Published on 2016-06-12

गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में तीन दिवसीय राष्ट्रीय शिक्षक गरिमा शिविर का शुभारंभ हुआ। इस शिविर  में झारखण्ड, बिहार, पं० बंगाल, आसाम व दक्षिण भारत के सैकड़ों शिक्षक एवं युवा सम्मिलित हैं। 

शिविर के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि भारत में वर्तमान परिस्थितियाँ ठीक सन् १९४७ की तरह निर्मित होने लगी हैं। जब स्वाधीनता की ज्वाला चरम सीमा पर थी और आज अनियमितताओं का दावानल हम सबको जकड़ता जा रहा है। वैसे ही प्रयास एक बार फिर करने होंगे, जैसे स्वाधीनता संग्राम के दौरान सामूहिक रूप से किये गये थे। तभी राष्ट्र के साथ- साथ आम लोगों का भी कल्याण हो सकेगा। 

राजस्थान के रणबाँकुरों की संकल्प शक्ति का बखान करते हुए अपने चित्तौड़गढ़ प्रवास की अनुभूतियाँ साझा करते हुए उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने अपने सीमित सैन्य व संसाधनों के बल से समर्थ मुगल साम्राज्यों के विरुद्ध न केवल लोहा लिया, बल्कि देश के गौरव को बचाया था। आज फिर से उसकी पुनरावृत्ति का समय आ गया है जब भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए संस्कृति प्रेमियों को कटिबद्ध होना पड़ेगा। 

देवसंस्कृति विवि के कुलाधिपति डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि आज सद्गुरु के सूत्रों पर चलने वाले, रचनात्मक कार्यों के प्रति समर्पित और प्रतिकूलताओं को चीरकर आगे बढ़ने वाले साहसी युवाओं की आवश्यकता है, जो राष्ट्र के नवनिर्माण में अपना योगदान दे सकें। गीता का संदर्भ देते हुए डॉ. पण्ड्याजी ने श्रीकृष्ण व अर्जुन संवाद का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को दुर्बल मानसिकता एवं दुर्गुणों को त्यागते हुए सृजन के कार्य में जुटना होगा। शिक्षकों को आवाहन करते हुए गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. पण्ड्याजी ने प्रतिकूलताओं के बीच स्वाभिमानी युवाओं को गढ़ने की  बात कही। 

राष्ट्र की वर्तमान स्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि आज देश की सीमाएँ असुरक्षा के घेरे में नजर आ रही हैं, ऐसे में हमें जहाँ धर्म और संस्कृति के लिए कार्य करना है, वहीं राष्ट्र की अखण्डता व अस्मिता को बनाये रखने के लिए भी कार्य करना है। उन्होंने कहा कि सन् २०१६ से लेकर २०२६ तक का समय महत्त्वपूर्ण है। इस समय हम संभल गये, तो आने वाले कई दशक अच्छे रहेंगे। इस अवसर पर श्री कालीचरण शर्मा, डॉ. ओपी शर्मा सहित शांतिकुंंज के अनेक अंतेःवासी कार्यकर्त्ता एवं राष्ट्रीय शिक्षक गरिमा शिविर एवं भविष्य निर्माता शिविर में विभिन्न राज्यों से आये लोग उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र का संचालन केदार प्रसाद दुबे ने किया।



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