Published on 2016-04-08

अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी जी ने कहा कि चैत्र नवरात्रि साधना हेतु उपयुक्त समय है। इन दिनों सामूहिक रूप से एक मन व एक लक्ष्य से की गयी साधना का फल कई गुना होकर मिलता है।

वे गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के मुख्य सभागार में सौम्य नवसंवत्सर (हिन्दी नूतन वर्ष) के अवसर पर गायत्री साधना करने कई देशों से आये हजारों साधकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि साधना ऐसी हो जिसमें प्राण आ जाए। साधना में प्राण हो तो ही कमाल होता है। किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए साधना आवश्यक होती है। साधना भौतिक हो तो आर्थिक क्षेत्र में और आध्यात्मिक हो तो इहलोक- परलोक दोनों सुधर जाता है। उन्होंने कहा कि गायत्री साधना साधक के अंदर प्राण का संचार करता है। अन्दर पात्रता विकसित होने से साधक महत्त्वपूर्ण आयामों को पा लेता है। तन, मन व दृष्टि पवित्र होता है तो वह राग, द्वेष से ऊपर उठने लगता है। उन्होंने कहा कि गायत्री साधना करते हुए युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने ३२०० से अधिक पुस्तक लिखे और अच्छी सोच वाले करोड़ों लोगों को इस दिशा में प्रेरित किया।

डॉ पण्ड्याजी ने कहा कि इन दिनों किये गये जप, तप


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