Published on 2016-03-29
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विश्वमंच पर हिन्दुत्व को प्रतिष्ठित करने और

समाज के नवनिर्माण के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया

फोंडा (गोवा)

गोवा में १९ से २१ फरवरी की तारीखों में हिंदू धर्म आचार्य सभा का छठवाँ अधिवेशन हुआ। पूरे भारतवर्ष के अनेक गणमान्य संतों ने इसमें भाग लिया। आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने गायत्री परिवार का प्रतिनिधित्व करते हुए हिंदू धर्म को संगठित कर उसकी गौरव गरिमा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने के संदर्भ में विशिष्ट भूमिका निभाई। सभा में भाग ले रहे संतों ने आदरणीय डॉ. साहब का स्वागत करते हुए कहा कि आपके आने से यह सभा समृद्ध हो गयी है।

स्वामी दयानंद आश्रम, ऋषिकेष के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती हिंदू धर्म सभा के समन्वयक थे। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदुत्व को संगठित और प्रतिष्ठित करने में अविस्मरणीय योगदान दिया था। इस कार्य वें वे आदरणीय डॉ. साहब को अपना विशिष्ट सहयोगी मानते थे। उनके महाप्रयाण के पश्चात् पहली बार हिंदू धर्म आचार्य सभा का आयोजन हुआ।

यह अधिवेशन स्वामी दयानंद सरस्वती जी के परम शिष्य स्वामी परमात्मानंद जी की अध्यक्षता में स्वामी ब्रह्मेशानंद जी के आश्रम श्रीक्षेत्र तपोभूमि गुरुपीठ, कुंडई, गोवा में आयोजित हुआ। उत्तर एवं दक्षिण भारत के प्रतिष्ठित संत स्वामी अवधेशानंद, स्वामी रामदेव, स्वामी विश्वेश्वरानंद, स्वामी गुरुशरणानन्द, स्वामी ज्ञानानंद सहित लगभग ६० प्रतिनिधियों ने भाग लिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के श्री चंपतराय जी एवं विहिप के श्री पंकज जी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

सभा के आरंभ में पूज्य स्वामी दयानंद जी को भावभरी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। आचार्य सभा में गंगा- यमुना की निर्मलता में संतों की भूमिका, सुप्रीम कोर्ट के विविध निर्णयों पर प्रतिवेदन, कुंभमेला, आचार्य सभा के स्वरूप, बलपूर्वक धर्मपरिवर्तन, स्वयंसेवी संगठनों को मिलने वाले दान की पारदर्शिता जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने अपने उद्बोधन में हिन्दुत्व के वास्तविक स्वरूप को विश्व के ध्यानाकर्षण में लाने के लिए प्रगतिशील सोच के साथ संगठित होने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस कार्य में युवाओं की विशिष्ट भूमिका होगी। उन्हें इस क्षेत्र से जोड़कर सक्रिय करने के लिए गायत्री परिवार द्वारा इस वर्ष को युवा क्रांति वर्ष घोषित कर विशेष प्रयास किये जा रहे हैं।

राष्ट्रसंघ में हिंदुत्व के स्वर तभी प्रखर होंगे, जब हम प्रगतिशील और वैज्ञानिक आधार वाली विचारधारा के आधार पर समाज के नवनिर्माण में हिन्दुत्व के प्रभाव को प्रतिपादित कर पायेंगे।

समाज के नवनिर्माण के संदर्भ में उन्होंने कहा कि धर्म के प्रति समाज की आस्था सर्वोपरि है। अपने आचार्यों के प्रति लोगों में जो सम्मान है, वह अन्यों के प्रति नहीं। समाज को बदलने में हम अपनी विशिष्ट भूमिका को समझें। हमें उपदेश नहीं, आचरण से समाज का सही मार्गदर्शन करेंगे तो समाज को बदलने में देर नहीं लगेगी।

आदरणीय डॉ. साहब ने विश्व के नवनिर्माण के संदर्भ में परम पूज्य गुरुदेव के अनेक सूत्र प्रस्तुत किये। उन्होंने एक डॉक्यूमेण्ट्री के माध्यम से गंगा, नर्मदा, वाग्मती की निर्मलता, स्वच्छता अभियान, राष्ट्रीय आपदाओं में शांतिकुंज की भागीदारी जैसे अनेक क्षेत्रों में गायत्री परिवार की सक्रियता का दिग्दर्शन कराया। गायत्री परिवार द्वारा चलाये जा रहे निर्मल गंगा जन अभियान का सभी ने बड़े उत्साह के साथ खड़े होकर करतल ध्वनि से स्वागत किया।

गायत्री परिवार की सक्रियता का जो स्वरूप इस सभा में प्रस्तुत हुआ, उसका सभी ने हृदय से सम्मान किया। धर्मधारणा का युगानुरूप स्वरूप उभरा।

कार्यकर्त्ता गोष्ठी

गोवा के कार्यकर्त्ताओं की एक गोष्ठी को भी आदरणीय डॉ. साहब ने संबोधित किया। उन्होंने वर्तमान युग की चुनौतियाँ और युवाओं के दायित्वों की विस्तृत चर्चा करते हुए ‘युवा क्रांति वर्ष’ की योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
 
हिंदू धर्म आचार्य सभा के समन्वयक का दायित्व-

विशिष्टट झलकियाँ

आचार्य सभा के समन्वयक स्वामी दयानंद सरस्वती जी के महाप्रयाण के बाद यह पहली सभा आयोजित हुई। समस्त आचार्यों ने उन्हें भावभरी श्रद्धांजलि दी।

स्वामी दयानंद सरस्वती जी के परम शिष्य- सहयोगी स्वामी परमात्मानन्द जी को आचार्य सभा का समन्वयक नियुक्त किया गया।

दक्षिण के अनेक संत सभा में शामिल हुए। वे पहली बार गायत्री परिवार के विचार और गतिविधियों से अवगत हुए और बहुत प्रभावित भी। दक्षिण भारत में गायत्री परिवार के विस्तार की दृष्टि से यह एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि थी।

विश्वमंच पर हिन्दुत्व की प्रतिष्ठा, गंगा- यमुना की स्वच्छता, कुंभ मेला जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

श्री बलवीर पुज, श्री गुरुमूर्ति जी आदि विद्वानों ने कानूनी एवं अन्य महत्त्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। 


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