिक्त शांतिकुंज के योगाचार्यों ने योग के विभिन्न आयामों के व्यावहारिक व सैद्धांतिक प्रशिक्षण भी दिये।











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