Published on 2015-11-26

महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के प्रस्ताव पर भारतीय संस्कृति को जानने इण्टरनेशनल कॉन्फ्रेन्स ऑन इंडोलॉजी का ४० सदस्यीय दल शांतिकुंज पहुंचा। इस दल ने भारतीय संस्कृति के आधार माने जाने वाले यज्ञ में भागीदारी की। साथ ही सन् १९२६ से सतत प्रज्वलित अखंड दीपक का दर्शन कर विश्व वसुधा की शांति एवं विकास के लिए प्रार्थना की।

इस दौरान प्रतिनिधि मंडल ने गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्याजी व संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी से भेंट परामर्श किया। इस अवसर पर डॉ पण्ड्या ने कहा कि ऋषियों की इस भूमि में पुनः वसुधैव कुटुम्बकम की ऋचा गूंथने जा रही है। यह विश्व शांति और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। संस्था की अधिष्ठात्री शैल दीदी ने कहा कि संवेदना ही मानव को मानव बनाती है। सारे मतभेदों और देश- देशांतरों की भिन्नताओं के बावजूद मानवीय संवेदना हमें एक करती है।

इस सम्पूर्ण कार्यक्रम के संयोजक व इंडियन कांऊसिल फार कल्चरल रिलेशन्स (आईसीसीआर) के डायरेक्टर जनरल श्री राजशेखरन ने गायत्री परिवार प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्या के नेतृत्व में भारतीय संस्कृति के प्रचार में जुटे युवावर्ग के उत्साह की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि युवाओं को दिशा देकर मानवीय मूल्यों का विकास आज युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इंडोलॉजी कान्फ्रेन्स दल के प्रमुख जर्मनी श्री हेनरिच फ्रेहर शांतिकुंज का शांत वातावरण, यज्ञ एवं कार्यकर्त्ताओं के अनुशासित जीवन से काफी प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि मनुष्य में अनुशासन सबसे बड़ी चीज है, जो मैं यहां के प्रत्येक युवाओं में देख रहा हूँ। उन्होंने कहा कि इन गुणों का विकास अनुशासन हरेक देश के प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता है। भारतीय संस्कृति से जुड़े शोध एवं अनुसंधान पर श्री फ्रेहर को कई अवार्ड मिल चुके हैं। चीन से आये वांग वेनवे ने कहा कि युवाओं को संकीर्णता से उबारने के लिए जिस तरह गायत्री परिवार काम कर रहा है इससे मुझे चीन के युवाओं के बीच काम करने हेतु एक दिशा मिली। मि वांग युगऋषि के विभिन्न साहित्य लेकर गये। चीली के प्रो सर्गियो मेलीटन कारोस्को अल्वरेज ने देसंविवि में चलने वाली गीता व ध्यान की कक्षा, शिक्षण प्रणाली एवं युवाओं की कार्यप्रणाली को जानकर अपने विद्यार्थियों के बीच भी इसी तरह के प्रयोग करने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के माध्यम से जीवन जीने की कला के प्रायोगिक केन्द्र अनेक विश्वविद्यालयों में खोलने की आवश्यकता है।

इस दौरान गायत्री परिवार प्रमुख डॉ पण्ड्याजी व शैल दीदी ने सभी विदेशी मेहमानों को जीवन को ऊंचा उठाने वाले सत्साहित्य, स्मृति चिह्न एवं उपवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया एवं पुनः आने का निमंत्रण दिया, जिसे सभी ने हृदय से स्वीकारते हुए सपरिवार आने की बात कही।

इससे पूर्व दल के सभी सदस्यों ने देवात्मा हिमालय के प्रतीक रूप से बनाये गये साधना कक्ष में ध्यान किया। सभी सदस्यों ने करीब आधे घंटे तक ध्यान, साधना का लाभ लिया। इण्टरनेशनल कॉन्फ्रेन्स ऑन इंडोलॉजी के इस दल में यूएसए के प्रो डेविड फ्रावले, पौलेण्ड के डेनुटा स्लाविया, स्पेन के जेवीर रुइज, ब्राजील के मि. आस्कर, चीली के शेरजीवो मिल्टन सहित जर्मनी, इटली, रूस, अर्जेण्टिना, तुर्की, कनाडा, चेक रिपब्लिक, रोमानिया, श्रीलंका, मारिशस, डेनमार्क, चीन, इंडोनेशिया, नार्वे आदि के उच्च स्तरीय सदस्यों के अलावा आईसीसीआर के अधिकारी शामिल हैं। इस अवसर पर जिलाधिकारी हरवंश सिंह चुघ के अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारी व पुलिसकर्मी भी मौजूद रहे। 




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