Published on 2016-05-30
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हरिद्वार 30 मई।


गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में तीन दिवसीय योग प्रशिक्षक प्रशिक्षण शिविर का आज शुभारम्भ हुआ। यह शिविर दुसरे अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व तैयारी के रूप में आयोजित है जिसमें देश भर के गायत्री परिवार के प्रशिक्षक स्तर के हजारों योग- प्रशिक्षक एवं प्रशिक्षणार्थी भाग ले रहे हैं। इन प्रतिभागी प्रशिक्षकों को योग के विशेष प्रशिक्षण के लिए यहाँ बुलाया गया है जो २१ जून को आयोजित होने वाले अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस में देश भर में योग प्रेमियों को योग का प्रशिक्षण देंगे। उससे पूर्व वे स्वयं योग व उसके उद्देश्य के बारे में ठीक से जाने- समझें, उसमें पारंगत हो जाएँ ताकि प्रशिक्षण के उपरांत देश भर में योगप्रेमियों को योग प्रशिक्षण दे सकें।

अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या जी कहते हैं कि विश्व का प्रत्येक मनुष्य योग सिखे, योग को जिये, योग को जीवन का अंग बनाये, इस हेतु उसको योग व उसके उद्देश्य से अवगत होना होगा और इसके लिए उसके पास किसी योग प्रशिक्षक का पहुँचना आवश्यक है। डॉ. पण्ड्याजी के अनुसार गायत्री परिवार ने प्रारम्भ से ही न केवल योग को महत्त्व दिया अपितु व्यावहारिक योग- जिसे प्रज्ञायोग भी कहते हैं- का विधिवत् प्रशिक्षण भी शांतिकुंज में नियमित रूप से दिये जाते रहे हैं और दिये जा रहे हैं। शांतिकुंज में वर्ष भर चलने वाले विभिन्न प्रशिक्षण शिविरों में आने वाले प्रशिक्षणार्थियों को विभिन्न विषयों के प्रशिक्षण के साथ- साथ तन- मन को स्वस्थ सुन्दर रखने वाले सहज सरल प्रज्ञायोग का सम्यक् प्रशिक्षण भी दिये जाते हैं। आज जबकि विश्व भर में योग को लोग समझने लगे और सिखने लगे हैं, ऐसे में इस योग का महत्त्व और भी बढ़ गया है कि अब इसे जन- जन को सिखाया जाय।

यह सर्वविदित है कि भारत के योगप्रेमियों की माँग एवं प्रयास के अनुरूप माननीय प्रधानमन्त्री के प्रयत्न से संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग दिवस मनाने की सम्मति हुई और उसके बाद विश्व भर में योग के प्रति उत्साह और बढ़ा। इस वर्ष योग दिवस की तैयारियाँ भी जोरों से चल रही हैं। शांतिकुंज ने भी अपने विश्व भर में फैले परिजनों द्वारा योग के आयोजन करने को तत्पर है। इस हेतु योग प्रशिक्षक तैयार करने के उद्देश्य यह शिविर का आयोजन किया है।

इसके प्रथम सत्र को सम्बोधित करते हुए शांतिकुंज मनीषी श्री वीरेश्वर उपाध्याय ने कहा कि योग व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में सहयोगी होता है। उससे शरीर और मन स्वस्थ होकर सुखी जीवन का पथ प्रशस्त होता है। अतः सभी को योग का अभ्यास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रज्ञायोग सहज सरल योगासनों का समन्वय है जिसे हर आयु वर्ग के लोग कर सकते हैं। उन्होंने परिजनों को अपने अपने क्षेत्र में योग के आयोजन करने और योग का प्रशिक्षण देने हेतु आह्वान किया।


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