Published on 2015-12-16

व्यक्ति के निर्माण से ही होगा राष्ट्र का निर्माण :  डॉ प्रणव पण्ड्याजी

देश के मप्र, छत्तीसगढ़, उप्र, राजस्थान, कर्नाटक, झारखंड आदि राज्यों के प्रतिभागी हैं शामिल 

गायत्री परिवार प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि यदि हम व्यक्ति के निर्माण करने में सफल हो गये, तो साधन, सुविधाओं के आने में देरी नहीं होगी। ग्रामोदय के माध्यम से ग्रामीणों के विकास से ही गांव, समाज का विकास संभव है। 

डॉ  पण्ड्याजी गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में तीन दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामोदय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यशाला में मप्र, उप्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, कर्नाटक, झारखंड आदि राज्यों से आये संकुल, जिला एवं प्रांत समन्वयक शामिल हैं। डॉ पण्ड्याजी ने कहा कि गायत्री परिवार के जनक युगऋषि पं० श्रीराम शर्मा आचार्य जी का महत्त्वपूर्ण योजनाओं में से एक है- ग्राम तीर्थ योजना। इसके अंतर्गत उन्होंने ग्राम को तीर्थ जैसा पवित्र, आकर्षक विकसित परिक्षेत्र के रूप मानते रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत गांवों का देश है। इसलिए गांवों के विकास से ही राष्ट्र का विकास संभव है। गांवों के विकास के लिए बनाये जा रहे कार्यक्रमों को त्वरित व द्रुत गति से ईमानदारी के साथ चलाये जायें। उन्होंने कहा कि गांवों की जमीनी हकीकत तो यह है कि गांवों की अर्थव्यवस्था कई दशक पीछे चल रही है। यही कारण है कि गाँव से पलायन हो रहा है। पलायन रोकने के बारे में चर्चा करते हुए गायत्री परिवार प्रमुख डॉ पण्ड्याजी ने कहा कि एक निर्धारित समय में संकुल समन्वयक मिलते रहें, ताकि एक- दूसरे की प्रगतियों से प्रेरणा लेकर अपने गांवों के विकास कर सकें। उन्होंने वैचारिक प्रदूषण व आस्था प्रदूषण को दूर करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य करने पर बल दिया। 

ग्राम संकुलों की प्रासंगिकता विषय पर चर्चा करते हुए खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ महेश शर्मा ने कहा कि एक संकुल में १० से १४ गांव शामिल हैं। इसकी संरचना हमारे देश की बड़ी वैज्ञानिक रचना है। इस प्रक्रिया से गांवों में औद्योगिक विकास की नींव पड़ी है। उन्होंने कहा कि संकुल समन्वयक या प्रभारी प्रशिक्षण के बाद गांवों के विकास में सहायक कार्यक्रमों को ग्रामीणों के साथ मिलकर प्रारंभ करते हैं। गांवों की ऊर्जा को गाँवों के विकास में ही खर्च करना प्राथमिकता होती है। कार्यशाला के प्रथम दिन ग्राम संकुल योजना के विभिन्न आयामों पर प्रो. बजरंग लाल, संकुल परिचय पर डॉ दिनेश, संकुल की रीति- नीति पर डॉ गजानन आदि ने संबोधित किया।


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