Published on 2016-02-10
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भारत भर में कई तीर्थ व देवालय हैं, जहां देसी- विदेशी पर्यटकों व दर्शनार्थियों की भीड़ बाहर महीने लगी रहती है। इन यात्राओं में यात्री फोटोगाफी, वीडियो, शॉपिंग वगैरह से अपनी यात्रा को यादगार बनाने का भी प्रयास करते हैं। ये पर्यटक या तीर्थयात्री जहां जाएं, वहां एक पौधा लगाकर भी अपने गंतव्य को यादगार बना सकते हैं।

तीर्थ नगरी हरिद्वार स्थित गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय ने इस यात्रा के यादगार को एक नई दिशा देते हुए एक अनोखी शुरुआत की है। यहां आने वाले यात्रियों से एक- एक पौधा लगाकर अपनी यात्रा की निशानी छोड़ जाने व अपने स्थानों में रोपने के लिए यहां से यादगार के रूप में पसंदीदा पौधे ले जाने का आग्रह किया जाता है।

पौधरोपण से एक ओर जहां पर्यावरण संरक्षण को मदद मिलती है, वहीं यात्रा- पर्यटन के यादगारों का सार्थक योगदान भी हो जाता है। तीर्थयात्रा या पर्यटन में जहां- तहां के पसंदीदा दृश्य कैमरे में कैदकर या खुद का फोटो खिंचवाकर स्मृति संजोये चलने के साथ- साथ एक- एक पौधा भी यदि लगाते चला जाए तो यात्रा को सार्थक बनाने वाले बहुत ही बेहतर यादगार संजोये जा सकते हैं।

तीर्थयात्री यदि हर तीर्थस्थल में एक- एक तरु- रोपण कर धरती मां को हरी चूनर पहनाना शुरू कर दें तो आज जो समग्र विश्व में ग्लोबल वार्मिग का खतरा बढ़ता जा रहा है, उससे काफी हद तक निजात मिल सकती है।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय या शांतिकुंज के दर्शनार्थ या शिविरों में आने वाले श्रद्धालु, प्रशिक्षुओं तथा वीआईपीओं को तीर्थयात्रा के यादगार के रूप में पौधे की प्रसादी देने का अनूठा प्रयोग वर्ष 2000 से निरंतर चल रहा है। शांतिकुंज या देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में आने वाले हर नवागंतुकों से एक- एक पौधा लगवाया जाता है।

इस क्रम में जन साधारण से लेकर गणमान्य लोगों द्वारा भी पौधरोपण किए जा चुके हैं, जिनमें विश्व हिंदू परिषद के डॉ. अशोक सिंघल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुरु महर्षि दयानंद जी, श्री श्री रविशंकर, वेंकट रमण, महामंडलेश्वर स्वामी सत्यमित्रानंद जी सहित अनेक धार्मिक जगत के लोगों ने देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिसर में पौधे लगाकर अपनी यादें संजोए हैं।

वर्ष 2004 में प्रथम दीक्षांत के समय तत्कालीन उप राष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत ने भी पौधा लगाया गया था जो आज 10 फीट की ऊंचाई को छू रहा है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ भारत के ही विभिन्न राज्यों से आए लोग धरती मां को हरी चादर ओढ़ा रहे हैं, बल्कि इसमें विदेशों के नागरिक भी शामिल हैं।

जापान, अमेरिका, रूस, इटली सहित दुनियाभर से आए आगंतुकों ने भी देवभूमि में पौधे लगाकर अपनी यादों को संजोया है। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय बनने से लेकर अब तक 51 से अधिक गणमान्य महानुभाव यहां अपनी यादों को सेजो चुके हैं तथा गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की याद में अब तक 1 करोड़ पौधे लगाकर उनके लालन पालन का कार्य परिजनों के नेतृत्व में किया जा रहा है।

हरिद्वार आने वाले दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं को अब तक विभिन्न 'तरु' प्रसाद रूप में दिए जा चुके हैं।

विशेषज्ञों की मानें तो एक पेड़ को काटने से सीधा 45 लाख रुपये का नुकसान होता है। दरअसल, एक पेड़ अपने पचास साल के जीवन में हमें 45 लाख रुपये का लाभ पहुंचाता है। इमारतों के लिए लकड़ी से लेकर फल, फूल, ऑक्सीजन तक हर कदम पर हमें पेड़ों का फायदा मिलता है। पेड़ ही हैं जो वातारण में संतुलन बनाए रखने का काम करते हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि मनुष्य जीवन के लिए सबसे जरूरी ऑक्सीजन भी हमें पेड़ों से ही मिलती है। 


इंडो- एशियन न्यूज सर्विस।   


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