Published on 2016-01-27

देवसंस्कृति विवि के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्डयाजी ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर हमें आत्म मूल्यांकन करना चाहिए कि भारत के आमजन गण तंत्र से क्यों नहीं जुड़ पाये। आजादी के दिवानों को याद करते हुए कहा कि उनकी शहादत से हमें सीख लेनी चाहिए, जिन्होंने न अपनी सुख चैन देखी और न ही अपना परिवार। उनके दिमाग में केवल एक ही चीज थी और वह है देश।

कुलाधिपति डॉ पण्ड्याजी ६७वाँ गणतंत्र दिवस के मौके पर देसंविवि में आयोजित एक सभा को संबोधित कर रहे थे। गणतंत्र दिवस के पूर्व संध्या में अण्डमान निकोबार से वीर शहीदों के स्मारक को नमन कर लौटे कुलाधिपति ने कहा कि भारत के वीर सपूत हमारे अग्रजों ने जिस तरह आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछाकर कर दिया है, उसे हमें यूँ ही नहीं गंवानी चाहिए। युवाओं को आवाहन करते हुए उन्होंने कहा कि इन दिनों युवा शक्ति की ही देश को सबसे ज्यादा जरूरत है, वे आगे बढ़कर देश की कमान संभाले। इसके साथ ही डॉ पण्डया ने सरहद की सुरक्षा में जुटे सैनिकों के साहस एवं कर्त्तव्यनिष्ठा को याद करते हुए उनसे राष्ट्रभक्ति की सीख लेने की बात कही।

इससे पूर्व शांतिकुंज परिसर में संस्था की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैल दीदी एवं देवसंस्कृति विवि के कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या तथा गायत्री विद्यापीठ में व्यवस्थापक श्री गौरी शंकर शर्मा ने राष्ट्र ध्वज फहराया। देवसंस्कृति विवि में संविधान की रक्षा करते हुए राष्ट्र की उन्नति का संकल्प के साथ ६७वां गणतंत्र दिवस मनाया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने च्आंधियों के बीच क्रांति की मशाल जलाये जाज् नामक लघुनाटिका से समाज में सुरसा की तरह मुंह फैलाये भ्रष्टाचार, अन्याय, अनीति के खिलाफ युवाओं को उठ खड़े होने का आवाहन किया, तो वहीं उठ थाम लें तिरंगा.. आदि नृत्य नाटिका से सरहद में तैनात सैनिकों के साहस को उकेरा।

पत्रकारिता के छात्र विवेक पाण्डेय की टीम ने शिक्षा का अधिकार एवं सूचना के अधिकार विषय पर आधारित नाटिका के माध्यम से जनमानस में जागरुकता फैलाने पर जोर दिया। इसके साथ ही शांतिकुंज कार्यकर्ताओं एवं देसंविवि-गायत्री विद्यापीठ के विद्याथर््िायों ने भी राष्ट्रीय प्रेम से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। जिनमें वासंती उल्लास के साथ वीर सैनिकों की कहानियों एवं घटनाक्रमों आदि प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों में ठंड की ठिठुरन में उल्लास भरकर गरमी का अहसास कराया। इस अवसर पर प्रसिद्ध शिक्षाविद डॉ माहेश्वरी, कुलपति श्री शरद पारधी, प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या, कुलसचिव श्री संदीप कुमार सहित देसंविवि, शांतिकुंज परिवार, गायत्री विद्यापीठ सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।



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