Published on 2016-01-21

छत्तीसगढ़ का चतुर्थ प्रान्तीय युवा सम्मेलन २५ से २७ दिसम्बर की तारीखों में भिलाई के पुलिस ग्राउण्ड, सेक्टर ६ में 'युवा छत्तीसगढिय़ा, गढ़ेंगे भारत बढिय़ा' के उद्घोष के साथ सम्पन्न हुआ। गायत्री परिवार के युवा नायक आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने उपस्थित ७००० युवक-युवतियों को आत्मबोध कराते हुए कहा-''छत्तीसगढ़ में मणि-माणिक्यों की कमी नहीं है। आप में छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश को बदलने की सामथ्र्य है।"
आदरणीय डॉ. साहब ने सृजनशील तरुणाई का पथ प्रदर्शन करते हुए कहा कि आप में हनुमान् और शबरी जैसी पवित्रता और गुरुभक्ति है। यदि आप उसे पहचान लें, तो संस्कृति की सीता को असुरों के चंगुल से निकाल कर छत्तीसगढ़ को देश का आदर्श राज्य बना सकते हैं। आवश्यकता बस अपने को पहचानने की है। 
तीन दिवसीय शिविर में युवा पथ प्रदर्शन करने शांतिकुंज से आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी के अलावा युवा प्रकोष्ठ छत्तीसगढ़ जोन प्रभारी श्री गंगाधर चौधरी, प्रभारी श्री के.पी. दुबे, श्री आशीष सिंह, श्री जयराम मोटलानी, श्री शांतिलाल पटेल उपस्थित थे। तीन दिन तक हुए विचार मंथन में छत्तीसगढ़ को नशामुक्त, नीतिवान, हराभरा, स्वच्छ-स्वावलम्बी प्रदेश बनाने का आह्वान किया गया। व्यक्तित्व परिष्कार के लिए गर्भ संस्कार समारोह आयोजित करने और बाल संस्कार शाला चलाने पर विशेष बल दिया गया। 
आदरणी डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने इस संदर्भ में युवाओं को बहुमूल्य सूत्र भी दिये। उन्होंने कहा कि अपनी वासना, तृष्णा, अहंता, यश की कामना जैसे मनोविकारों पर विजय प्राप्त करने वाले ही हनुमान हो सकते हैं। यह साधना से ही संभव है। परम पूज्य गुरुदेव ने २४ वर्ष तक जौ की रोटी खाकर कठोर गायत्री साधना करते हुए अपने को वज्र जैसा बना लिया है। हमारे कार्यकत्र्ताओं को भी साधना से अपने मन पर विजय प्राप्त करनी चाहिए। उन्हें बीमारू मानसिकता का, निराशावादी, दूसरों में ही दोष देखने वाला नहीं होना चाहिए। 
युवा सज्जन हों, सादगीपूर्ण जीवन जियें। अपने मन की ही सुनें और अपने जीवन से दूसरों के लिए आदर्श बनें। 

आप में हनुमान् और शबरी जैसी पवित्रता और गुरुभक्ति है। यदि उसे पहचान लें, तो संस्कृति की सीता को असुरों के चंगुल से मुक्त कर छत्तीसगढ़ को देश का आदर्श राज्य बना सकते हैं। जरूरत है तो बस अपने को पहचानने की।     - आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी

