Published on 2016-03-15

युगतीर्थ शांतिकुंज पूरे देश की युवाशक्ति में छायी वासंती उमंगों की झलक-झाँकी पाकर धन्य हो गया। इस तपोभूमि की ऊर्जा और गुरुचेतना के प्रखर प्राण प्रवाह के सान्निध्य में धन्य हो गये देशभर से आये वे युवा कर्णधार, जिनसे गुरुदेव-माताजी को संस्कृति की सीता को खोजने, असुरता को परास्त कर सतयुग की स्थापना के कार्य में सहयोगी बनने की बड़ी आशाएँ हैं। 4 से 6 मार्च 2016 की तारीखों में आयोजित राष्ट्रीय युवा कार्यशाला में हुए विचार मंथन और उभरे संकल्पों से उत्साहित प्रत्येक प्रतिभागी का यही कहना था कि ऐसी कार्यशालाएँ उनके उत्साह और सक्रियता को नयी ऊर्जा प्रदान करती हैं। कार्यशाला को आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी, आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी, आदरणीय श्री गौरीशंकर शर्मा जी, डॉ. चिन्मय जी के अलावा डॉ. ओ.पी. शर्मा, श्री अशरण शरण श्रीवास्तव, युवा प्रकोष्ठ प्रभारी श्री के.पी. दुबे, श्री दिनेश पटेल, श्री कामता प्रसाद साहू, आशीष सिंह ने विविध विषयों से संबोधित किया। श्री गंगाधर चौधरी कार्यशाला समन्वयक थे। 

युवाओं की सोच बदलनी होगी: आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी 
साधन, सुविधाओं के अंबार के बावजूद सही मायनों में समाज का विकास तब तक संभव नहीं, जब तक लोगों में नैतिक, सामाजिक दायित्वों के प्रति जगारूकता न हो। विचार क्रांति अभियान आज की सर्वोपरि आवश्यकता है। युवा क्रांति वर्ष का लक्ष्य है युवा चेतना का जागरण, तमाम भटकावों से बचाकर उनकी सामथ्र्य का सृजनात्मक कार्यों में नियोजन। 

युवाओं में चाहिए हनुमान जैसी भक्ति, शक्ति, अनुशासन : आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी 
देश के युवा राष्ट्र की कुण्डलिनी महाशक्ति है, जिनका जागरण स्वयं महाकाल कर रहा है। युवाओं के आदर्श हनुमान हों, जिनमें अतुलित बल है, अपने आराध्य के प्रति अकूत भक्ति है और अनुशासन है। 

स्वयं सँभलें, औरों का भविष्य सँवारें: आदरणीय श्री गौरीशंकर शर्मा जी 
युवावस्था अपने साथ सौन्दर्य, आशा, उमंग, जोश, उत्साह ही नहीं लेकर आती, वरन् मनुष्य के भाग्य और भविष्य का निर्माण भी इन्हीं दिनों होता है। यह वह गीली मिट्टी है जिसे मनचाहे आकार में ढाला जा सकता है। अच्छे विचार और अच्छे संस्कारों से जीवन और राष्ट्र का भविष्य सँवारने की यही सर्वोत्तम वेला है। 

भगवान की अपेक्षाओं की उपेक्षा ठीक नहीं: डॉ. चिन्मय पण्ड्या
निरन्तर हावी होती जा रही असुरता को परास्त करने के लिए भगवान ने हमें अपने सहयोगी के रूप में चुना है। उनकी हमसें कुछ विशेष अपेक्षाएँ हैं, जिनकी उपेक्षा करना ठीक नहीं है। सामान्य दिनचर्या से हटकर हमें अवांछनीयताओं के समापन और नवचेतना के जागरण के लिए कुछ समय अवश्य निकालना चाहिए।
 
सफल अभियानों का प्रदर्शन 
विविध क्षेत्रों में कार्यकत्र्ता अपने स्तर पर कई सफल अभियान चला रहे हैं। इनमें से कुछ लोगों ने मंच से अपने अभियान का प्रदर्शन किया। इस क्रम में दिल्ली क्षेत्र के श्री मुकेश सोनी ने साहित्य विस्तार अभियान का, राजस्थान के डॉ. विवेक विजयवर्गीय ने 'युवा जोड़ो अभियान' का और गुजरात के श्री किरीट सोनी ने 'व्यसन मुक्ति अभियान' का प्रदर्शन किया। 

कुछ उल्लेखनीय प्रसंग 
  • आदरणीया जीजी-डॉ. साहब से व्यक्तिगत भेंटवार्ता हुई। उनके स्नेहाशीष पाकर सभी अभिभूत थे।
  • आदरणीय डॉ. साहब सहित वरिष्ठ कार्यकत्र्ता प्रत्येक वर्ग की समूह चर्चा में पहुँचे, शंकाओं का समाधान किया, भावी सक्रियता के संदर्भ में मार्गदर्शन दिया। 
  • पूरे देश के ५०० युवा प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया। 
रचनात्मक सक्रियता के संकल्प 
युवाओं की ऊर्जा को सृजनात्मक कार्यों में नियोजित करते हुए रचनात्मक आन्दोलनों को गति देने के संकल्प भी बड़ी मात्रा में उभरे। इस क्रम में 
  • 374 श्रीराम स्मृति उपवनों के निर्माण, 
  • 486 गाँवों के आदर्श विकास के प्रयास, 
  • 1938 जलस्रोतों की सफाई, 
  • 9932 व्यसनमुक्ति प्रधान आयोजन, 
  • 12736 नई बाल संस्कार शालाओं के संचालन 
  • 629507वृक्षारोपण के संकल्प प्रतिभागी युवाओं द्वारा लिये गये हैं। 
  • हर क्षेत्र में स्वावलम्बन को प्रोत्साहन दिये जाने की योजनाएँ तैयार की गयीं।
युवा जोड़ो अभियान

तीन दिवसीय कार्यशाला में अलग-अलग स्तर पर विचार मंथन हुए। नये युवाओं को अभियान से जोडऩे के साथ उनके व्यक्तित्व का परिष्कार करने के लिए डिवाइन कार्यशालाएँ, एक दिवसीय युवा उत्कर्ष शिविर, पारिवारिक सम्मेलन, नारी जागरण सम्मेलनों के आयोजन के संकल्प उभारे गये। इस क्रम में 'प्रवासी युवा योजना' के अंतर्गत ६४४ युवा तैयार करने और १६९३८ नये युवा मण्डल तैयार करने के संकल्प लिये गये। 


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