Published on 2016-02-13

अंदर की वासंती उल्लास जगाने वाला पर्व वसंत : शैलदीदी
हिन्दी, बंगला व पंजाबी भाषा की २० पुस्तकों तथा मोबाइल एप ‘ ऋषि चिंतन ’ का लोकार्पण
युवाक्रांति वर्ष सहित कई भावी योजनाओं की हुई घोषणा
हर्षोल्लास के साथ मनाई गयी वसंत पंचमी व आचार्यश्री का आध्यात्मिक जन्मदिवस 


अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि मनुष्य को आंतरिक उत्साह, उमंग से भरा- पूरा होना चाहिए। युवा को किसी उम्र सीमा में नहीं, वरन् युवा होने का उत्साह, उमंग कार्यशैली व आचरण में झलकता है।

डॉ. पण्ड्याजी गायत्री परिवार के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिकुंज में वसंतोत्सव के मुख्य कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि युवाओं को बलिष्ठ, शालीन, गतिशील, सदा सक्रिय, राष्ट्र प्रेम व करुणा की भावनाओं से ओतप्रोत होना चाहिए, तभी ऋषि- मुनियों की तरह उनके अंदर में वसंत खिला रहेगा। युगऋषि पं श्रीराम शर्मा आचार्यश्री, स्वामी विवेकनंद, आदिगुरु शंकराचार्य आदि महापुरुषों के संस्मरणों को याद करते हुए डॉ पण्ड्याजी ने कहा कि उन्होंने वासंती उत्साह के साथ जीवन भर युवाओं की तरह कार्य किये, तभी वे समाज के लिए आदर्श बने।

गायत्री परिवार प्रमुख डॉ पण्ड्याजी ने वर्ष २०१६ को युवा क्रांति वर्ष की घोषणा की। साथ ही उन्होंने वर्ष भर के लिए युवाओं को सामाजिक बुराइयों से लड़ने, विधेयात्मक चिंतन देने, राष्ट्र के विकास में सहयोग करने, युग प्रवक्ताओं का प्रशिक्षण शिविर चलाने, जन जागरण के केन्द्र के रूप में प्रज्ञा संस्थानों को विकसित करने, शैक्षणिक संस्थानों में युवा मंडल का गठन कर भारतीय संस्कृति से जोड़ने, दिव्य भारत के गठन में युवाओं की भागीदारी करने जैसे कार्यक्रम दिये। तो वहीं पतित पावनी गंगा को निर्मल बनाये रखने, पर्यावरण संरक्षण के तहत वृक्षागंगा अभियान को गति देने के लिए युवाओं का आवाहन किया। साथ ही देश भर में युवाओं को सकारात्मक दिशा के लिए स्थान- स्थान पर एक से तीन दिवसीय युवा जागरण शिविर चलाये जायेंगे ताकि युवाशक्ति की ऊर्जा को वायु की गति प्रदान की जा सके।

संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने कहा कि वसंत आंतरिक उत्साह और उमंग को जगाने वाला पर्व है। इसी दिन गायत्री परिवार के जनक पूज्य आचार्यश्री के जीवन में उत्साह, उमंग जागा, और उन्होंने इसे जीवन पर अपने अंदर कायम रखा। तभी वे ८० वर्ष की आयु में भी युवा की तरह कार्य करते रहे। तुलसीदास आदि को याद करते हुए कहा कि सिखने- सिखाने के लिए कोई उम्र बाधा नहीं बनती है। शैलदीदी ने युवापीढ़ी को आत्मबल बढ़ाने के लिए नियमित रूप से साधना, उपासना एवं आराधना करने पर जोर दिया।

इससे पूर्व विद्या की देवी माँ सरस्वती व पर्व पूजन वैदिक कर्मकाण्ड के साथ सम्पन्न किया। कर्मकाण्ड डॉ इंद्रेश पथिक व जितेन्द्र मिश्र ने सम्पन्न कराया। इस अवसर शैलदीदी व डॉ पण्ड्याजी ने हिन्दी, बंगला, पंजाबी के बीस पुस्तकों का विमोचन किया। साथ ही उन्होंने मोबाइल एप ‘ऋषि चिंतन’ का भी लोकार्पण किया। ब्राह्ममुहूर्त में प्रमुखद्वय ने सैकड़ों परिजनों को गायत्री महामंत्र की दीक्षा दी। सायंकालीन सभा में बहिनों ने भव्य दीपमहायज्ञ सम्पन्न कराया, जिसमें हजारों लोगों ने पतित पावनी गंगा को निर्मल एवं हरिद्वार की गरिमा को अक्षुण्ण बनाये रखने तथा वर्ष भर चलने वाले विभिन्न आन्दोलनों के तहत देवसंस्कृति विवि व गायत्री परिवार के हजारों युवाओं ने समाज के विकास में तन, मन, धन से जुटने का संकल्प लिया। इस अवसर पर देसंविवि, ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान व गायत्री परिवार के देश- विदेश से आये कई हजार लोग उपस्थित थे। 

गायत्री तीर्थ में वसन्त पर्व पर हुए अनेक संस्कार

शांतिकुंज के निर्देशन में आदर्श संस्कार परंपरा अब द्रुतगति से बढ़ रही है। वसंत पंचमी के पावन अवसर पर गायत्री तीर्थ में पुंसवन, नामकरण, विद्यारंभ आदि अनेक संस्कार सम्पन्न हुए। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत के पुत्र आनंद रावत अपने बेटे चि. शिवाय का भी मुण्डन संस्कार गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में सम्पन्न कराया। इस दौरान मुख्यमंत्री के परिवारीजन उपस्थित होकर यज्ञ में शामिल हुए। तो वहीं २० आदर्श विवाह संस्कार सामूहिक रूप से सम्पन्न कराये गये। 



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