दिखाई दी युवा युग सृजेताओं की गौरव गरिमा
प्रस्तुत प्रान्तीय युवा सम्मेलन में आरंभ से लेकर अंत तक युवा मन में समाहित नवसृजन का उल्लास दिखाई देता रहा। पूरे समारोह स्थल को आकर्षक रंगोली, पताकाओं से सजाया गया था। विशाल युग साहित्य और सप्तक्रांति प्रदर्शनी लगायी गयी थी। आदरणीय डॉ. साहब ने २५ दिसम्बर को ध्वजारोहण और मशाल प्रज्वलन के साथ जोश-उल्लास से भरे जय-जयकारों के बीच इस सम्मेलन और प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। छत्तीसगढ़ के प्रमुख कार्यकत्र्ता एवं गणमान्यों ने अपने आदर्श युवा पथ प्रदर्शक आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी का मंच पर हार्दिक स्वागत-अभिनंदन किया। 
युग सृजेताओं की गौरव गाथा - आरंभ में छत्तीसगढ़ में अब तक हुए कार्यों की जानकारी दी। प्रांतीय प्रतिनिधि श्री ओम प्रकाश राठौर ने बताया कि गतवर्ष २१५ कार्यक्रमों के माध्यम से ४५००० युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमेें से १५५६ मिशन के सक्रिय सदस्य बने।१४२ युवा मण्डल बने और १० स्थानों पर नारी जागरण कार्यशालाएँ हुईं। 
प्रांत में तीन पं. श्रीराम शर्मा आचार्य स्मृति उपवन बनाये गये और ९ निर्माणाधीन हैं। १६००० से अधिक वृक्ष लगाये गये हैं। १०२ तालाबों की सफाई की गयी। १५ आदर्श गोशालाओं के माध्यम से जैविक कृषि एवं स्वास्थ्य, स्वावलम्बन आन्दोलन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। श्रीमती उषा किरण, डॉ. पी.एल. साव आदि ने भी अपने उपजोन/क्षेत्र के विशिष्ट प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किये। 
संगठन का प्रभाव - युवा शिविर की सफलता संगठित प्रयासों पर आधारित थी। इसमें सर्वश्री एस.पी. सिंह, धीरज लाल टाक, रामस्वरूप साहू, आनंदी सिन्हा, लोकनाथ साहू, एस.सी. पाटले, झड़ीराम देवांगन, रामकुमार साहू, गिरिधारीलाल साहू, एस.डिल्ली राव, श्रीमती उषाकिरण, राजेन्द्र तिवारी, के.के. विनोद, दिलीप पाणिग्रही,  के.के. बेलचन्दन, एस.सी. पाटले, ए.आर. मेश्राम ने अपना विशिष्ट योगदान देते हुए अलग-अलग दायित्व संभाले। लगभग ५०० कार्यकत्र्ताओं के अथक परिश्रम और भावभरी सेवाओं से यह शिविर प्रत्येक प्रतिभागी के अंतस् पर अमिट छाप छोडऩे में सफल रहा। 
स्मारिका विमोचन - सम्मेलन की स्मृतियाँ बनाये रखने के लिए स्मारिका 'शंखनाद' एवं 'कर्म का विज्ञान' का विमोचन आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी द्वारा किया गया। 

कुछ मुख्य बातें
  • गुलामी की मानसिकता से उबरें, सेवाधर्म अपनाते हुए सुखी जीवन जियें।
  • 'सादा जीवन, उच्च विचार' की नीति अपनाते हुए अपने जीवन से समाज को प्रभावित करें। 
  • गर्भ संस्कार व बाल संस्कार शालाओं द्वारा बचपन से ही व्यक्ति निर्माण का अभियान आरंभ हो। 
२०१६ में छत्तीसगढ़ के आदर्श विकास के लिए उभरे संकल्प

  • पर्यावरण - ६३४७ वृक्षारोपण, ६४१ हरित सरोवर,  ६७ श्रीराम स्मृति उपवन, 
  • संगठन - २०२० युवा मण्डल,  ८७८ दिया समूह का गठन, 
  • समयदान - ५३२ राम-लक्ष्मण की जोड़ी निकलेंगी   
  • युवा जागरण शिविर - ८८८ एक दिवसीय, ११३ तीन दिवसीय, १७१ पंच दिवसीय 
  • नारी जागरण- २२९ नारी जागरण कार्यशाला, १२४ कन्या कौशल शिविर,
  • सामाजिक विकास - ९२ आदर्श ग्राम, 
  • १३३० व्यसन मुक्ति आन्दोलल, 
  • ४७० बाल संस्कार शाला
  • पत्रिका सदस्यता -१०३७५ अखण्ड ज्योति पत्रिकाएँ, १५२३० युग निर्माण योजना, १०२५ प्रज्ञा अभियान 
मीडिया का शानदार योगदान रहा
छत्तीसगढ़ के प्रांतीय युवा चेतना शिविर की सफलता में स्थानीय मीडिया का अत्यंत प्रशंसनीय और अविस्मरणीय योगदान रहा। आईबीएन-७ आदि कुछ प्रांतीय चैनल कई दिन पूर्व से ही स्क्रोलिंग के माध्यम से कार्यक्रम की सूचना लोगों तक पहुँचा रहे थे। पंद्रह दिन पूर्व से ही प्राय: प्रत्येक समाचार पत्र में युवा चेतना शिविर की तैयारियों से लेकर कार्यक्रम के समाचार विस्तार से छाये रहे। आईबीएन-७ और दूरदर्शन ने आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी का साक्षात्कार लिया, जिसे बाद में दिखाया गया। शांतिकुंज मीडिया की ओर से श्री संतोष सिंह, नरेन्द्र पाटीदार और श्री खिलावन सिन्हा ने हर पल के समाचार इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुँचाये। 


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