Published on 2016-01-21

आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने खगडिय़ा में आयोजित प्रांतीय युवा चेतना शिविर में युगसृजेताओं का किया आह्वान

सेवा-साधना की मानसिकता के धनी बिहार के युग निर्माणी युवाओं की शिक्षा-संस्कार विस्तार के क्षेत्र में उपलब्धियाँ अद्वितीय हैं। लगभग ७० हजार युवाओं का एक विशाल संगठन समाज के चिंतन-चरित्र को बदलने में पूरी तन्मयता से जुटा है। २७, २८ एवं २९ नवम्बर में खगडिय़ा में सम्पन्न हुआ प्रांतीय युवा चेतना शिविर इन्हीं होनहार युवाओं को भावी सक्रियता की दिशा और अकूत ऊर्जा प्रदान करने वाला था। 
आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी शिविर के प्रमुख पथ प्रदर्शक थे। उन्होंने युवाओं से अध्यात्म-पथ पर साहसपूर्वक कदम बढ़ाने और युग की चुनौतियाँ स्वीकार करने का आह्वान किया। 
जोन समन्वयक शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री कालीचरण शर्मा जी ने आगामी 'युवा क्रांति वर्ष-२०१६' की सक्रियता के संदर्भ में मार्गदर्शन किया। युवा प्रकोष्ठ प्रभारी श्री के.पी. दुबे ने आज भी चली आ रही अंग्रेजों की गुलामी जैसी मानसिकता से उबर कर सही मायनों में देश, नगर, गाँवों को स्वाधीन बनाने के संकल्प जगाये। युवा प्रकोष्ठ प्रतिनिधि श्री आशीष सिंह, श्री मनीष चौरिया के उद्बोधन निर्मल गंगा जन अभियान, वृक्षगंगा अभियान जैसे मिशन के महत्त्वपूर्ण आन्दोलनों में युवा सक्रियता को प्रोत्साहित करने वाले थे। 
आदरणीय डॉ. साहब के सहयोगी श्री कालीचरण शर्मा, श्री सूरज प्रसाद शुक्ल, पूर्वी जोन समन्वयक श्री रामयश तिवारी, श्री बी.डी. पाण्डेय, श्री विजय शर्मा की उपस्थिति उत्साहवर्धक रही। 
शांतिकुंज से पधारे युग गायकों सर्वश्री ओंकार पाटीदार, बसंत यादव ने अपने ओजस्वी गीतों से श्रोताओं को रोमांचित कर दिया। श्री संतोष सिंह, खिलावन सिन्हा की वीडियोग्राफी-फोटोग्राफी कार्यक्रम को चिर स्मरणीय बनाये रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी। 
भावी सक्रियता के संकल्प उभारने के लिए आयोजित हुई समूह चर्चाओं ने उभरती तरुणाई को आत्ममंथन करने का अवसर प्रदान किया। उल्लेखनीय संकल्प उभरे। 

आत्म जागृति की ओर अग्रसर हों युवा -आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी
  • बिहार बुद्ध, महावीर, सम्राट अशोक, चाणक्य को आत्मबोध कराने वाली पावन भूमि है। इस क्षेत्र की पावनता को देखकर मैं गद्गद हो जाता हूँ। इस क्षेत्र से त्यागी, बलिदानी, हनुमान, अर्जुन नहीं निकलेंगे तो कहाँ से निकलेंगे? मैं चाहता हूँ कि समाज बदले, देश बदले, गुरुदेव के युग निर्माणी संकल्प को साकार करने का सौभाग्य फिर एक बार इस देवभूमि को मिले। 
  • गीता में श्रीभगवान अर्जुन से कहते हैं, ''इस विषम समय में तुझे निराशा, नपुंसकता का रोग कहाँ से लग गया। यह तुझे शोभा नहीं देता।" यही स्थिति आज के अर्जुनों में भी दिखाई देती है। वह संसार के भोगों और रोगों में फँसा दिखाई देता है। 
  • मैं भगवान श्रीकृष्ण के प्रतिनिधि के रूप में आपसे आह्वान करता हूँ। अपने हृदय की दुर्बलता को त्यागो। आशीर्वाद की कामना, स्वार्थ-संकीर्णता की मानसिकता तुम्हें शोभा नहीं देती। अपनी शक्तियों के प्रति प्रचण्ड आत्म विश्वास जगाइये। संस्कृति की सीता को खोजना आपका काम है।
  • बुद्ध की करुणा, महावीर की अहिंसा, भगवान श्रीकृष्ण की गीता और परम पूज्य गुरुदेव के विचार ही सारे विश्व में छायी विषाक्तता का उपचार है। गुरुदेव के विचारों को पढिय़े। महापुरुषों के सान्निध्य में कामनाएँ, वासनाएँ शांत होकर आत्मा को तृप्ति प्रदान करती हैं। 
  • हनुमान की तरह अपनी सामथ्र्य को पहचानो। परम पूज्य गुरुदेव की अनंत शक्ति सदैव तुम्हारी सहायता के लिए उपलब्ध है। जो भगवान का काम करेगा, उसे भगवान का सहयोग सदा मिलता रहेगा। अपव्ययों से, फैशन से, व्यसनों से, कुरीतियों से, मोबाइल में समय गँवाने की मानसिकता से लडऩा होगा। मन ही सबसे बड़ा मित्र और मन ही सबसे बड़ा शत्रु है। मन पर विजय हासिल करने वाले ही महामानव होते हैं।
  • आज के युवा उन्हें अपना आदर्श मानते हैं जो संसार की ओर देखते हैं। उन्हें शंकराचार्य, ज्ञानेश्वर, विवेकानन्द जैसे उन महापुरुषों का  अनुसरण करना चाहिए जो अपनी आत्मा का अनुसरण करते हैं।  

