Published on 2016-06-03

हरिद्वार  ३ जून ।। 

भासंज्ञाप के तीन दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण शिविर का समापन 

गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रकोष्ठ के नेतृत्व में चल रहे तीन दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण शिविर का आज समापन हो गया। शिविर में उत्तराखण्ड, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान एवं मप्र के ५०० से अधिक शिक्षक- शिक्षिकाओं ने भागीदारी की। शिविर के विभिन्न चरणों में विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ शारीरिक व मानसिक विकास पर भी जोर दिया गया। साथ ही छात्र- छात्राओं में भारतीय संस्कृति के सूत्र को पिरोने के विविध उपायों पर चर्चा की  गयी। 

प्रतिभागियों से भेंट परामर्श के क्रम में संस्था की अधिष्ठात्री शैल दीदी ने कहा कि शिक्षकों को चाहिए कि विद्यार्थियों में शिक्षा अर्थात् किताबी ज्ञान के साथ विद्या अर्थात् जीवन जीने की कला को  भी समावेश करने की दिशा में सार्थक प्रयास करें, क्योंकि विद्यार्थी ही देश के भावी कर्णधार हैं। उन्होंने विवेक की देवी गायत्री व प्रखरता के देवता सूर्य की नियमित उपासना से अपने अन्दर की मलिनता को धोने का आवाहन किया। 

शिविर के समापन सत्र को संबोधित करते हुए व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्मा ने कहा कि भौतिकवाद की अंधी दौड़ में आज युवा भागते नजर आ रहे हैं। पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव से उन्हें उबारने के लिए रचनात्मक कार्यक्रमों की ओर मोड़ने और भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाले सत्साहित्यों के पठन- पाठन के लिए प्रेरित करने होंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया में ईश्वर ने सब  कुछ बनाया है। हमें उसका सदुपयोग करते हुए स्वयं, परिवार, समाज व राष्ट्र को ऊँचा उठाना है। उन्होंने कहा कि उन्नतिशील लोगों के कार्यक्षेत्र भले ही अलग- अलग रहे हों, पर तरीका सभी ने एक ही अपनाया है। वह सूत्र है- अपनी क्षमता को दुरुपयोग से बचाकर सदुपयोग में लगाना। इस मंत्र की साधना जो कोई भी करेगा, उन्हें सफलता अवश्य मिलेगी। शांतिकुंज मनीषी श्री वीरेश्वर उपाध्याय ने अध्यापक है युग निर्माता- छात्र राष्ट्र के भाग्य विधाता विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। 

तीन दिन तक चले इस प्रशिक्षक प्रशिक्षण शिविर में उत्तराखण्ड, राजस्थान, पंजाब, मप्र व हरियाणा के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में नैतिकता के पाठ भी पढाये जाने पर जोर दिया गया। साथ ही छात्र- छात्राओं में सुसंस्कारिता के बीज बोने के साथ भारतीय संस्कृति एवं उसमें निहित महान तथ्यों को आत्मसात करने की दिशा में सार्थक पहल करने पर चर्चा हुई। डॉ बृजमोहन गौड, भासंज्ञाप प्रभारी डॉ पीडी गुप्ता, श्री श्याम बिहारी दुबे, श्री दिनेश पटेल, अतुल द्विवेदी, राजेश मिश्रा आदि विषय विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।




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