Published on 2015-11-12

अर्थानुशासन का महापर्व दीवाली: डॉ प्रणव पण्ड्याजी
दीवाली पर वृक्षारोपण किया देसंविविशांतिकुंज के बच्चों ने


अखिल विश्व गायत्री परिवार के मुख्यालय गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के मुख्य सभागार में हजारों जलते दीपकों के प्रकाश में दीपमहायज्ञ के साथ दीवाली पर्व मनाया गया। इस अवसर पर महिला मण्डल की बहिनों ने पूरे परिसर को आकर्षक रंगोलियों से सजा रखा था। कई बच्चों ने दीवाली पर पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर वृक्षारोपण करते हुए उसके संरक्षण के संकल्प लिये।

इस अवसर पर गायत्री परिवार प्रमुख डॉ प्रणव  पण्ड्याजी ने कहा कि दीवाली अर्थानुशासन का महापर्व है। दीवाली सुख- समृद्धि का संदेश देती है, लेकिन यह सौभाग्य उन्हें ही मिलता है, जो धन का सही उपयोग करने की कला जानते हैं। सुख अधिक धन कमाने में नहीं, धन का सदुपयोग करने में है। उन्होंने कहा कि बाँटने में सुख निहित है, बटोरने में नहीं। ज्योति पर्व पर जलते दीपकों से हमें यही प्रेरणा लेनी चाहिए। वे अपने भीतर के तेल (स्नेह) की एक- एक बुद जलाकर जग को प्रकाशित करते हैं। उन्होंने कहा कि उसी मनुष्य का जीवन धन्य है, जिसका तन, मन, धन केवल अपने ही नहीं वरन् सारे समाज को प्रेरणा प्रकाश देने में लग जाये।

इससे पूर्व संस्था की अधिष्ठात्री शैल दीदी व डॉ पण्ड्याजी ने पर्व पूजन किया तथा वेदमाता गायत्री ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं लेखा विभाग प्रभारी श्री हरीश ठक्करजी ने बही खातों का पूजन कराया। इस अवसर पर वैदिक कर्मकाण्ड श्याम बिहारी दुबे ने कराया।

वहीं महिला मण्डल की बहिनों ने गायत्री तीर्थ परिसर को गणेश, लक्ष्मी, मोर आदि आकर्षक रंगोलियों से सजाया। हर ओर इको फ्रेण्डली दीवाली मनाने का संदेश भी लिखा हुआ था। इस अवसर पर देवसंस्कृति विश्वविद्यालय व शांतिकुंज के कई बच्चों ने वृक्षारोपण किया। इन बच्चों का कहना था कि फटाखे फोड़ने से जीवनदायिनी ऑक्सीजन देने वाले हमारे मित्र पौधों, पेड़ों को भारी नुकसान होता है, अतएव हम लोग फटाखे जलाने के स्थान पर वृक्षारोपण किया और बड़े होने तक उसका संरक्षण करेंगे। 





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