यौवन की सार्थकता चुनौतियों से ही सिद्ध होती है -श्री कालीचरण शर्मा जी
यौवन जीवन का वसंत है। यह सक्रियता और साहसिकता का पर्याय है। यदि महान बनने और ऊँचा उठने की चाह है तो उसे इसी वय में पूरा करी करने के लिए तत्पर हो जाना चाहिए। 
जो जवानी चुनौतियों का सामना करते हुए न बीते वह जवानी कैसी? संघर्ष नहीं है तो यौवन की परीक्षा नहीं हो सकती। युवा वह है जो समाज की तमाम चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहता है, समाज का उपकार करने के लिए ही नहीं, अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए भी। 
आज के युवाओं के समक्ष अनेक समस्याएँ हैं। उन्हें तरह-तरह की कुरीतियों से, व्यसनों से लडऩा है। हममें से प्रत्येक को यह सोचना चाहिए कि क्या हम स्वयं दहेज रहित विवाह करने और ऐसा ही विवाह अपने बच्चों के कराने का संकल्प ले सकते हैं। क्या सफाई, जल संरक्षण, नारी उत्कर्ष, बाल संस्कार शाला जैसे सृजनात्मक कार्यों में सक्रिय सहयोग दे सकते हैं। यदि यह करने का आप संकल्प लेते हैं तो यह शिविर सार्थक हो जायेगा। 
जीवन में सकारात्मकता, सृजनात्मकता के विकास के लिए मन को अधोगामी चिंतन से बचाकर नियमित स्वाध्याय के माध्यम से उदात्त चिंतन अपनाने का अभ्यास जरूरी है। युवाओं को अपनी शक्ति के बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए संगठन की मर्यादा और अनुशासन का भी निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए। 

विशिष्ट झलकियाँ
  • बेगूसराय के जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री कृष्ण गोपाल द्विवेदी, श्री पुष्पेन्द्र पाण्डेय-जुडिशियल मजिस्ट्रेट बेगूसराय, डॉ. बृजकिशोर सिंह-जिला शिक्षा अधिकारी, श्री रविशंकर कुमार-एस.पी. ऑपरेशन हाजीपुर दीपयज्ञ के अवसर पर पधारे। 
  • यह ३८ जिलों का सम्मेलन था, जिसमें लगभग तीन हजार युवाओं ने भाग लिया। 
  • दीपयज्ञ के अवसर पर पूरे बेगूसराय जिले और आसपास की प्राय: सभी शिक्षण संस्थाओं के १५-१५ प्रतिनिधि दीपयज्ञ में भाग लेने आये। 
  • इस संगठन से पूरे बिहार के लगभग ७० हजार युवक जुड़े हैं। इन्हें सेवा और साधना के संस्कार प्रदान करना संगठन का मुख्य ध्येय है, जिसकी बानगी शिविर में भी दिखाई दी। 
  • शिविर स्थल की सफाई एवं निर्माण कार्य में युवक-युवती प्रात:काल से ही लग जाते थे। महत्त्वपूर्ण यह है कि उन्होंने काम भरपूर किया, पर उपासना किसी ने नहीं छोड़ी। उपासना के लिए वे एक-डेढ़ घंटा पहले ही जाग जाते थे। 
  • आदरणीय डॉ. साहब के सान्निध्य का अधिकाधिक लाभ शिविरार्थियों को मिले, इस बात का ध्यान रखते हुए उनके आवास का स्थान बदलकर समीप ही सिंचाई विभाग के निरीक्षण केन्द में कर दिया गया। स्वच्छता संतोषजनक नहीं थी। अत: कई युवाओं अतिरिक्त सेवाएँ देकर इसे साफ किया उन्होंने आवास क्षेत्र ही नहीं, पूरे बंगले को रगड़-रगड़ कर इतना साफ कर दिया कि उसे देखने वाले लोग लम्बे समय तक याद करेंगे। 
  • अकेले पटना शहर में युवा प्रकोष्ठ २८ बाल संस्कार शालाएँ चलाता है, जिसका लाभ ४००० विद्यार्थियों को मिलता है। उच्च शिक्षण संस्थानों में पढऩे वाले १००-१२५ नवयुवक इनका संचालन करते हैं। 
  • बाल संस्कार शालाओं के सभी संचालक शिविर में आये। इन्हीं संस्कार शालाओं में पढऩे वाले बच्चों ने आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये। 
  • प्रांतीय युवा संगठन के प्रमुख प्रतिनिधि सर्वश्री मनीष कुमार, अरुण जायसवाल, अरविंद हिमांशु, आमोद कुमार, अमित जी, राजेन्द्र सर्राफ, डॉ. जितेन्द्र विद्यार्थी,भोला गुप्ता, जगदीश फोगला, सागर प्रसाद,  आदि के अथक परिश्रम ने शिविर को शानदार सफलता प्रदान की। 


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