Published on 2015-11-10

उत्तराखंड के स्थापना दिवस पर हुए गायत्री महायज्ञ
धन्वन्तरी जयन्ती पर हुए विविध कार्यक्रम

राज्य के स्थापना दिवस पर शांतिकुंज एवं देवभूमि उत्तराखण्ड के विभिन्न गायत्री शक्तिपीठों, प्रज्ञापीठों में यज्ञ के साथ राज्य की चहुंमुखी विकास हेतु यज्ञाहुतियाँ दी गईं। आज धन्वन्तरी पर्व होने के कारण यह उत्साह दोगुना हो गया। वहीं राज्य के स्थापना दिवस की पूर्व संध्या में मुनस्यारी में गायत्री परिवार प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्याजी ने गायत्री महायज्ञ, भगवान शिव, गायत्री माता की प्राण प्रतिष्ठा के साथ साधना- स्वावलंबन प्रशिक्षण केन्द्र का उद्घाटन किया। इस केन्द्र के माध्यम से कुंमायूं मंडल के विभिन्न जिलों के बेरोजगार युवाओं एवं बहिनों को निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जायेगा, जिसके अंतर्गत स्वावलम्बी बनाने वाले विभिन्न कुटीर उद्योग से प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए शांतिकुंज की प्रशिक्षित टीम रहेगी। यहाँ बताते चलें कि शांतिकुंज के बाद यह प्रशिक्षण केन्द्र उत्तराखंड का महत्त्वपूर्ण केन्द्र होगा, जहाँ साधना शिविरों के अलावा कुटीर उद्योग का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस अवसर पर डॉ पण्ड्याजी ने कहा कि हिमनगरी मुनस्यारी शिव भूमि है। देवभूमि उत्तराखंड के सीमांत जिले में स्थित मुनस्यारी के इस प्रशिक्षण केन्द्र के माध्यम से निकटवर्ती जिलों के बेरोजगार युवाओं व बहिनों को निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जायेगा। कहा कि जिस राज्य के युवा स्वस्थ, सबल व बहिनों की भागीदारी पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर होगा, उसके चहुंमुखी विकास में कोई कठिनाई नहीं आ सकती। उन्होंने कहा कि यहाँ देशी- विदेशी साधकों- पर्यटकों को ध्यान, साधना एवं योग का प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। वहीं गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के साथ राज्य भर के गायत्री परिवार के विभिन्न शक्तिपीठों, प्रज्ञापीठों में हवन कर राज्य के विकास की प्रार्थना की गयी।

उधर शांतिकुंज के मुख्य सभागार एवं फार्मेसी में आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धन्वन्तरि की जयंती आयुर्वेद के विकास में जुट जाने के आवाहन के साथ मनायी गयी। धन्वन्तरि जयंती के अपने संदेश में शांतिकुंज की अधिष्ठात्री शैल दीदी ने कहा कि धन्वन्तरि भगवान विष्णु के तेरहवें अवतार हैं तथा दीर्घतपा के पुत्र व केतुमान के पिता हैं। वे देवताओं के वैद्य थे। उन्होंने कहा कि भगवान धन्वन्तरि जयंती यही प्रेरणा देती है कि परमात्मा ने सर्वश्रेष्ठ मनुष्य काया दी है, तो उसे स्वस्थ रखकर जीवन उद्देश्य की दिशा में निरंतर प्रयासरत, प्रगतिशील रहना चाहिए। इस अवसर पर डॉ. ओपी शर्मा, डॉ. दता, डॉ. गायत्री शर्मा, डॉ. वन्दना श्रीवास्तव आदि ने भगवान धन्वन्तरि से जुड़े विभिन्न पौराणिक कथानकों का जिक्र करते हुए प्रकृति के अनुसार जीवन जीने की सलाह दी। 




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