Published on 2016-01-14

ज्ञान दीक्षा है अद्भुत अवसर : आचार्य बालकृष्ण
देसंविवि का २८वाँ ज्ञानदीक्षा समारोह में विद्यार्थियों ने लिया नवनिर्माण का संकल्प
  
देवसंस्कृति विवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि प्राचीन तक्षशिला, नालंदा विवि के बाद युवाओं को गढ़ने और उनमें नैतिक मूल्यों के विकास के लिए संकल्पित है- यह देवसंस्कृति विवि। यहाँ शिक्षा के साथ- साथ विद्या का अध्ययन कराया जाता है। विद्यावान युवा ही समाज को सही राह दिखा सकता है।

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर हुए देवसंस्कृति विवि के २८वाँ ज्ञानदीक्षा समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉ. पण्ड्याजी  विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने गीता के विभिन्न श्लोकों के माध्यम से युवाओं को ज्ञान प्राप्ति में सदैव मुस्तैद रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज देश में ऐसी शिक्षा नीति हो, जो युवाओं को ज्ञानवान के साथ स्वावलंबी बनाने की दिशा में काम करे, ताकि डिग्री लेने के बाद उन्हें रोजगार के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने कहा कि केवल कागज की डिग्री लेकर आगे बढ़ने वाले युुवा एक समय के पश्चात अवसादग्रस्त एवं परिवार में विग्रह जैसी स्थिति का सामना करते हुए देखे जाते हैं।

समारोह के मुख्य अतिथि पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि बड़े लक्ष्य को लेकर चलने वाले संकल्पित महापुरुष ही समाज को नई दिशा देता है। आप सभी उन्हीं के पथ चिह्नों में चलने के लिए ज्ञान दीक्षा समारोह के साथ अपना पग बढ़ाया है यह सौभाग्य की बात है। संकल्प के प्रति दृढ़ता के साथ निरंतरता से आगे बढने से सफलता अवश्य मिलती है। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि समाज में आकंठ डूबे अभाव, अवसाद ग्रस्त लोगों को उबारने वाले संस्कृतिनिष्ठ युवाओं की इन दिनों महती आवश्यकता है और ऐसे युवा गढ़ने की जो विधा देसंविवि ने अपनाया है, यह गौरवपूर्ण है। उन्होंने कहा कि योग, आसन व अध्यात्म को अपनाने से सबसे पहले स्वयं की उन्नति होती है, बाद में दूसरों की। आचार्य बालकृष्ण ने पूरे देश के सतोगुणी व सात्विक भाव वाले लोगों को एक जुट होकर कार्य करने का आवाहन किया।

इससे पूर्व कुलपति श्री शरद पारधी ने कहा कि आदर्शों के प्रति सघन निष्ठा के साथ गुरु के प्रति अटूट विश्वास व ज्ञान प्राप्ति की सतत रुचि ही उत्तम विद्यार्थी बनाता है। प्रति कुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि युगद्रष्टा पूज्य गुरुदेव की परिकल्पना कि देश में ऐसे विवि हो, जो विद्यार्थियों को न केवल साक्षर बनाये, वरन् उसके जीवन में सार्थकता लाने, नैतिक मूल्यों के विकास, स्वावलंबी बनाने की शिक्षा दे सकें, इन्हीं विधाओं को लेकर यह विवि निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर है।

इस अवसर पर कुलाधिपति डॉ. पण्ड्याजी, पतंजलि विवि के कुलपति आचार्य बालकृष्ण व अन्य मंचासीन अतिथियों ने ज्ञान प्रभा, देवसंस्कृति इंटरनेशनल जनरल, संस्कृति संचार के नवीन अंक एवं - न्यूज लेटर रेनासा का विमोचन किया। ज्ञानदीक्षा का वैदिक कर्मकाण्ड श्री सूरज प्रसाद शुक्ल ने कराया तो वहीं कुलाधिपति ने ज्ञानदीक्षा के संकल्प सूत्र दोहरवाये। कुलाधिपतिडॉ. पण्ड्याजी  ने आचार्य बालकृष्ण को युगसाहित्य, देसंविवि के प्रतीक चिह्न एवं उपवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर कुलसचिव श्री संदीप कुमार, डॉ ओपी शर्मा, श्री कालीचरण शर्मा, श्री महेन्द्र शर्मा सहित विवि परिवार के अलावा विभिन्न राज्यों के नवांगतुक छात्र- छात्राएँ, गायत्री विद्यापीठ के शिक्षक- शिक्षिकाएँ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। 




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